वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में यूरोपीय साझा मुद्रा भारी दबाव का सामना कर रही है, जहां अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो फिसलकर 1.1350 के स्तर तक नीचे आ गया है। यह गिरावट सीधे तौर पर यूरो को जुलाई के अंत में देखे गए निचले स्तर के बराबर ले आई है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की मौद्रिक नीति को लेकर बने सतर्क रुख और नीति निर्माताओं द्वारा नपे-तुले कदमों की वकालत के बाद निवेशकों में यूरो के प्रति धारणा कमजोर हुई है। मौजूदा समय में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें 3.75% से 4.00% के दायरे में बनी हुई हैं, जबकि यूरोप में डिपॉजिट दर केवल 2.50% पर टिकी है। ब्याज दरों का यह भारी अंतर डॉलर को लगातार बढ़त दिला रहा है, जिसके चलते मुद्रा विनिमय बाजार में EUR/USD लगातार नीचे की ओर कारोबार कर रहा है।
बॉन्ड यील्ड और यूरोपीय सेंट्रल बैंक का नीतिगत गणित
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने स्पष्ट किया है कि सितंबर की बैठक के बाद से दीर्घकालिक ब्याज दरों में लगातार तेजी दर्ज की गई है। इस तरह उधारी लागत में वृद्धि होने से समग्र आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने का अनुमान है। इसके साथ ही ऊर्जा की बढ़ती लागत का अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव भी बैंक के पुराने अनुमानों से कहीं अधिक घट सकता है। आमतौर पर यूरोपीय महाद्वीप में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना वहां की मुद्रा के लिए सकारात्मक माना जाता है क्योंकि यह विदेशी पूंजी को आकर्षित करता है, परंतु नीतिगत स्तर पर इस बार स्थिति पूरी तरह विपरीत नजर आई।
क्रिस्टीन लेगार्ड ने बढ़ती हुई बॉन्ड यील्ड को एक ऐसे साधन के रूप में रेखांकित किया जो बाजार में वित्तीय सख्ती लाने का काम खुद कर रहा है। इसका सीधा अर्थ यह निकाला गया कि केंद्रीय बैंक को स्वयं ब्याज दरों में बहुत आक्रामक बढ़ोतरी करने की आवश्यकता नहीं रह जाएगी। मुद्रा व्यापारियों ने इस वक्तव्य को भविष्य में दर वृद्धि की गति धीमी होने के स्पष्ट संकेत के रूप में लिया। जब फेडरल रिजर्व 3.75% से 4.00% की मजबूत दर के साथ खड़ा है, तब यूरोपीय सेंट्रल बैंक की ओर से संभावित कम दरों ने यूरो की स्थिति को कमजोर कर दिया है।
मुद्रास्फीति का दबाव और आगामी नीतिगत कार्यक्रम
आने वाले दिनों में मुद्रास्फीति के ताजे आंकड़ों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी। शुक्रवार को सितंबर महीने के लिए यूरोजोन का फ्लैश हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज यानी HICP डेटा 09:00 GMT पर प्रकाशित होना निर्धारित है। हेडलाइन मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 3.2% से बढ़कर 3.6% पर पहुंचने का अनुमान जताया गया है। वहीं दूसरी ओर, कोर मुद्रास्फीति, जिसमें ऊर्जा, खाद्य, शराब और तंबाकू के अस्थिर घटकों को अलग रखा जाता है, उसके 2.4% से बढ़कर 2.5% रहने की उम्मीद है।
यह कोर मुद्रास्फीति का आंकड़ा केंद्रीय बैंक के लिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे तौर पर द्वितीयक प्रभावों यानी सेकेंड-राउंड इफेक्ट्स से जुड़ा होता है। लेगार्ड ने पहले संकेत दिया था कि ऐसे प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यदि कोर रीडिंग 2.5% या उससे अधिक आती है, तो 29 अक्टूबर को होने वाली अगली नीतिगत बैठक से पहले नपे-तुले कदमों की वर्तमान रणनीति की कड़ी परीक्षा होगी। इससे पहले क्रिस्टीन लेगार्ड का संबोधन मंगलवार को 11:00 GMT और गुरुवार को 13:30 GMT पर होगा। इसके अतिरिक्त शुक्रवार के मुद्रास्फीति आंकड़े आने से पहले बैंक के विभिन्न अधिकारियों के 13 अन्य भाषण भी आयोजित होने हैं।
तकनीकी विश्लेषण, प्रमुख स्तर और लाइव संकेत
विदेशी मुद्रा चार्ट्स पर 23 सितंबर को आई कमजोरी के बाद से किसी भी तेजी में यूरो शुक्रवार के उच्च स्तर 1.1400 के ठीक ऊपर तक ही पहुंच सका है। यह 1.1400 का क्षेत्र फिलहाल मजबूत प्रतिरोध के रूप में खड़ा है, जबकि इससे ऊपर 1.1450 वह अहम स्तर है जो पिछले सप्ताह टूटा था। नीचे की तरफ 1.1350 का स्तर प्रमुख समर्थन के तौर पर काम कर रहा है, जिसने सोमवार और जुलाई के अंत में गिरावट को थामा था। यदि यह स्तर नीचे की ओर टूटता है, तो जून के अंतिम दिनों में बना 1.1300 का निचला स्तर अगला मुख्य पड़ाव होगा, जो गर्मियों के कारोबारी दायरे की अंतिम सीमा थी।
तकनीकी रुझान 1.1400 के नीचे मंदी की ओर झुका हुआ है, जहां व्यापारी दैनिक आधार पर 1.1350 और उसके बाद 1.1300 के नीचे बंद होने की तलाश में हैं। हालांकि, दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी Stoch RSI वर्तमान में लगभग 5 के स्तर पर आ चुका है और सितंबर के मध्य से 20 के नीचे टिका हुआ है। अत्यधिक ओवरसोल्ड होने की यह स्थिति बड़े ब्रेकडाउन से पहले एक संभावित उछाल की संभावना को भी दर्शाती है। यदि दैनिक बंद 1.1450 के ऊपर होता है, तो शॉर्ट पोजीशन का यह चक्र समाप्त माना जाएगा।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, EUR/USD फिलहाल 1.14 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 1.14 के स्तर से 0.11% की गिरावट दर्शाता है। 52 हफ्तों के दौरान इस जोड़ी का दायरा 1.13 से 1.20 रहा है और मौजूदा ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के 1.00 गुना पर है। 14-दिवसीय RSI 24 पर ओवरसोल्ड क्षेत्र में है। MACD -0.01 पर है जो सिग्नल लाइन -0.00 के नीचे मंदी का संकेत देता है। मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय EMA 1.15, 50-दिवसीय EMA 1.15 और 200-दिवसीय EMA 1.16 पर स्थित हैं, जहां 50-दिवसीय EMA 200-दिवसीय रेखा से नीचे आकर डेथ क्रॉस की पुष्टि कर रहा है। बॉलिंजर बैंड 1.13 से 1.17 के बीच फैले हैं और 14-दिवसीय ADX 35 के साथ ट्रेंड की मजबूती दिखा रहा है। पिवट 1.14 पर है, जबकि 20-दिवसीय दायरा 1.14 समर्थन और 1.17 प्रतिरोध के बीच स्थित है।
वैश्विक वित्तीय तंत्र में यूरो और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की भूमिका
यूरोपीय संघ के 20 सदस्य देशों की साझा मुद्रा के रूप में यूरो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में अमेरिकी डॉलर के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्थान रखता है। साल 2022 के वैश्विक विदेशी मुद्रा लेनदेन में यूरो की हिस्सेदारी 31% रही थी, जिसमें दैनिक औसत कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक दर्ज किया गया। मुद्रा जोड़ों में EUR/USD दुनिया में सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाली जोड़ी है, जो कुल वैश्विक लेनदेन का लगभग 30% हिस्सा कवर करती है। इसके बाद EUR/JPY का हिस्सा 4%, EUR/GBP का 3% और EUR/AUD का 2% रहता है।
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक यूरोजोन के केंद्रीय बैंक के तौर पर काम करता है और मौद्रिक नीति तथा ब्याज दरों का निर्धारण करता है। इसका प्राथमिक अधिदेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका मतलब मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना अथवा आर्थिक विकास को गति देना है। बैंक का प्रमुख हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना है, जहां ऊंची ब्याज दरें या भविष्य में दरों में वृद्धि की उम्मीद यूरो को मजबूत बनाती है। बैंक की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार बैठक करती है, जिसमें यूरोजोन के राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुख और क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्य नीतिगत निर्णय लेते हैं।
आर्थिक संकेतक और व्यापार संतुलन का प्रभाव
यूरो की दिशा तय करने में हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज यानी HICP मुद्रास्फीति का सबसे निर्णायक पैमाना है। यदि मुद्रास्फीति बैंक के 2% के तय लक्ष्य से ऊपर निकलती है, तो बैंक को कीमतें काबू में करने के लिए ब्याज दरें बढ़ानी पड़ती हैं। अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को अपनी पूंजी लगाने के लिए आकर्षित करती हैं, जिससे यूरो में स्वाभाविक मजबूती आती है।
इसके साथ ही सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के PMI, रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता भावना सर्वेक्षण जैसे डेटा भी मुद्रा के स्वास्थ्य को दर्शाते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था विदेशी निवेश को बढ़ावा देती है और दर वृद्धि की संभावना बढ़ाकर यूरो को समर्थन देती है। इसके विपरीत, कमजोर आर्थिक आंकड़े यूरो पर बिकवाली का दबाव बनाते हैं। यूरोजोन की अर्थव्यवस्था में जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन की 75% हिस्सेदारी होने के कारण इन चार देशों के आंकड़े सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसके अलावा व्यापार संतुलन भी महत्वपूर्ण है, जो निर्यात से होने वाली आय और आयात पर होने वाले खर्च का अंतर मापता है। उच्च मांग वाले उत्पादों का निर्यात करने से विदेशी खरीदारों द्वारा मुद्रा की मांग बढ़ती है, जिससे सकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा को मजबूती प्रदान करता है।
वैश्विक कमोडिटी और अन्य मुद्रा बाजारों की हलचल
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में भी व्यापक हलचल देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ताओं की उम्मीदें धुंधली पड़ने से बाजार की भावनाएं आहत हुई हैं, जिसके कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल आया और अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। इस भू-राजनीतिक तनाव के चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.10% फिसलकर 0.7016 पर आ गया, जहां रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के आगामी मौद्रिक फैसले से पहले कारोबारी गतिविधियां काफी शांत रहीं।
दूसरी तरफ USD/JPY ने निचले स्तरों से खरीदारी दर्ज करते हुए शुक्रवार की गिरावट के एक हिस्से को वापस हासिल कर लिया। जापानी अधिकारियों द्वारा येन को सहारा देने के लिए हस्तक्षेप की अटकलों के बीच बैंक ऑफ जापान के नरम रुख वाले कार्यवृत्त ने जापानी मुद्रा की बढ़त को रोक दिया। अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसने मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से हवा दे दी है और अक्टूबर में फेड द्वारा दर वृद्धि के दांव को मजबूत कर USD/JPY को 158.00 की ओर धकेल दिया है। पिछले सप्ताह फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों ने ही ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की थी और दोनों ही भविष्य के निर्णयों को आर्थिक आंकड़ों पर आधारित रखने का संकेत दे रहे हैं।
कमोडिटी बाजार में सोने पर भी भारी दबाव देखा गया। भू-राजनीतिक तनाव, मजबूत डॉलर और बढ़ती अमेरिकी यील्ड के संयुक्त असर से सोना सप्ताह की शुरुआत में फिसलकर 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पास आ गया, जो अगस्त की शुरुआत के बाद का निचला स्तर है। ब्रिटेन में डीजल की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जहां आर्थिक चिंताओं के बीच फेड द्वारा आक्रामक दर वृद्धि चक्र की आवश्यकता पर चर्चा हो रही है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद आपूर्ति की चिंताओं में कुछ राहत देखी गई है, जबकि वित्तीय बाजार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश रुझानों की दिशा पर भी बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

















