देश के औद्योगिक परिदृश्य में अगस्त 2026 के दौरान उल्लेखनीय मजबूती देखने को मिली है। आधिकारिक तौर पर जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी IIP सालाना आधार पर 8 फीसदी की दर से बढ़ा है। इससे पिछले महीने यानी जुलाई में औद्योगिक विकास दर 7.4 फीसदी रही थी। इस पूरे उछाल में सबसे बड़ा योगदान विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ठोस गतिविधियों का रहा, जिसने समूचे उत्पादन आंकड़े को मजबूत सहारा दिया।
सेक्टरवार स्थिति: बिजली चमकी, खनन में आई सुस्ती
नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) द्वारा साझा की गई जानकारी दर्शाती है कि अगस्त के महीने में अकेले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 9 फीसदी की शानदार वृद्धि हासिल की। इसी दौरान बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र का प्रदर्शन भी बेहद मजबूत रहा और इसमें 12.3 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। इसके विपरीत, माइनिंग और क्वॉरिंग सेक्टर में दबाव देखने को मिला, जहां उत्पादन में 5.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। एक साल पहले इसी समान अवधि में खनन क्षेत्र ने 15.8 फीसदी की जोरदार बढ़त हासिल की थी। इसके साथ ही जुलाई महीने के IIP आंकड़ों में संशोधन भी किया गया है। पूर्व में जुलाई के लिए अस्थायी ग्रोथ 6.7 फीसदी आंकी गई थी, जिसे अब संशोधित कर 7.4 फीसदी कर दिया गया है।
शुरुआती पांच महीनों में औद्योगिक रफ्तार बेहतर
चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों यानी अप्रैल से अगस्त की समयावधि पर नजर डालें तो कुल औद्योगिक उत्पादन में 6.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की इसी समान अवधि में यह आंकड़ा 4.2 फीसदी रहा था। यह तुलना स्पष्ट करती है कि चालू कारोबारी साल में कारखानों और संयंत्रों का कामकाज पिछले साल के मुकाबले कहीं अधिक तेज रहा है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र से जुड़े कुल 23 प्रमुख उद्योग समूहों में से 18 समूहों ने अगस्त में सकारात्मक बढ़त दर्ज करने में सफलता पाई है।
ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिकल सेगमेंट में सबसे बड़ा उछाल
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर कई विशिष्ट उद्योगों ने बेहद तेज रफ्तार दिखाई। मोटर व्हीकल, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर के विनिर्माण में 25.2 फीसदी की भारी वृद्धि दर्ज हुई, जिसमें पैसेंजर कार, कमर्शियल व्हीकल, ऑटो पार्ट्स, स्पेयर और एक्सेसरीज निर्माण की भूमिका अहम रही। इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट तैयार करने वाले उद्योगों का प्रदर्शन और भी शानदार रहा, जहां 30.9 फीसदी की मजबूत तेजी देखने को मिली। इसी तरह अन्य ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट निर्माण में 25.3 फीसदी का इजाफा हुआ, जिसके दायरे में दोपहिया वाहन, रेलवे रोलिंग स्टॉक और उनसे संबंधित कलपुर्जे शामिल रहे।
उपयोग आधारित वर्गीकरण: कैपिटल गुड्स में जोरदार मांग
उत्पादों के उपयोग पर आधारित क्लासिफिकेशन के अनुसार, निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाले कैपिटल गुड्स सेगमेंट में 16.9 फीसदी की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई। इंटरमीडिएट गुड्स के उत्पादन में भी 13.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। आम उपभोक्ताओं के टिकाऊ सामान यानी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का उत्पादन 11.1 फीसदी चढ़ा। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन से जुड़े सामानों में 6.4 फीसदी, प्राइमरी गुड्स में 3.5 फीसदी और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स के उत्पादन में 2.1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।


















