अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में आई नरमी और मजबूत अमेरिकी डॉलर के मिले-जुले असर के कारण गुरुवार को भारतीय रुपया सीमित दायरे में खुला। एक तरफ अमेरिकी ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस (BEA) द्वारा जारी पीसीई मुद्रास्फीति आंकड़ों के बाद डॉलर सूचकांक को मजबूती मिली है, वहीं दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था को कुछ राहत प्रदान की है। वैश्विक मुद्रा बाजार में फिलहाल निवेशक फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉरश के आगामी जैक्सन होल सिम्पोजियम भाषण का इंतजार कर रहे हैं, जो ब्याज दरों और मौद्रिक नीति की भावी दिशा को लेकर अहम संकेत दे सकता है।
यूएस पीसीई मुद्रास्फीति के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस (BEA) की ओर से जारी हालिया आंकड़ों के मुताबिक कोर पीसीई प्राइस इंडेक्स सालाना आधार पर 3.3% दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा बाजार के अनुमानों और पिछले चक्र के आंकड़ों के बिल्कुल अनुरूप रहा। कोर पीसीई को फेडरल रिजर्व द्वारा महंगाई का सबसे भरोसेमंद पैमाना माना जाता है। वहीं दूसरी ओर, मुख्य हेडलाइन पीसीई प्राइस इंडेक्स सालाना 3.7% की दर पर स्थिर रहा, जबकि बाजार विशेषज्ञों को इसमें 3.6% तक की सुस्ती या ठंडक आने की उम्मीद थी।
इन आंकड़ों के सामने आने के बावजूद सितंबर महीने में होने वाली फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत बैठक के दौरान ब्याज दरों में बदलाव को लेकर बाजार की उम्मीदों में कोई खास फेरबदल नहीं देखा गया है। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी ग्रीनबैक की मजबूती को मापने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) 99.15 के स्तर के आसपास अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। निवेशक अब जैक्सन होल में फेड अध्यक्ष के संबोधन पर टिकी निगाहें लगाए बैठे हैं, जहां उन्हें केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता बनाए रखने और मुद्रास्फीति नियंत्रण के बीच संतुलन साधने की कठिन चुनौती का सामना करना होगा।
कच्चे तेल के दामों में गिरावट और भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत
घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स (MCX) पर 21 सितंबर को समाप्त होने वाला क्रूड ऑयल कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती सत्र के दौरान 0.75% गिरकर 7,834 रुपये के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था। वैश्विक स्तर पर ब्रेंट और डब्लूटीआई क्रूड ऑयल की कीमतों में भी नरमी का रुख देखा गया है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार क्रूड ऑयल (CL=F) घटकर 81.75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बंद हुआ है, जो पिछले बंद 82.23 डॉलर से 0.58% कम है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान कच्चे तेल का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय RSI 48 पर है और EMA20 82.94 डॉलर के पास बना हुआ है।
कच्चे तेल की कीमतों में कमी आना भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहद अनुकूल स्थिति पैदा करता है। भारत अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर रहता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड सस्ता होता है, तो भारत का आयात बिल घटता है, जिससे चालू खाते का घाटा (CAD) नियंत्रित रहता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होता है। इसके साथ ही, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक मोर्चे पर IRGC ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ओमान के साथ केवल एक समझौते से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलना संभव नहीं होगा, जिसके कारण वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
USD/INR का तकनीकी विश्लेषण और चार्ट संरचना
दैनिक चार्ट पर नजर डालें तो USD/INR की जोड़ी 95.42 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो अल्पकालिक रूप से हल्के मंदी के रुख को दर्शाती है। करेंसी पेयर 20-पीरियड एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के स्तर 95.5543 से थोड़ा नीचे फिसल गया है। व्यापक चार्ट संरचना पर बना ट्रायंगल पैटर्न स्पष्ट रूप से घटती अस्थिरता और एक संकीर्ण दायरे वाले साइडवेज ट्रेंड की ओर इशारा कर रहा है।
रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI-14) वर्तमान में 40.00 से 60.00 के तटस्थ दायरे में बना हुआ है, जो निवेशकों के बीच अनिश्चितता और स्पष्ट दिशा के अभाव को प्रदर्शित करता है। तकनीकी मोर्चे पर ऊपर की तरफ पहला प्रतिरोध 20-पीरियड EMA यानी 95.55 के स्तर पर स्थित है। यदि जोड़ी इस स्तर को पार करती है, तो अगला प्रतिरोध डाउनवर्ड ट्रेंडलाइन ब्रेक लेवल 96.5178 के पास देखा जाएगा। इसके विपरीत, नीचे की तरफ immediate सपोर्ट राइजिंग ट्रेंडलाइन ब्रेक प्राइस 95.40 पर है, जबकि गहरा तकनीकी सपोर्ट ट्रेंडलाइन के शुरुआती बिंदु 94.16 के आसपास मौजूद है, जहां खरीदार व्यापक अपट्रेंड की रक्षा करने का प्रयास कर सकते हैं।
भारतीय रुपये की चाल को प्रभावित करने वाले मुख्य मैक्रो-इकोनॉमिक कारक
भारतीय रुपया (INR) दुनिया की उन मुद्राओं में शामिल है जो बाहरी और वैश्विक कारकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। रुपये की विनिमय दर मुख्य रूप से तीन अंतरराष्ट्रीय चरों पर निर्भर करती है: कच्चे तेल की वैश्विक दरें, अमेरिकी डॉलर का अंतरराष्ट्रीय मूल्य और देश में आने वाला विदेशी निवेश। चूंकि भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार अमेरिकी डॉलर में निपटाया जाता है, इसलिए डॉलर की मजबूती का सीधा असर रुपये की सेहत पर पड़ता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मुद्रा बाजार में सीधे हस्तक्षेप के जरिए विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकता है ताकि व्यापारिक गतिविधियों में स्थिरता बनी रहे। इसके अतिरिक्त, RBI अपनी रेपो रेट नीति के माध्यम से घरेलू मुद्रास्फीति को अपने 4% के निर्धारित लक्ष्य के भीतर बनाए रखने का प्रयास करता है। जब रिजर्व बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, तो आमतौर पर रुपया मजबूत होता है। ऐसा कैरी ट्रेड की वजह से होता है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय निवेशक कम ब्याज दर वाले देशों से सस्ता कर्ज लेकर भारत जैसे अधिक ब्याज दर देने वाले देशों के बाजारों में पूंजी निवेश करते हैं और ब्याज अंतर का लाभ उठाते हैं।
अन्य व्यापक आर्थिक कारकों में देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर, व्यापार संतुलन और विदेशी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष निवेश (FDI और FII) का प्रवाह शामिल है। मजबूत GDP वृद्धि से विदेशी निवेशक आकर्षित होते हैं, जिससे रुपये की मांग बढ़ती है। यदि भारत की मुद्रास्फीति दर अन्य मित्र देशों की तुलना में अधिक होती है, तो यह मुद्रा के अवमूल्यन का कारण बनती है क्योंकि निर्यात महंगा हो जाता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में RBI द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना से विदेशी पूंजी का आगमन पुनः शुरू हो सकता है।
वैश्विक मुद्रा बाजार और क्रिप्टो संपत्तियों का हाल
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को अन्य प्रमुख जोड़ियों में भी सीमित हलचल देखी गई। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान GBP/USD पेयर 1.3600 के स्तर से नीचे अपने साप्ताहिक निचले स्तर के करीब स्थिर होता दिखा। हालांकि, फेड की भविष्य की दर नीति पर अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद में गिरावट सीमित रही। दूसरी तरफ, यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) के सख्त मौद्रिक रुख के समर्थन से EUR/USD मामूली बढ़कर 1.1655 के आसपास पहुंच गया।
एशियाई सत्र में दक्षिण कोरियाई वोन (KRW) में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती देखी गई, जिसके चलते USD/KRW पेयर 0.3% गिरकर 1,380 के करीब आ गया। बैंक ऑफ कोरिया (BOK) द्वारा लगातार की गई ब्याज दर वृद्धियों के कारण यह पेयर अपने 11 महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। वहीं, क्रिप्टो बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा, जहां बिटकॉइन (BTC) उच्च अमेरिकी पीसीई आंकड़ों के बावजूद 78,000 डॉलर के स्तर से ऊपर अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। इस दौरान SPX6900 (SPX) और VeChain (VET) में भी पिछले 24 घंटों में दोहरे अंकों में तेजी दर्ज की गई।



















