सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र में घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स भारी बिकवाली के दबाव में बिखर गए। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट और अमेरिका के साथ जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी ने वैश्विक निवेशकों के रुख को सतर्क कर दिया। इस दोतरफा दबाव के चलते भारतीय बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब 1.5 प्रतिशत से अधिक का नुकसान दर्ज किया गया। चौतरफा बिकवाली की वजह से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का सम्मिलित बाजार पूंजीकरण तकरीबन ₹8 लाख करोड़ घटकर लगभग ₹474 लाख करोड़ के स्तर पर आ गया।
सेंसेक्स में 1124 अंकों का गोता, 22,800 के नीचे फिसला निफ्टी
ट्रेडिंग सत्र के समापन पर बीएसई का तीस शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,124.02 अंक अथवा 1.52 प्रतिशत का गहरा गोता लगाकर 72,771.72 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी तरफ, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 50 भी 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत लुढ़ककर 22,780.25 के स्तर तक गिर गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE पर बिकवाली का दायरा बहुत व्यापक नजर आया। आंकड़ों के अनुसार, एनएसई पर सक्रिय 2,716 कंपनियों के शेयर गिरावट के लाल निशान में बंद हुए, जबकि इसके विपरीत सिर्फ 869 शेयरों में खरीदारी का समर्थन देखा गया और वे हरे निशान में टिक पाए। इसके अलावा 91 कंपनियों के शेयरों में किसी प्रकार का बदलाव नहीं देखा गया और वे सपाट बंद हुए।
तीस में से उनतीस सेंसेक्स शेयरों में नुकसान, इन्फोसिस अकेला सहारा
सेंसेक्स की शीर्ष 30 कंपनियों में से 29 शेयर नुकसान दर्ज करते हुए लाल निशान में बंद हुए। भारी गिरावट का नेतृत्व एलएंडटी और पावर ग्रिड ने किया, जिनके भाव में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा अदाणी पोर्ट्स, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के शेयर भी 2 प्रतिशत से अधिक फिसलकर बंद हुए। पूरे सेंसेक्स पैक में सिर्फ इन्फोसिस का शेयर ही ऐसा रहा, जो गिरावट के इस तूफान में संभल सका और मामूली बढ़त हासिल करके हरे निशान में बंद हुआ। व्यापक निफ्टी 50 के स्तर पर बात करें तो जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, अदानी एंटरप्राइजेज और अदानी पोर्ट्स सबसे बड़े नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर, डॉ. रेड्डीज लैब्स और इन्फोसिस बढ़त हासिल करने वाले सीमित शेयरों की कतार में रहे।
सभी सेक्टर्स में मंदी का असर, पीएसयू बैंक और टेलीकॉम सबसे ज्यादा टूटे
सोमवार को बाजार में आई इस मंदी का प्रभाव किसी एक खास वर्ग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सभी सेक्टोरल सूचकांक लाल निशान के दायरे में सिमट गए। सरकारी बैंकों के प्रदर्शन को दर्शाने वाला निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 3 प्रतिशत से अधिक टूटकर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जबकि टेलीकॉम इंडेक्स में भी लगभग 2 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त ऑटोमोबाइल, वित्तीय सेवाएं, एफएमसीजी, धातु, प्राइवेट बैंक और रियल्टी समेत अधिकांश प्रमुख सेक्टर्स 1 से 2 प्रतिशत तक के नुकसान के साथ बंद हुए। व्यापक बाजार का रुख भी कमजोर बना रहा, जहां निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों सूचकांकों में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
गिरावट के प्रमुख कारण और वोलैटिलिटी में उछाल
बाजार में इस व्यापक बिकवाली के पीछे सबसे प्रमुख वजह ईरान और अमेरिका के मध्य बढ़ता तनाव रहा। इस भू-राजनीतिक टकराव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को हवा दी, जिससे ऊर्जा लागत और मुद्रास्फीति को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ गईं। ईंधन की बढ़ती लागत का सीधा असर कॉरपोरेट कंपनियों के मार्जिन पर पड़ने की आशंका है। इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी ने भी उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का दबाव बना दिया। घरेलू बाजार में अनिश्चितता और जोखिम का पैमाना माना जाने वाला इंडिया VIX सूचकांक करीब 12 प्रतिशत की छलांग लगाकर 14 के स्तर के आसपास पहुंच गया, जिससे स्पष्ट हो गया कि कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में अत्यधिक अस्थिरता हावी रही।


















