अमेरिकी मुद्रास्फीति के ताज़ा आंकड़ों में नरमी के संकेत मिलने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों को अपेक्षित सहारा नहीं मिल सका। लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई जोरदार तेजी और डॉलर इंडेक्स के निचले स्तरों से उबरने के चलते बुधवार को बहुमूल्य धातु में बिकवाली देखी गई। हाजिर सोने का भाव (XAU/USD) 0.6% गिरकर 4,155 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि इससे पहले के सत्र में धातु ने 4,200 डॉलर के प्रमुख स्तर के पार निकलने की कोशिश की थी। फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता और आर्थिक वृद्धि के मजबूत आंकड़ों ने निवेशकों को सतर्क मुद्रा में ला दिया है।
मुद्रास्फीति आंकड़ों में नरमी और फेडरल रिजर्व का रुख
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पसंदीदा मुद्रास्फीति पैमाने, कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स में अगस्त के दौरान सालाना आधार पर 3.0% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह आंकड़ा जुलाई के स्तर के बराबर ही रहा, जबकि बाजार के विश्लेषक 3.3% वृद्धि का अनुमान जता रहे थे। इसी अवधि के लिए हेडलाइन पीसीई दर 3.4% रही, जो जुलाई के 3.4% के समान है और 3.7% तक बढ़ने के बाजार अनुमानों से काफी नीचे रही। यद्यपि ये आंकड़े केंद्रीय बैंक के 2% के दीर्घकालिक लक्ष्य से ऊपर बने हुए हैं, लेकिन अनुमान से कम रहने के कारण निवेशकों को उम्मीद बंधी कि अक्टूबर में फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बदलाव करने से बच सकता है और मौजूदा रुख को बरकरार रखेगा।
मुद्रास्फीति के इन आंकड़ों से पहले जारी हुए श्रम बाजार के आंकड़ों ने भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती की पुष्टि की। एडीपी के रोजगार आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में निजी कंपनियों ने 90,000 नई नौकरियां जोड़ीं, जो 70,000 के पूर्वानुमान से अधिक थीं। इन मजबूत आंकड़ों ने फेड चेयरमैन केविन वार्श के उस आकलन को पुष्ट किया कि अमेरिकी श्रम बाजार पूर्ण रोजगार की स्थिति के अनुकूल बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में व्यापार घाटा बढ़ा है, लेकिन दूसरी तिमाही के संशोधित सकल घरेलू उत्पाद (GDP) आंकड़ों में अर्थव्यवस्था 2.2% की वार्षिक दर से बढ़ी, जो 1.5% के पिछले अनुमान से काफी बेहतर है।
बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स की चाल
आर्थिक वृद्धि और रोजगार के मजबूत आंकड़ों का असर सीधे तौर पर अमेरिकी बॉन्ड बाजार में देखा गया। लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड में तीखा उछाल दर्ज हुआ, जहां 30 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 8 आधार अंक उछलकर 5.647% पर पहुंच गई। वहीं, बेंचमार्क 10 वर्षीय अमेरिकी नोट की यील्ड लगभग 7 आधार अंक बढ़कर 5.302% दर्ज की गई। बॉन्ड यील्ड में इस इजाफे से बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों, खासकर सोने की आकर्षण क्षमता कमजोर हुई है, क्योंकि निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाला रिटर्न अधिक आकर्षक हो जाता है।
डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापता है, शुरुआती सत्र में गिरकर 101.02 के निचले स्तर तक आ गया था। हालांकि, मजबूत बॉन्ड यील्ड के दम पर डॉलर ने बाद में तेज वापसी की और 101.30 के स्तर को दोबारा हासिल करते हुए दैनिक आधार पर बढ़त दर्ज की। डॉलर के निचले स्तरों से उबरने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर में मूल्यवर्गित सोने की खरीद अधिक महंगी हो गई, जिसका सीधा असर कीमतों पर देखने को मिला।
तकनीकी परिदृश्य और प्रमुख समर्थन स्तर
दैनिक चार्ट पर सोने की स्थिति का विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि धातु में गिरावट का रुख अब भी बना हुआ है। तकनीकी चार्ट पर सोना एक बुलिश वेज पैटर्न की निचली ट्रेंडलाइन को दोबारा हासिल करने में विफल रहा है। यद्यपि अल्पावधि गति में कुछ सुधार के संकेत हैं, लेकिन रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) मंदी के दायरे में बना हुआ है, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार में विक्रेता हावी हैं और कीमतों के लिए सबसे आसान रास्ता नीचे की ओर ही है।
कारोबारियों के लिए तात्कालिक समर्थन स्तर 4,100 डॉलर प्रति औंस पर बना हुआ है। यदि कीमतें इस स्तर से नीचे फिसलती हैं, तो अगला बड़ा समर्थन 29 जुलाई का निचला स्तर 3,996 डॉलर होगा। इसके बाद 17 जुलाई को बना 3,959 डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण रहेगा। यदि मंदी का दबाव इन दोनों स्तरों को तोड़ता है, तो बाजार की नजर साल के निचले स्तर 3,941 डॉलर पर टिक जाएगी। ऊपर की ओर, 4,200 डॉलर का स्तर एक कड़े प्रतिरोध के रूप में काम कर रहा है।
लाइव बाजार आंकड़े और तकनीकी संकेतक
कमोडिटी सत्र के क्लोजिंग बेल आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर गोल्ड वायदा (GC=F) 4,181 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 4,180 डॉलर से 0.04% की मामूली बढ़त दिखाता है। धातु का 52 हफ्तों का दायरा 3,821 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि मौजूदा कारोबारी वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.78 गुना है। 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 34 पर दर्ज किया गया है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र के करीब होने के बावजूद मंदी के दबाव को दर्शाता है। एमएसीडी (MACD) इंडिकेटर -55.38 पर है जबकि सिग्नल लाइन -26.01 पर है, जिससे हिस्टोग्राम -29.36 के साथ नकारात्मक बना हुआ है।
मूविंग एवरेज के मोर्चे पर, 20-दिवसीय ईएमए 4,337 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,359 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,438 डॉलर पर स्थित हैं। साथ ही, 50-दिवसीय एसएमए 4,363 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 4,555 डॉलर पर हैं। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसलना एक डेथ क्रॉस दर्शाता है, जो दीर्घकालिक मंदी की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड का दायरा 4,171 डॉलर से 4,557 डॉलर (मध्य रेखा 4,364 डॉलर) है, और भाव वर्तमान में बैंड के निचले हिस्से के करीब है। एडीएक्स (ADX) 19 पर एक सीमित दायरे का संकेत दे रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 13 और सिग्नल लाइन 10 पर है। दैनिक अस्थिरता को मापने वाला एटीआर (ATR) 99.30 पर है, जिसे स्टॉप-लॉस बफर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। पिवट स्तर 4,204 डॉलर पर है, जिसके ऊपर आर1 4,229 डॉलर और आर2 4,276 डॉलर प्रतिरोध हैं, जबकि नीचे एस1 4,156 डॉलर और एस2 4,131 डॉलर समर्थन स्तर हैं।
वैश्विक आर्थिक प्रणाली में सोने का महत्व
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा से मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में एक अपरिहार्य भूमिका निभाई है। आभूषणों के निर्माण और इसकी चमक के अलावा, आधुनिक वित्तीय बाजारों में सोने को संकट के समय सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प (सेफ-हेवन एसेट) माना जाता है। किसी भी विशिष्ट सरकार या जारीकर्ता संस्था पर निर्भर न होने के कारण, मुद्रा अवमूल्यन और अनियंत्रित मुद्रास्फीति के दौर में यह संपत्ति के मूल्य को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी जरिया साबित होता है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। संकट के समय अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को स्थिरता प्रदान करने और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी करते हैं। मजबूत स्वर्ण भंडार किसी भी देश की आर्थिक साख और वित्तीय संप्रभुता का प्रतीक माना जाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडारों में रिकॉर्ड 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक निरंतर अपने सोने के भंडार का विस्तार कर रहे हैं।
मुद्रा बाजारों और जोखिम परिसंपत्तियों का प्रभाव
सोने का अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी बॉन्ड के साथ ऐतिहासिक रूप से विपरीत संबंध रहता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो जाता है, जिससे इसमें निवेश बढ़ता है। इसके विपरीत, मजबूत डॉलर और बढ़ती ब्याज दरें सोने की मांग पर नकारात्मक असर डालती हैं। शेयर बाजारों जैसी जोखिम वाली परिसंपत्तियों के साथ भी सोने का विपरीत रुझान देखा जाता है; शेयर बाजार में तेजी आने पर सुरक्षित निवेश की मांग घटती है, जबकि वित्तीय बाजारों में बिकवाली के दौर में सोने की चमक बढ़ जाती है।
अन्य मुद्रा जोड़ियों पर नजर डालें तो बुधवार को एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) 0.6950 के दो महीने के निचले स्तर पर रहा, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के कम कोर सीपीआई आंकड़ों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को धीमा कर दिया। यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) 157.00 के नीचे बना रहा, जहां बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख और संभावित हस्तक्षेप की अटकलों ने येन को समर्थन दिया। यूरो (EUR/USD) गिरकर 1.1312 पर आ गया, जो मई 2025 के बाद का निचला स्तर है और जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। क्रिप्टो बाजार में बिटकॉइन 83,000 डॉलर के समर्थन स्तर पर टिका रहा, एथेरियम 2,600 डॉलर और 2,700 डॉलर के दायरे में रहा, जबकि एक्सआरपी 1.50 डॉलर के करीब ट्रेड करता दिखाई दिया।


















