घरेलू शेयर बाजारों में पिछले दो दिनों से चला आ रहा बिकवाली का सिलसिला बुधवार को आखिरकार थम गया। चौतरफा लिवाली के दम पर बेंचमार्क सूचकांकों ने जोरदार वापसी की और प्रमुख स्तरों को फिर से हासिल कर लिया। हालांकि सत्र की शुरुआत में मामूली उतार-चढ़ाव देखा गया था, लेकिन दोपहर तक विभिन्न सेक्टरों में आई मजबूती ने बाजार को ऊपरी स्तरों पर बनाए रखा। कारोबार खत्म होने तक बीएसई सेंसेक्स 332.63 अंक अथवा 0.45 प्रतिशत की छलांग लगाकर 74,336.45 के स्तर पर जा पहुंचा। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 में भी 99 अंक यानी 0.43 प्रतिशत का इजाफा हुआ और यह 23,217.60 के आंकड़े पर टिकने में सफल रहा।
उपभोक्ता उत्पाद और वित्तीय शेयरों ने भरी हुंकार
बुधवार के कारोबारी सत्र की तेजी की कमान मुख्य रूप से एफएमसीजी और बैंकिंग क्षेत्र की कंपनियों के हाथों में रही। दैनिक उपभोग की वस्तुओं से जुड़ा निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 1.82 प्रतिशत उछलकर बंद हुआ, जो सेक्टोरल सूचकांकों में सबसे आगे रहा। इसके साथ ही सरकारी बैंकों के निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 1.27 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि निजी बैंकों का सूचकांक 0.73 प्रतिशत सुधरा। इसके अतिरिक्त रियल एस्टेट शेयरों में भी खरीदारों की अच्छी दिलचस्पी देखने को मिली, जिसने सूचकांक को नीचे गिरने से बचाया। धातुओं पर आधारित निफ्टी मेटल 0.68 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 0.62 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया भी 0.62 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करने में सफल रहे।
सॉफ्टवेयर कंपनियों में भारी बिकवाली से बना दबाव
व्यापक बाजार में आई मजबूती के विपरीत आईटी सेक्टर पूरी तरह दबाव में नजर आया और इसने सूचकांक की बढ़त को सीमित करने का काम किया। टेक शेयरों में बिकवाली के चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.79 प्रतिशत का भारी नुकसान झेलकर बंद हुआ। साथ ही निफ्टी फार्मा में 0.13 प्रतिशत की बेहद मामूली गिरावट देखी गई। दिग्गज शेयरों की बात करें तो एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, एचडीएफसी लाइफ, आईटीसी और ट्रेंट सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों में शीर्ष पर रहे। दूसरी तरफ, विप्रो, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और टीसीएस जैसी सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में जोरदार गिरावट ने निवेशकों को निराश किया।
फेडरल रिजर्व की बैठक और कच्चे तेल पर नजर
वैश्विक मोर्चे पर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के आगामी मौद्रिक नीति संबंधी निर्णय को लेकर कारोबारी खासे सतर्क दिखे। वित्तीय जगत में इस बात को लेकर गहमागहमी है कि क्या अमेरिकी फेडरल रिजर्व काफी समय बाद ब्याज दरों में इजाफा करने का फैसला कर सकता है, जिसके चलते आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों समेत भारतीय बाजार में भी हलचल तेज रहने की आशंका है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फिसलकर लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में ऊर्जा की कीमतों में आने वाली नरमी देश की मुद्रास्फीति और अर्थव्यवस्था के लिए मददगार साबित हो सकती है।
















