अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में मंगलवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में कमजोरी दर्ज की गई और AUD/USD विनिमय दर फिसलकर लगभग 0.7115 के स्तर पर आ गई। अमेरिकी डॉलर को फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत संकेतों से लगातार मजबूती मिल रही है, जिससे प्रमुख वैश्विक मुद्राओं पर दबाव देखा जा रहा है। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की ओर से भी अगले सप्ताह ब्याज दरों में बढ़ोतरी की व्यापक संभावनाएं जताई जा रही हैं, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को निचले स्तरों पर सहारा मिलने की उम्मीद बनी हुई है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार AUD/USD 0.7120 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 0.7122 से मामूली 0.02 प्रतिशत नीचे है।
फेडरल रिजर्व की नीतिगत सख्ती और डॉलर का दबदबा
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ओर से सख्त रुख के संकेतों ने ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा प्रदान किया है। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर की बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कम से कम 25 आधार अंकों (bps) की वृद्धि की संभावना अब लगभग 55.4 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। एक सप्ताह पहले यह संभावना 43.5 प्रतिशत के स्तर पर थी। इस तेज उछाल से स्पष्ट होता है कि बाजार प्रतिभागी मान रहे हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक सख्ती जारी रख सकता है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को बल दिया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव गहरा गया है।
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से दर वृद्धि की तैयारी
दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलियाई मोर्चे पर स्थिति काफी दिलचस्प बनी हुई है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई का जोखिम बढ़ने के चलते ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स का आकलन है कि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया अगले सप्ताह अपनी प्रमुख ब्याज दर में बढ़ोतरी कर सकता है। इतना ही नहीं, नवंबर में भी दरों में एक और संभावित वृद्धि की चेतावनी दी गई है। मनी मार्केट्स वर्तमान में लगभग 90 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं कि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत दर को एक चौथाई प्रतिशत अंक बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत कर देगा।
कॉमर्जबैंक के विश्लेषकों का भी मानना है कि आगामी बैठक से पहले ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदों में बड़ा बदलाव आया है। संस्थान के अनुसार, RBA के ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप (OIS) बाजार में अगले सप्ताह की मौद्रिक नीति बोर्ड बैठक में 25 आधार अंकों की वृद्धि की 85 प्रतिशत संभावना दर्ज की जा रही है। बाजार की यह मजबूत धारणा दर्शाती है कि केंद्रीय बैंक आगे और सख्ती की दिशा में झुक रहा है, जिससे फैसले से पहले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बुनियादी समर्थन मिल रहा है। हालांकि RBA की सहायक गवर्नर सारा हंटर की सख्त टिप्पणियों के बावजूद एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा 0.7100 के करीब रक्षात्मक बनी रही, क्योंकि ट्रेडर अब RBA गवर्नर मिशेल बुलॉक के आगामी संबोधन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके साथ ही इस सप्ताह के अंत में होने वाले ट्रंप और शी के महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन पर भी निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं।
तकनीकी स्तर और चार्ट विश्लेषण
चार्ट विश्लेषण के लिहाज से AUD/USD के लिए शुरुआती प्रतिरोध बॉलिंजर बैंड के मध्य स्तर 0.7160 के करीब देखा जा रहा है। इसके ऊपर जाने पर अगला महत्वपूर्ण अवरोध बॉलिंजर अपर बैंड के निकट 0.7235 पर मौजूद है। वहीं गिरावट की स्थिति में तत्काल समर्थन निचली बॉलिंजर सीमा 0.7085 पर स्थित है। इसके ठीक नीचे 100-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज (SMA) 0.7075 के स्तर पर स्थित है। जब तक यह दायरा बना रहता है, तब तक किसी भी गहरी गिरावट पर निचले स्तरों से खरीदारी आने की उम्मीद की जा सकती है।
ताजा लाइव तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स RSI(14) 47 के स्तर पर स्थिर है, जबकि एमएसीडी (MACD) 0.00 पर न्यूट्रल से बियरिश रुझान दिखा रहा है। मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय ईएमए 0.7140, 50-दिवसीय ईएमए 0.7107 और 200-दिवसीय ईएमए 0.6958 पर स्थित है, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 0.7089 और 200-दिवसीय एसएमए 0.7014 पर है। ईएमए50 का ईएमए200 से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस के साथ दीर्घकालिक तेजी के रुझान की पुष्टि करता है। औसत डायरेक्शनल इंडेक्स ADX(14) 20 के स्तर पर सीमित दायरे का संकेत देता है, जबकि स्टोकेस्टिक फास्ट 22 और सिग्नल 21 पर है। पिवट पॉइंट 0.7116 पर है, जिसके ऊपर प्रतिरोध R1 0.7131 और R2 0.7142 हैं, जबकि समर्थन स्तर S1 0.7105 और S2 0.7090 पर बने हुए हैं। 52-सप्ताह का दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच रहा है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को प्रभावित करने वाले बुनियादी कारक
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्यांकन में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा निर्धारित ब्याज दरें सबसे अहम भूमिका निभाती हैं। RBA उन ब्याज दरों को तय करता है जिन पर घरेलू बैंक आपस में लेनदेन करते हैं, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में कर्ज की लागत प्रभावित होती है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक लक्ष्य ब्याज दरों में समायोजन के जरिए मुद्रास्फीति को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखना होता है। दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें AUD को मजबूती देती हैं, जबकि कम दरें इसे कमजोर बनाती हैं। इसके अलावा क्वांटिटेटिव ईजिंग नकदी बढ़ाकर मुद्रा को कमजोर करता है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग इसे मजबूती प्रदान करता है।
चूंकि ऑस्ट्रेलिया प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर देश है, इसलिए इसकी सबसे बड़ी निर्यात वस्तु लौह अयस्क (आयरन ओर) की कीमतें मुद्रा की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण हैं। वर्ष 2021 के आंकड़ों के अनुसार ऑस्ट्रेलिया ने 118 अरब डॉलर का लौह अयस्क निर्यात किया था, जिसका मुख्य गंतव्य चीन था। लौह अयस्क की कीमतों में वृद्धि से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की कुल वैश्विक मांग बढ़ती है और देश के व्यापार संतुलन में मजबूती आती है। इसके विपरीत कीमतों में गिरावट से मुद्रा पर नकारात्मक असर पड़ता है।
चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, इसलिए चीनी अर्थव्यवस्था की सेहत का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर सीधा असर पड़ता है। जब चीनी अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ती है, तो वह ऑस्ट्रेलिया से कच्चे माल, वस्तुओं और सेवाओं का अधिक आयात करती है, जिससे AUD की मांग बढ़ती है। वहीं सुस्ती आने पर मांग घट जाती है। इसके अतिरिक्त समग्र व्यापार संतुलन और बाजार की धारणा भी अहम है। जब निवेशक जोखिम लेने की स्थिति (रिस्क-ऑन) में होते हैं तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को फायदा होता है, जबकि सुरक्षित विकल्पों की तलाश (रिस्क-ऑफ) के समय इसमें बिकवाली देखी जाती है।
अन्य एशियाई मुद्राओं और परिसंपत्तियों की स्थिति
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) 157.50 के स्तर के आसपास मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन की गिरावट को सीमित करने में मदद की। हालांकि बैंक ऑफ जापान (BOJ) द्वारा 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने के बावजूद येन पर दबाव बना रहा। 31 वर्षों के उच्च स्तर पर की गई यह बढ़ोतरी व्यापक बाजार अपेक्षाओं के अनुरूप थी और नीति सामान्यीकरण का हिस्सा मानी जा रही है, लेकिन इसके नरम रुख ने येन बुल्स को रक्षात्मक स्थिति में रखा।
वहीं कमोडिटी बाजार में सोने ने सकारात्मक गति हासिल की, हालांकि इसमें मजबूत तेजी के दृढ़ विश्वास की कमी देखी गई और यह 4,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे ही बना रहा। कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को कुछ हद तक कम किया, जिससे अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट आई और ब्याज न देने वाली इस पीली धातु को कुछ सहारा मिला। इसके बावजूद फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत दृष्टिकोण और पश्चिम एशिया के तनाव ने अमेरिकी डॉलर को जुलाई के अंत के बाद से अपने उच्चतम स्तर के करीब बनाए रखा है, जिससे सोने की बढ़त सीमित बनी हुई है।



















