वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बदलते दौर में यूरोपीय संघ अपनी व्यापार रणनीतियों को नए सिरे से परिभाषित करने में जुटा हुआ है। आयात और निर्यात की पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़कर अब यूरोपीय आयोग वाणिज्यिक समझौतों में कड़े भू-राजनीतिक और रणनीतिक नियम जोड़ रहा है। इस कड़ी में ब्रुसेल्स की ओर से उठाए गए नए कदमों से यह स्पष्ट होता है कि यूरोपीय बाजार तक पहुंच को अब सहयोगी देशों की रियायतों और अपनी खुद की औद्योगिक प्राथमिकताओं के साथ सीधे तौर पर बांधा जा रहा है। विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने और समुद्री खाद्य व्यापार में अपने बेड़े को प्राथमिकता देने की रणनीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत चर्चाओं के केंद्र में आ गई है।
थाई डिब्बाबंद टूना पर यूरोपीय संघ की नई व्यापारिक शर्त
व्यापार समझौते की नई दिशा का एक बड़ा प्रमाण समुद्री खाद्य क्षेत्र में सामने आया है। यूरोपीय संघ थाईलैंड से आयात होने वाली डिब्बाबंद टूना मछली को लेकर नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसके तहत यूरोपीय संघ के बाजारों तक अधिक पहुंच तभी संभव होगी जब थाईलैंड द्वारा डिब्बाबंद की जाने वाली टूना मछली को थाई बेड़े के बजाय यूरोपीय संघ के मछली पकड़ने वाले जहाजों द्वारा पकड़ा गया हो। इस शर्त के जरिए ब्रुसेल्स अपने स्थानीय समुद्री बेड़े और नौकायन उद्योग को सीधा संरक्षण देना चाहता है। अगर यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है, तो यह विकासशील निर्यातक देशों के लिए यूरोपीय बाजारों तक पहुंचने के तरीके को पूरी तरह बदल देगी और व्यापार वार्ताओं में यूरोपीय संघ के बढ़ते कड़े रुख को दर्शाएगी।
कनाडा के साथ महत्वपूर्ण खनिजों और अग्निशमन पर नई साझेदारी
रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के उद्देश्य से यूरोपीय संघ और कनाडा के बीच एक नई साझेदारी स्थापित की गई है। इस समझौते के दो प्रमुख स्तंभ जंगलों की आग बुझाने यानी अग्निशमन से जुड़े संसाधन और दुर्लभ व महत्वपूर्ण खनिज हैं। हाल के वर्षों में जलवायु संकट के चलते भीषण आगजनी की घटनाओं को देखते हुए अग्निशमन पर सहयोग को दोनों पक्षों के लिए अत्यंत प्रासंगिक माना जा रहा है। इसके साथ ही स्वच्छ ऊर्जा तकनीक और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए अपरिहार्य माने जाने वाले महत्वपूर्ण खनिजों के दोहन पर दोनों शक्तियों ने हाथ मिलाया है। कनाडा प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है और यूरोपीय संघ अपनी चीनी निर्भरता को कम करने के लिए कनाडाई खनिजों को प्राथमिकता दे रहा है।
खनिज प्रसंस्करण, सब्सिडी और चीनी प्रतिस्पर्धा की चुनौतियां
कनाडा के साथ खनिज साझेदारी आगे बढ़ने के बावजूद कई बुनियादी सवाल अब भी अनसुलझे हैं। सबसे बड़ा संशय यह है कि इन कच्चे खनिजों का पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला भारी प्रसंस्करण कहां किया जाएगा। खनिजों के निष्कर्षण और शोधन की प्रक्रिया अत्यधिक जटिल और प्रदूषणकारी होती है, जिसे संभालने के लिए न तो यूरोप और न ही कनाडा में बड़े पैमाने पर इकाइयां मौजूद हैं। इसके अलावा चीन से आने वाले सस्ते आयात की तुलना में इन खनिजों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए यूरोपीय संघ और उसके साझेदार किस स्तर की साझी सब्सिडी और बाहरी सीमा शुल्क व्यवस्था बनाएंगे, यह भी स्पष्ट नहीं है। जब तक डाउनस्ट्रीम विनिर्माण क्षेत्र को संरक्षण नहीं दिया जाता, तब तक पश्चिमी देशों द्वारा तैयार किए जाने वाले महंगे खनिज वैश्विक बाजार में टिकना बेहद कठिन होगा।
वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर का दबदबा और येन पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती का व्यापक असर अन्य प्रमुख मुद्राओं पर दिखाई दे रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर के मुकाबले जापानी येन 158.00 के स्तर से ऊपर अपने साप्ताहिक दायरे के उच्चतम स्तर पर बना रहा। अमेरिका में व्यक्तिगत उपभोग व्यय के आंकड़े नरम रहने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों से उपजी महंगाई की आशंकाओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब बनाए रखा है। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध ने डॉलर को सुरक्षित निवेश के रूप में और मजबूती दी है। डॉलर की इस व्यापक तेजी ने बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों और मुद्रा बाजार में जापानी हस्तक्षेप के जोखिम को पीछे धकेल दिया है।
ऑस्ट्रेलियाई व्यापार अधिशेष में गिरावट और मुद्रा की चाल
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी दो महीने के निचले स्तर के करीब स्थिर रही और एशियाई कारोबार में 0.6900 के मध्य दायरे में कारोबार करती देखी गई। अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों के बाद अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं घटी हैं, लेकिन बांड यील्ड मजबूत रहने से डॉलर को सहारा मिल रहा है। दूसरी ओर अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से गिरकर AUD495M रह गया। व्यापार संतुलन में आई इस तीव्र गिरावट का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बहुत सीमित असर देखा गया और यह मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मजबूती के दबाव में ही कारोबार करता रहा।
यूरो में ऐतिहासिक गिरावट और नई मुद्रास्फीति का सहारा
यूरोपीय मुद्रा यूरो गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। यूरो और अमेरिकी डॉलर की मुद्रा जोड़ी गिरकर 1.1312 के स्तर पर आ गई, जो कि जनवरी के 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। यूरो में आई इस भारी गिरावट की मुख्य वजह डॉलर की निरंतर मजबूती, वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और ऊर्जा की ऊंची कीमतों से यूरोप की अर्थव्यवस्था को होने वाले संभावित नुकसान की चिंताएं हैं। हालांकि यूरोजोन में महंगाई का एक नया झटका यूरोपीय सेंट्रल बैंक को अपनी नीति सख्त रखने पर मजबूर कर सकता है, जो कमजोर पड़ते यूरो को एक अप्रत्याशित जीवनदान दे सकता है।
सोने की कीमतों में ठहराव और हाइपरलिक्विड में नरमी
कमोडिटी बाजार में सोना अपनी बढ़त को बनाए रखने के लिए संघर्ष करता नजर आया। यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोना 4,200 डॉलर के स्तर तक पहुंचने के बाद दिन भर लगभग सपाट दायरे में रहा। अमेरिका में महंगाई के आंकड़े अनुमान से कम रहने के बावजूद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के नए बहु-वर्षीय उच्च स्तर छूने से गैर-उपज वाले सोने की मांग कमजोर बनी रही और डॉलर की लिवाली जारी रही। उधर डिजिटल एसेट बाजार में हाइपरलिक्विड (HYPE) का भाव 2 प्रतिशत गिर गया, जिससे पिछले दिन की 5 प्रतिशत की बढ़त घट गई। बुधवार को 5 मिलियन डॉलर की संस्थागत पूंजी की निकासी ने अल्पावधि निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला और तकनीकी दृष्टिकोण से इसका मूल्य 90 डॉलर के नीचे सीमित बना रहा।


















