अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की तेज मजबूती का दौर लगातार बना हुआ है। घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े ठोस कारोबारी आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख के समर्थन से डॉलर इंडेक्स अपने सालाना उच्चतम स्तर के करीब मजबूती से टिका हुआ है। अमेरिकी उपभोक्ताओं के मजबूत खर्च, रोजगार बाजार में पेरोल संख्या में तेजी के साफ संकेत और आगामी आईएसएम आंकड़ों को लेकर उम्मीदें डॉलर की साख को लगातार मजबूत कर रही हैं। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच जारी राजनीतिक खींचतान ने भी डॉलर को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मजबूती प्रदान की है।
आईएनजी के क्रिस टर्नर ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी मुद्रा को बाजार में तगड़ा समर्थन मिल रहा है। उनके मुताबिक, यदि अमेरिका और ईरान की बातचीत में कोई बड़ा कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता है, तो अक्टूबर के दौरान भी डॉलर में खरीदारी की रफ्तार बनी रहने के पूरे आसार हैं। ऐतिहासिक आंकड़ों के संदर्भ में देखें तो बीते 10 वर्षों में से 7 बार अक्टूबर के महीने में डॉलर इंडेक्स में बढ़त दर्ज की गई है, जो मौसमी तौर पर भी इस मजबूती के पक्ष में संकेत देती है।
बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की महंगाई ने रोकी सोने की रफ्तार
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कई वर्षों के नए उच्च स्तर पर पहुंचने का सीधा नकारात्मक प्रभाव सोने की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले हिस्से में सोने की चाल में सुस्ती रही और यह मामूली बढ़त के साथ 4,200 डॉलर के आसपास पहुंचने के बाद स्थिर बना रहा। बुधवार को जारी हुए कमजोर अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों के बावजूद डॉलर की मांग में कोई कमी नहीं आई है। बिना ब्याज वाली संपत्ति होने के कारण लगातार बढ़ते ट्रेजरी यील्ड के माहौल में निवेशकों की ओर से सोने की मांग कमजोर बनी हुई है, जिससे बुलियन मार्केट को अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है।
जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में कमजोरी का दौर
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में लगातार दबाव देखा जा रहा है। गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई अपनी साप्ताहिक सीमा के ऊपरी दायरे में 158.00 के पार कारोबार करता नजर आया। नरम अमेरिकी पीसीई आंकड़ों के बावजूद कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से उपजे महंगाई के जोखिम अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्च स्तर पर बनाए हुए हैं। वहीं बैंक ऑफ जापान की संभावित दरों में वृद्धि की उम्मीदों और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों पर डॉलर की यह व्यापक मजबूती पूरी तरह भारी पड़ रही है।
दूसरी ओर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी कमजोरी के घेरे में फंसा हुआ है। एशियाई सत्र में एयूडी/यूएसडी दो महीने के निचले स्तर के पास लगभग 0.6900 के मध्य दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। पीसीई आंकड़ों ने अक्टूबर में फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को जरूर थोड़ा कम किया है, लेकिन तेल की वजह से बनी महंगाई की चिंताओं ने डॉलर को कमजोर नहीं होने दिया। इस बीच अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से घटकर एयूडी 495 मिलियन पर आ गया, हालांकि इस गिरावट का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की ट्रेडिंग पर बहुत सीमित असर देखा गया।
यूरो ऐतिहासिक गिरावट के करीब और क्रिप्टो बाजार में सुस्ती
यूरोपीय मुद्रा यूरो पर भी अमेरिकी डॉलर के दबदबे का भारी असर पड़ा है। यूरो/यूएसडी गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक फिसल गई, जो जनवरी महीने के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरो में आई यह भारी गिरावट अमेरिकी डॉलर की व्यापक ताकत, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और यूरोप के ऊर्जा संकट से जुड़ी पुरानी चिंताओं का मिलाजुला परिणाम है। हालांकि यूरोजोन में महंगाई का कोई नया झटका यूरो को अप्रत्याशित सहारा भी दे सकता है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में हाइपरलिक्विड (एचवाईपीई) में गुरुवार को 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले दिन की 5 प्रतिशत की बढ़त काफी हद तक घट गई। संस्थागत निवेशकों की मांग में सुस्ती आई है और बुधवार को 5 मिलियन डॉलर की शुद्ध निकासी दर्ज की गई, जिसने अल्पकालिक निवेशकों के रुख को प्रभावित किया। तकनीकी नजरिए से देखें तो जब तक कीमत 90 डॉलर के स्तर से नीचे बनी हुई है, तब तक इसके लिए मिलाजुला रुख बने रहने की संभावना है।

















