अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरोपीय साझा मुद्रा को लेकर एक खास रुझान उभरकर सामने आया है। सामान्य तौर पर जब यूरोज़ोन के किसी एक देश में राजनीतिक उठापटक या तनाव पैदा होता है, तो उसका साझा मुद्रा पर बहुत व्यापक या नाटकीय असर नहीं पड़ता। इसके विपरीत, जब एक साथ कई सदस्य देश दबाव में आते हैं, तब यूरो की विनिमय दर में काफी तेज गिरावट दर्ज की जाती है। यदि यूरोपीय बैंकिंग प्रणाली पर भी संकट की स्थिति बनती है, तो व्यापक आर्थिक कारकों के समायोजन के बाद पांच कारोबारी दिनों में मध्यिका आधार पर यूरो में 0.73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज होती है। पिछले दस कारोबारी सत्रों की गतिविधियों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि मुद्रा में हुआ समायोजन जून 2024 के घटनाक्रम से काफी मिलता-जुलता है। वर्तमान में जो कुछ दिखाई दे रहा है, वह असल में फ्रांस में संकट से जुड़े तनाव पर बाजार की एक सामान्य और स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।
बैंकिंग प्रणाली और सुरक्षित निवेश की दिशा
विदेशी मुद्रा विश्लेषकों का मानना है कि यूरोपीय मुद्रा पर गहरा और तीव्र दबाव केवल उसी सूरत में आ सकता है जब यह राजनीतिक खिंचाव बैंकों तक फैल जाए या निवेशक घबराकर स्विस फ्रैंक जैसे पारंपरिक सुरक्षित ठिकानों की तरफ रुख करने लगें। हालांकि, मौजूदा वित्तीय परिदृश्य में इस प्रकार के व्यापक पलायन अथवा बैंकों पर सीधे दबाव के कोई ठोस संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। इसके बावजूद यूरोपीय साझा मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक दबाव झेल रही है। यह मुद्रा जोड़ी गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। बुधवार के कारोबारी सत्र में यह दर 1.1312 तक फिसल गई, जो जनवरी के 1.2082 के उच्च स्तर की तुलना में बहुत नीचे है। इस गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर की भारी मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से यूरोप के प्रभावित होने की चिंताएं मुख्य कारण हैं। हालांकि, यूरोज़ोन में महंगाई से जुड़ा कोई ताजा झटका मुद्रा को अप्रत्याशित सहारा भी दे सकता है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक मुद्राओं पर असर
अमेरिकी मुद्रा की व्यापक मजबूती अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और संपत्तियों की कीमतों को भी लगातार प्रभावित कर रही है। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दो महीने के निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा, जहां यह 0.6900 के मध्य स्तर पर टिका रहा। यद्यपि अमेरिका के पीसीई महंगाई आंकड़ों ने अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को थोड़ा धीमा किया है, लेकिन कच्चे तेल के कारण बढ़ती महंगाई की आशंकाओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊंचे स्तरों पर बनाए रखा है। इसी दौरान अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, हालांकि इस आंकड़े का मुद्रा जोड़ी पर बहुत सीमित असर देखा गया।
येन पर दबाव और भू-राजनीतिक तनाव
जापानी येन के मुकाबले भी अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत बना हुआ है और गुरुवार को एशियाई सत्र में 158.00 से ऊपर अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी सिरे पर टिका रहा। नरम पीसीई आंकड़ों के बावजूद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के निकट बनी हुई है। इसके साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच बना गतिरोध निवेशकों को सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित कर रहा है, जिससे इस जोड़ी को लगातार समर्थन मिल रहा है। डॉलर की यह व्यापक तेजी बैंक ऑफ जापान की आक्रामक नीतिगत अपेक्षाओं और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों को पूरी तरह बेअसर कर रही है।
सोने और डिजिटल संपत्तियों की स्थिति
अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी का नकारात्मक असर बहुमूल्य धातुओं पर भी साफ नजर आ रहा है। यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोना 4,200 डॉलर के स्तर के आसपास मामूली बढ़त दर्ज करने के बाद उसे बनाए रखने में संघर्ष करता रहा और दिन भर लगभग सपाट कारोबार करता दिखा। बुधवार को उम्मीद से कम अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों के बावजूद डॉलर की मांग निर्बाध गति से जारी रही, जिसने बिना ब्याज देने वाले सोने की चमक को फीका कर दिया है। उधर डिजिटल संपत्तियों की बात करें तो हाइपरलिक्विड गुरुवार को 2 प्रतिशत गिर गया, जिससे पिछले दिन की उसकी 5 प्रतिशत की बढ़त घट गई। बुधवार को 5 मिलियन डॉलर की संस्थागत पूंजी की निकासी के चलते निवेशकों का रुझान कमजोर पड़ा है, और 90 डॉलर से नीचे सीमित मूल्य दायरे के कारण इसका तकनीकी परिदृश्य मिला-जुला बना हुआ है।

















