अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरो और जापानी येन के बीच विनिमय दर सोमवार के एशियाई कारोबारी सत्र में भारी दबाव के बीच 177.50 के स्तर के आसपास झूलती नजर आई। कारोबारी हफ्ते की शुरुआत में यह क्रॉस रेट कमजोरी के अंतर के साथ खुला और बाद में मामूली बढ़त हासिल करने के बावजूद नकारात्मक दायरे से बाहर नहीं निकल सका। दैनिक चार्ट का विस्तृत तकनीकी अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि मुद्रा जोड़ी एक सुव्यवस्थित अवरोही चैनल के भीतर फंसी हुई है, जो दर्शाती है कि बाजार पर विक्रेताओं का दबदबा बना हुआ है। पिछले सत्र के बंद स्तर 177.32 के मुकाबले भाव 177.57 के आसपास आकर स्थिरता खोजने का प्रयास कर रहा है, लेकिन मध्यम अवधि के रुझान लगातार मंदी की ओर इशारा कर रहे हैं।
तकनीकी स्तरों पर बढ़ता मंदी का दबाव
दैनिक समय-सीमा पर यूरो बनाम येन की चाल 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी ईएमए के नीचे बनी हुई है, जो तकनीकी विश्लेषकों के लिए एक प्रमुख अवरोध स्तर माना जाता है। 50-दिवसीय ईएमए वर्तमान में 180.01 पर स्थित है, जो किसी भी त्वरित तेजी के प्रयास को सीमित कर रहा है। इसके साथ ही, 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई लगभग 41 के आसपास दर्ज किया गया है। आरएसआई का 50 के मध्य स्तर से नीचे 41 पर बने रहना यह दर्शाता है कि खरीदारों में उत्साह की भारी कमी है और वर्तमान मजबूती केवल एक सुधारात्मक दौर के भीतर का ठहराव मात्र है, न कि किसी बड़े उलटफेर की शुरुआत।
बाजार की चाल यदि 177.40 पर स्थित नौ दिवसीय ईएमए के निकटतम समर्थन को तोड़ती है, तो बिकवाली की रफ्तार तेज हो सकती है। ऐसी स्थिति में इस क्रॉस रेट के सामने नवंबर 2025 में दर्ज 11 महीने के निचले स्तर 175.70 तक गिरने का गंभीर जोखिम पैदा हो जाएगा, जो मौजूदा अवरोही चैनल की निचली सीमा भी है। यदि दबाव और गहराता है और यह संगम समर्थन क्षेत्र टूटता है, तो मुद्रा जोड़ी 169.72 के 14 महीने के निचले स्तर तक फिसलने के लिए पूरी तरह उजागर हो जाएगी। इसके विपरीत, ऊपर की ओर जाने के लिए सबसे पहले 180.01 पर स्थित 50-दिवसीय ईएमए को पार करना होगा। इस मध्यम अवधि के औसत को सफलतापूर्वक पार करने पर ही तेजी का रुख लौटेगा, जिसके बाद जोड़ी चैनल की ऊपरी सीमा 183.60 और फिर 17 अप्रैल को बनाए गए अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 187.95 की तरफ बढ़ सकती है।
वैश्विक वित्तीय ढांचे में यूरो की हैसियत और केंद्रीय बैंक की भूमिका
यूरोपीय संघ के 20 सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा होने के नाते यूरो वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्थान रखता है। साल 2022 के वैश्विक विनिमय आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर के कुल विदेशी मुद्रा सौदों में 31 प्रतिशत हिस्सेदारी इसी मुद्रा की थी, जहां प्रतिदिन औसतन 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का कारोबार होता था। मुद्रा जोड़ों में यूरो बनाम अमेरिकी डॉलर दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक युग्म है, जो कुल वैश्विक लेनदेन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। इसके ठीक बाद यूरो और जापानी येन की जोड़ी 4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ खड़ी है, जबकि यूरो बनाम ब्रिटिश पाउंड 3 प्रतिशत और यूरो बनाम ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 2 प्रतिशत हिस्सेदारी साझा करते हैं।
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपियन सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी यूरो क्षेत्र के लिए शीर्ष बैंकिंग संस्था है। ईसीबी का प्राथमिक संवैधानिक दायित्व कीमत स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत वह मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने अथवा आर्थिक सुस्ती के समय विकास को गति देने के लिए मौद्रिक नीति निर्धारित करता है। ईसीबी का प्रमुख हथियार ब्याज दरों में घट-बढ़ करना है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें या भविष्य में दरें बढ़ने की उम्मीदें विदेशी निवेशकों को आकर्षित करती हैं, जिससे यूरो मजबूत होता है, जबकि दर कटौतियों से मुद्रा पर दबाव बनता है। बैंक की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार बैठक कर नीतिगत फैसले लेती है। इन बैठकों में यूरोज़ोन के राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों के साथ छह स्थायी सदस्य बैठते हैं, जिनका नेतृत्व बैंक अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड करती हैं।
आर्थिक आंकड़ों और व्यापार संतुलन का मुद्रा पर असर
यूरोपीय मुद्रा की आंतरिक सेहत को मापने के लिए मुद्रास्फीति के आंकड़ों को अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इसे हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज यानी एचआईसीपी के जरिए मापा जाता है। जब भी मुद्रास्फीति ईसीबी के 2 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर निकलती है, तो केंद्रीय बैंक पर नीतिगत ब्याज दरें बढ़ाने की मजबूरी बन जाती है। अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें वैश्विक पूंजी को आकर्षित करती हैं, जिससे यूरो के मूल्य में सुधार देखने को मिलता है। इसके अतिरिक्त, सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई, बेरोजगारी दर तथा उपभोक्ता विश्वास सूचकांक जैसे संकेतक भी सीधे तौर पर इस मुद्रा की चाल तय करते हैं।
यूरोपीय क्षेत्र की आर्थिक मजबूती न केवल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को बढ़ावा देती है, बल्कि मौद्रिक सख्ती का रास्ता भी खोलती है। इसके विपरीत, कमजोर आर्थिक आंकड़ों से मुद्रा में गिरावट आती है। विशेष रूप से चार सबसे बड़े देशों जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन के आंकड़े सर्वाधिक महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि ये चारों देश मिलकर समूचे यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था का 75 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। इसके अलावा व्यापार संतुलन यानी ट्रेड बैलेंस का आंकड़ा भी बेहद अहम है। यह सूचकांक निर्यात से अर्जित आय और आयात पर किए गए खर्च के अंतर को दर्शाता है। जब कोई क्षेत्र अत्यधिक मांग वाले उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा भुगतान के लिए स्थानीय मुद्रा की मांग बढ़ती है, जिससे सकारात्मक व्यापार संतुलन सीधे तौर पर यूरो की ताकत बढ़ाता है।
व्यापक विदेशी मुद्रा बाजार और वैश्विक रुझान
सोमवार के कारोबारी सत्र में केवल यूरो ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी महत्वपूर्ण हलचल दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर में लगातार दूसरे दिन मजबूती का रुख देखा गया, जो एशियाई सत्र में बढ़कर 0.7000 के स्तर की ओर अग्रसर हुआ। चीन के तीसरी तिमाही के मजबूत जीडीपी और सितंबर महीने के बेहतर आर्थिक गतिविधि आंकड़ों के साथ-साथ रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के सहायक गवर्नर क्रिस केंट के आक्रामक नीतिगत बयानों ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को मजबूत समर्थन प्रदान किया।
वहीं अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी 158.00 के स्तर के पास रक्षात्मक मुद्रा में रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हालिया गिरावट के चलते डॉलर दो हफ्ते के निचले स्तर पर फंसा हुआ था। इसके साथ ही बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा के नीतिगत सख्ती के संकेतों और बाजार में जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को सहारा दिया, जिससे डॉलर-येन जोड़ी पर दबाव दिखा। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि की संभावनाओं और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने डॉलर के नुकसान को सीमित रखने का काम किया।
कमोडिटी और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की स्थिति
विदेशी मुद्रा विनिमय के साथ-साथ कमोडिटी बाजारों में भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला। सोने की कीमतें अपनी हालिया बढ़त को बरकरार रखने के लिए जूझती रहीं और एशियाई बाजार में 4,200 डॉलर प्रति औंस के नीचे टिकी रहीं। पीली धातु एक तरफ अमेरिकी डॉलर में निचले स्तरों पर हो रही खरीदारी और दूसरी तरफ भू-राजनीतिक मोर्चे पर बनी उम्मीदों के बीच फंसी रही, जिसने कच्चे तेल की कीमतों को नीचे धकेल दिया था।
डिजिटल परिसंपत्ति वर्ग में भी सुधार की कोशिशें दिखीं। अमेरिका के कड़े मुद्रास्फीति आंकड़ों और संस्थागत पूंजी की निकासी के बाद बीते हफ्ते भारी उठापटक झेल चुके बिटकॉइन, एथेरियम और एक्सआरपी सोमवार को संभलते दिखे। बिटकॉइन ने 80,607 डॉलर पर स्थित अपने 50-दिवसीय ईएमए से वापसी की शुरुआत की, जबकि एथेरियम और एक्सआरपी एक नकारात्मक साप्ताहिक समाप्ति के बाद अपने महत्वपूर्ण तकनीकी समर्थन स्तरों की दोबारा जांच करते नजर आए।
























