यूक्रेन के खिलाफ जारी सैन्य संघर्ष के बीच रूसी सीमाओं के भीतर से ही मॉस्को के रणनीतिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाली गुप्त गतिविधियां तेजी से सामने आ रही हैं। इस सिलसिले में यूक्रेन की सैन्य खुफिया एजेंसी (GUR) से जुड़े दो रूसी नागरिकों ने उन गुप्त अभियानों की जानकारी दी है, जिनका मकसद रूस की जमीन पर मौजूद सैन्य ठिकानों, गोला-बारूद कारखानों और शीर्ष सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाना है। इन कार्रवाइयों को अंजाम देने वालों का मानना है कि इस तरह के अंदरूनी हमलों से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व वाली सत्ता पर सीधा दबाव बनाया जा सकता है।
इनमें से एक कार्यकर्ता, जिसे सुरक्षा कारणों से इवान नाम से संबोधित किया गया है, रूस के भीतर रहकर रणनीतिक बमवर्षक विमानों और सैन्य आयुध कारखानों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों को सफल बनाने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने का दावा करता है। वहीं दूसरा व्यक्ति, जिसे फोमा कहा गया है, पोलैंड में निर्वासित जीवन बिता रहा है। फोमा रूस में सक्रिय भूमिगत स्वयंसेवकों के एक संगठित नेटवर्क का संचालन करता है, जिसका प्राथमिक कार्य उन शीर्ष रूसी सैन्य अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखना है जिन्हें यूक्रेनी खुफिया एजेंसी संभावित निशाने के रूप में चुनती है।
रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमलों की अंदरूनी तैयारी
रूसी क्षेत्र में रहकर काम करने वाले इवान ने बताया कि उसका मुख्य काम रूसी सैन्य ठिकानों और संवेदनशील परिसरों की टोह लेना तथा ड्रोन के महत्वपूर्ण हिस्सों को छिपाने के लिए सुरक्षित ठिकाने खोजना रहा है। सीमा पार से एक साथ बड़े हथियार पहुंचाना बेहद जोखिम भरा होता है, इसलिए कलपुर्जों को अलग-अलग हिस्सों में देश के भीतर छिपाया जाता है। इवान के अनुसार, जब इन टुकड़ों को एक साथ जोड़कर तैयार किया जाता है, तो यह एक बेहद घातक हथियार बन जाता है जो एक ही सटीक वार में करोड़ों डॉलर की लागत वाले विशाल सैन्य ढांचों को तबाह करने की क्षमता रखता है।
अपनी गतिविधियों के प्रमाण के तौर पर इवान ने एक रूसी सैन्य हवाई अड्डे के पास विस्फोटक सामग्री छिपाते हुए अपना एक वीडियो भी साझा किया। इस तरह के अभियानों में शामिल होना सीधे तौर पर मौत या आजीवन कारावास को बुलावा देने जैसा है। यदि रूसी सुरक्षा एजेंसियां ऐसे किसी भी व्यक्ति को पकड़ लेती हैं, तो उन पर आतंकवाद से जुड़ी गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप कई दशकों की जेल की सजा तय होती है।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की निगरानी और डिजिटल सुराग
पोलैंड में बैठकर नेटवर्क चलाने वाले फोमा की कार्यप्रणाली जमीनी तोड़फोड़ से काफी अलग है। वह इंटरनेट और गोपनीय संचार चैनलों के जरिए रूस के भीतर मौजूद अपने स्वयंसेवकों को दूर से ही निगरानी के तरीकों का प्रशिक्षण देता है। एक ट्यूटोरियल में उसने अपने कार्यकर्ताओं को सिखाया कि कैसे चिन्हित सैन्य अधिकारियों का पीछा बिना किसी शक के किया जाए। अपने दल को निर्देश देते हुए उसने साफ कहा कि जब भी कोई कार्यकर्ता किसी लक्ष्य का पीछा करने निकले, तो उसे अपना मोबाइल फोन साथ नहीं ले जाना चाहिए, क्योंकि डिजिटल लोकेशन से पूरी योजना बेनकाब हो सकती है।
कार्यकर्ताओं को दिए जाने वाले डेटा डोजियर में संबंधित अधिकारी की तस्वीर, व्यक्तिगत जानकारी, जन्मतिथि, उम्र, शारीरिक विवरण और उसके इस्तेमाल में आने वाले वाहनों का पूरा ब्योरा शामिल होता है। फोमा का दावा है कि वह पहले रूस के संभ्रांत वर्ग का हिस्सा रह चुका है, जिसके चलते उसके पास अंदरूनी संपर्कों का एक व्यापक नेटवर्क है जहां से उसे महत्वपूर्ण जानकारियां लगातार मिलती रहती हैं। उसके कंप्यूटर डेटाबेस में संवेदनशील भंडारण गोदामों, सैन्य टुकड़ियों, शीर्ष जनरलों के आवास और यूक्रेन पर बमबारी करने वाले रणनीतिक बमवर्षक पायलटों के घरों के सटीक ठिकाने दर्ज हैं। उसका मानना है कि किसी व्यवस्था को अंदर से चोट पहुंचाने के लिए उसकी कमजोर कड़ियों को पहचानना अनिवार्य होता है।
नेटवर्क का दायरा और दिसंबर 2025 का बड़ा हत्याकांड
फोमा के नेटवर्क में लगभग तीन दर्जन लोग शामिल हैं, जो रूस, यूक्रेन और यूरोप के विभिन्न हिस्सों में बंटे हुए हैं। रूस से बाहर रहने वाले सदस्य तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करते हैं, जिसमें लक्ष्यों के डिजिटल फुटप्रिंट पर नजर रखना मुख्य काम है। फोमा स्पष्ट करता है कि यद्यपि निगरानी के लक्ष्यों का सुझाव यूक्रेनी खुफिया एजेंसी देती है, लेकिन उसकी अपनी टीम भी स्वतंत्र रूप से जांच करती है कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में युद्ध अपराधों में शामिल है या नहीं। पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही निगरानी का काम हाथ में लिया जाता है।
इस नेटवर्क की भूमिका केवल खुफिया जानकारी जुटाने तक सीमित बताई गई है, न कि प्रत्यक्ष हत्याओं को अंजाम देने तक। हालांकि यह खुफिया जानकारी कितनी घातक साबित होती है, इसका उदाहरण दिसंबर 2025 में मॉस्को में देखने को मिला था। उस समय लेफ्टिनेंट जनरल फनिल सरवारोव की कार के नीचे छिपाकर रखे गए एक विस्फोटक उपकरण के फटने से उनकी मौत हो गई थी। इस घटना पर फोमा ने बताया कि जनरल सरवारोव पर नजर रखना बेहद जटिल काम था, क्योंकि वह अपनी सुरक्षा को लेकर अत्यंत सतर्क थे, लगातार अपना दैनिक कार्यक्रम बदलते थे और अपनी महिला मित्र तथा सहयोगी के ठिकानों के बीच बारी-बारी से समय बिताते थे।
कड़ी सुरक्षा के बीच गुप्त तालमेल और पहचान छिपाने के कड़े नियम
पकड़े जाने के खतरे को कम करने के लिए इन नेटवर्कों में कोई निश्चित या औपचारिक संगठनात्मक ढांचा नहीं रखा जाता। इवान का कहना है कि उसने अपने साथ काम करने वाले अन्य लोगों से कभी आमने-सामने मुलाकात नहीं की और न ही वह उनकी पहचान जानता है। फोमा भी अपने जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए यही सख्त नियम लागू करता है। कार्यकर्ताओं को किसी साझा ऑनलाइन समूह या चैट में एकत्र होने की सख्त मनाही है, क्योंकि इंटरनेट पर छोड़ा गया कोई भी डिजिटल निशान पूरे समूह को रूसी सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त में ला सकता है।
इवान के लिए जमीनी जोखिम हर पल बना रहता है। उसने साझा किया कि एक बार जब उसकी गाड़ी को नियमित जांच के लिए रोका गया, तो उस समय उसकी कार में हाथ से बने विस्फोटक मौजूद थे। यह एक बेहद तनावपूर्ण स्थिति थी, हालांकि वह तलाशी में पकड़े जाने से बाल-बाल बच निकला। उसने यह भी बताया कि उनके अभियानों में हमेशा इस बात का ध्यान रखा जाता है कि किसी भी आम नागरिक को नुकसान न पहुंचे और केवल सैन्य परिसंपत्तियों को ही निशाना बनाया जाए।
कार्यकर्ताओं की पृष्ठभूमि और भरोसे का पेचीदा सवाल
रूस के मौजूदा माहौल में ऐसे अभियानों के लिए उपयुक्त लोगों का मिलना बेहद कठिन हो चुका है। इवान के मुताबिक, विचारधारा के आधार पर सरकार का विरोध करने वाले अधिकांश लोग या तो देश छोड़कर जा चुके हैं या फिर सलाखों के पीछे बंद हैं। ऐसे में रूस के भीतर होने वाली कई तोड़फोड़ की घटनाओं में या तो ऐसे लोगों का अनजाने में इस्तेमाल होता है जिन्हें सच्चाई का भान नहीं होता, जैसे कि बिना जानकारी के संवेदनशील सामान ले जाने वाले ट्रक चालक, या फिर पैसे लेकर काम करने वाले लोग शामिल होते हैं।
इसके विपरीत इवान राजनीतिक विपक्ष का हिस्सा रहा है और पूरी तरह वैचारिक कारणों से यूक्रेन का सहयोग कर रहा है। राजनीतिक पृष्ठभूमि के बावजूद उसका बार-बार रूस से बाहर जाना और वापस लौटना कई सवाल खड़े करता है। इस पर सफाई देते हुए इवान ने बताया कि जॉर्जिया जैसे किसी तीसरे देश में यूक्रेनी एजेंटों से मुलाकात होती है, जहां उसका पॉलीग्राफ यानी लाई-डिटेक्टर टेस्ट लिया जाता है। बातचीत के दौरान यूक्रेनी खुफिया हैंडलर कोड शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जैसे अभियानों को स्कूल की मरम्मत का नाम देना। हालांकि खुद हैंडलर भी यह स्वीकार करते हैं कि वे किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर सकते, और इस संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता कि कोई एजेंट दबाव में आकर दोनों पक्षों के लिए काम कर रहा हो।
रूसी व्यवस्था की खामियां और अंतहीन डर का साया
इवान की लगातार यात्राओं के सवाल पर फोमा का दृष्टिकोण अलग है। उसका तर्क है कि रूसी प्रशासनिक व्यवस्था में कई तरह की प्रशासनिक खामियां और सुराख मौजूद हैं। यदि किसी व्यक्ति को इन कमजोरियों की समझ हो, या उसकी किस्मत अच्छी हो, तो वह इन छेदों के सहारे बचते हुए उसी व्यवस्था के भीतर आसानी से आवाजाही कर सकता है, ठीक वैसे ही जैसे चूहा पनीर के छेदों में रास्ता बना लेता है।
हालांकि सुरक्षा तंत्र से बच निकलने के बावजूद इन कार्यकर्ताओं का जीवन गहरे मानसिक तनाव में बीतता है। इवान का कहना है कि डर लगातार उनके साथ साए की तरह चलता है, चाहे वे कोई कार्रवाई कर रहे हों या शांत बैठे हों। यह लगातार बना रहने वाला भय रूस के मौजूदा कड़े सुरक्षा माहौल की वास्तविकता है। इसके बावजूद वे इस उम्मीद के सहारे टिके हैं कि युद्ध का परिणाम पुतिन की सत्ता के भविष्य का फैसला करेगा और देर-सवेर मौजूदा राजनीतिक हालात में बदलाव जरूर आएगा।



















