अमेरिकी अर्थव्यवस्था के प्रमुख रोजगार आंकड़ों के जारी होने से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) में मजबूती दर्ज की गई है। इस तेजी की मुख्य वजह फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर का हालिया बयान रहा है, जिसने अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है। वॉलर के तटस्थ रुख के कारण अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना है, जिससे स्टर्लिंग को राहत मिली है। हालांकि, अमेरिका के सेवा क्षेत्र के मजबूत आंकड़ों ने पाउंड की बढ़त को एक सीमित दायरे में बांधकर रखा है।
बाजार सहभागी अब अमेरिका के श्रम बाजार के व्यापक रुझान को समझने के लिए आगामी नॉन-फार्म पेरोल (NFP) आंकड़ों का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। इसके साथ ही बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीति निर्माताओं के बयान और जापानी येन में आई अचानक मजबूती ने वैश्विक मुद्रा बाजारों में नई हलचल पैदा कर दी है।
फेडरल रिजर्व का नीतिगत रुख और क्रिस्टोफर वॉलर के बयान का असर
फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने अपने एक हालिया संबोधन में अमेरिका की मौद्रिक नीति को लेकर संतुलित दृष्टिकोण पेश किया। वॉलर ने स्पष्ट किया कि यदि आगामी मुद्रास्फीति आंकड़े अर्थव्यवस्था में ठंडक के संकेत देते हैं, तो वह disinflation प्रक्रिया को दोबारा शुरू होने देने के पक्षधर होंगे। उनके अनुसार, वर्तमान में फेड फंड्स रेट एक उपयुक्त स्तर पर बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी जोड़ी कि यदि मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद से अधिक गर्म आते हैं, तो वह ब्याज दरों में दोबारा बढ़ोतरी पर विचार करने में बिल्कुल संकोच नहीं करेंगे।
क्रिस्टोफर वॉलर के इस बयान के बाद मनी मार्केट में व्यापक स्तर पर री-प्राइसिंग देखने को मिली है। महज एक दिन पहले तक वायदा बाजार सितंबर की बैठक में 25 बेसिस प्वाइंट्स की दर वृद्धि की 60 प्रतिशत से अधिक संभावना जता रहा था। वॉलर की टिप्पणियों के तुरंत बाद ब्याज दर में बढ़ोतरी की यह संभावना घटकर 54 प्रतिशत रह गई, जबकि ब्याज दरों के यथावत रहने की उम्मीद बढ़कर 46 प्रतिशत तक पहुंच गई। इस बदलाव ने अमेरिकी डॉलर की तेजी को थामने का काम किया है।
अमेरिकी आर्थिक आंकड़े: ISM सर्विसेज PMI और रोजगार बाजार के संकेत
अमेरिका से आए आर्थिक संकेतकों ने बाजार को मिले-जुले संदेश दिए हैं। अगस्त महीने के लिए जारी अमेरिकी ISM सर्विसेज PMI 55.4 दर्ज की गई, जो बाजार के 54.3 के पूर्वानुमान और जुलाई के 54.1 के आंकड़े दोनों से काफी बेहतर रही। सेवा क्षेत्र के इस सूचकांक के उप-घटकों से पता चलता है कि व्यापारिक इकाइयां अभी भी उच्च इनपुट लागतों और बढ़ी हुई कीमतों की शिकायत कर रही हैं। इसके अलावा, सेवा क्षेत्र में रोजगार का स्तर स्थिर तो हुआ है, लेकिन यह अभी भी संकुचन (contractionary territory) के दायरे में बना हुआ है।
दूसरी ओर, अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बेरोजगारी लाभ का दावा करने वाले अमेरिकियों की संख्या 2,04,000 से बढ़कर 2,06,000 हो गई, जो कि 2,06,000 के अनुमान के बिल्कुल अनुरूप है। यह स्थिति अमेरिकी श्रम बाजार में 'कम छंटनी और कम भर्ती' (low-firing, low-hiring) के माहौल को दर्शाती है। इससे पूर्व, आउटप्लेसमेंट फर्म चैलेंजर, ग्रे एंड क्रिसमस द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों द्वारा घोषित भर्ती योजनाओं में सन 2026 के पहले आठ महीनों के दौरान पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।
ब्रिटिश पाउंड का प्रदर्शन और बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीति
ब्रिटेन के आर्थिक कैलेंडर में किसी बड़े आंकड़े के अभाव के बावजूद ब्रिटिश पाउंड (केबल) को वैश्विक मुद्रा बाजार के घटनाक्रमों से मजबूती मिली। विशेष रूप से, जापानी येन में G8 मुद्राओं के मुकाबले आई तीव्र मजबूती ने डॉलर सूचकांक को प्रभावित किया, जिसका सीधा लाभ स्टर्लिंग को मिला। विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी अधिकारियों द्वारा येन में हस्तक्षेप (intervention) की अटकलों ने भी व्यापक currency basket को प्रभावित किया।
मौद्रिक नीति के मोर्चे पर, बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) के मुख्य अर्थशास्त्री ह्यू पिल ने उच्च ब्याज दरों के समर्थन में अपना पक्ष रखा है। पिल का मानना है कि ब्रिटेन में मुद्रास्फीति के दबाव को पूरी तरह से नियंत्रित करने के लिए नीतिगत दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखना आवश्यक है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के इस कठोर रुख ने पाउंड को अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ठोस लचीलापन (resilience) प्रदान किया है।
GBP/USD का तकनीकी विश्लेषण और लाइव मार्केट आंकड़े
तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो GBP/USD जोड़ी के लिए नीचे की तरफ कई महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर बने हुए हैं। पहला तत्काल सपोर्ट 1.3478 पर टूटी हुई रेजिस्टेंस ट्रेंड लाइन के पास स्थित है। इसके नीचे, 1.3449 के करीब ट्रिपल सिंपल मूविंग एवरेज का कंपोजिट जोन और 1.3421 के आसपास सेकेंडरी ट्रेंड सपोर्ट मौजूद है। अतिरिक्त सुरक्षा 1.3378 के पिछले ब्रेक लेवल पर देखी जा रही है। दूसरी तरफ, ऊपर की ओर मुख्य रेजिस्टेंस 1.3653 के अपवर्ड-स्लोपिंग ट्रेंड-लाइन ब्रेक स्तर पर है। यदि पाउंड इस बाधा को पार करने में सफल रहता है, तो आने वाले सत्रों में एक और निर्णायक तेजी का रास्ता साफ हो सकता है।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, GBP/USD वर्तमान में 1.35 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 1.35 के मुकाबले 0.11 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। 52 हफ्तों के दौरान पाउंड 1.30 से 1.38 के दायरे में रहा है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय RSI 51 के न्यूट्रल स्तर पर है, जबकि MACD 0.00 पर बना हुआ है। 50-दिवसीय EMA (1.35) का 200-दिवसीय EMA (1.34) से ऊपर होना एक गोल्डन क्रॉस पैटर्न को दर्शाता है, जो दीर्घकालिक अपट्रेंड की पुष्टि करता है। बॉलिंगर बैंड्स 1.34 से 1.37 के बीच बने हुए हैं, और ATR 0.01 के दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।
अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों का हाल: जापानी येन, सोना, बिटकॉइन और कच्चा तेल
वैश्विक बाजार के अन्य हिस्सों में भी व्यापक उतार-चढ़ाव देखा गया है। USD/JPY जोड़ी में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह गुरुवार को 155.50 के स्तर के आसपास कारोबार करती दिखी। निवेशक बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा 18 सितंबर की आगामी बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं। वहीं, AUD/USD जोड़ी एशियाई सत्र में 0.7150 के स्तर से ऊपर बनी रही। ऑस्ट्रेलिया के कमजोर व्यापारिक आंकड़ों ने चीन के सकारात्मक रेटिंगडॉग सर्विसेज PMI के प्रभाव को बेअसर कर दिया, जबकि अमेरिका-ईरान तनाव के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की ऊपरी बढ़त सीमित रही।
कमोडिटी और क्रिप्टो बाजार में, सोना पिछले दिन 4,300 डॉलर के नीचे 4-हफ्तों के निचले स्तर को छूने के बाद सुधरकर 4,300 डॉलर के पार निकल गया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और येन की मजबूती ने सोने को समर्थन दिया। बिटकॉइन (BTC) 77,700 डॉलर के आसपास स्थिर कारोबार करता नजर आया। संस्थागत स्पॉट ETF में मिले-जुले प्रवाह के बीच बिटकॉइन एक सीमित दायरे में रहा। ऊर्जा बाजार में, अमेरिका का डीजल क्रैक स्प्रेड (WTI के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल वायदा का प्रीमियम) इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाकर 102.00 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो वैश्विक ईंधन आपूर्ति में जारी दबाव का संकेत है।



















