अमेरिकी डॉलर में देखी जा रही सुस्ती जल्द ही थम सकती है क्योंकि अमेरिका की मजबूत आर्थिक वृद्धि दर बाजार में संतुलन बनाने का काम कर रही है। हाल के दिनों में ट्रेजरी की तरफ से बायबैक की घोषणा किए जाने के बाद लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के भाव नीचे आए थे, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ा और सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई थी। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था का बढ़त बनाए रखना अन्य वित्तीय चिंताओं के असर को काफी हद तक बेअसर कर देगा।
ट्रेजरी बायबैक और डॉलर पर असर
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा बॉन्ड बायबैक की घोषणा किए जाने के बाद वित्तीय बाजारों में हलचल तेज हो गई थी। इस कदम के तुरंत बाद लंबी अवधि के ट्रेजरी प्रतिभूतियों में गिरावट आई, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिकी मुद्रा कमजोर हुई और सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने तथा अन्य हार्ड एसेट्स की मांग में जोरदार उछाल देखने को मिला। बाजार के जानकारों का कहना है कि इस तरह के नीतिगत फैसलों से अल्पकालिक अस्थिरता तो बढ़ती है, लेकिन व्यापक आर्थिक संकेतकों की दिशा तय करने में इनका बड़ा योगदान होता है।
अमेरिकी आर्थिक वृद्धि का प्रभाव
मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में अमेरिका की विकास दर का फायदा अन्य देशों के मुकाबले लगातार बना हुआ है। विशेषज्ञों का आकलन है कि यह ग्रोथ एडवांटेज बजट और राजकोषीय मोर्चे पर मौजूद चिंताओं को पाटने का काम करेगा। यही वजह है कि डॉलर की कमजोरी के लंबे समय तक टिके रहने की संभावना कम है और चालू हफ्ते में इसके स्थिर होने के संकेत मिल रहे हैं। इसके साथ ही, वैश्विक बाजारों में डॉलर की स्थिति और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है।



















