एशियाई बाजार सत्र के दौरान सोने की कीमतों ने 4,340 से 4,345 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर को छूने के बाद एक महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया है। सर्राफा बाजार में आई इस तेजी ने पिछले तीन दिनों से जारी लगातार गिरावट के सिलसिले पर प्रभावी रूप से विराम लगा दिया है। सोने की कीमतों में इस ताज़ा सुधार को अमेरिकी डॉलर (USD) में दर्ज की गई व्यापक कमजोरी से बड़ा सहारा मिला है। जापानी येन (JPY) में आई मजबूत तेजी के कारण अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के आसपास दबाव में बना रहा। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि गैर-प्रतिफल (नॉन-यील्डिंग) वाली इस बहुमूल्य धातु में आगे की बड़ी बढ़त सीमित रह सकती है। फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठकों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बनी आशंकाओं और जारी होने वाले अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों को लेकर निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, सोना (GC=F) 4,421 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो अपने पिछले बंद स्तर 4,394 डॉलर की तुलना में 0.61 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है, जबकि दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत से 10.56 गुना अधिक दर्ज किया गया है।
विदेशी मुद्रा बाजार की हलचल और डॉलर पर दबाव
सोने की कीमतों में स्थिरता का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर सूचकांक में देखी गई गिरावट है। जापानी येन में आई जबरदस्त तेजी के चलते अमेरिकी मुद्रा पर लगातार दबाव बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने के संकेतों के बाद जापानी येन में उल्लेखनीय मजबूती देखी गई। इसके अलावा, रॉयटर्स तानकान व्यापार सर्वेक्षण के सकारात्मक आंकड़ों ने जापानी कंपनियों के विश्वास में सुधार को दर्शाया, जिससे बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना और मजबूत हुई है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए डॉलर में तय की जाने वाली वस्तुएं जैसे सोना खरीदना सस्ता हो जाता है। इस मुद्रा समीकरण ने निचले स्तरों पर खरीदारों को आकर्षित किया। हालांकि, वित्तीय रणनीतिकारों का कहना है कि यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के बुनियादी आंकड़े मजबूत बने रहते हैं, तो डॉलर की गिरावट सीमित हो सकती है, जिससे सर्राफा बाजार में आगे का रुझान अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
फेडरल रिजर्व की दर नीति और आर्थिक आंकड़े
वित्तीय बाजार के प्रतिभागी अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की भावी दिशा पर नजर बनाए हुए हैं। संस्थागत ब्रोकरेज बीएनवाई (BNY) के रणनीतिकारों ने स्पष्ट किया है कि हालिया श्रम बाजार के मजबूत आंकड़ों ने नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को फिर से मजबूत कर दिया है। शुक्रवार को आए गैर-कृषि रोजगार आंकड़ों के बाद सितंबर महीने में ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना फिर से 60 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है। हालांकि, फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर की गुरुवार की टिप्पणियों से बाजार में थोड़ी अनिश्चितता पैदा हुई थी, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि दर वृद्धि की संभावना काफी अधिक है।
उच्च ब्याज दरों का माहौल सोने जैसी बहुमूल्य धातुओं के लिए पारंपरिक रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। चूंकि सोने पर कोई नियमित ब्याज या लाभांश नहीं मिलता, इसलिए उच्च ब्याज दरें निवेशकों के लिए अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड जैसे उपज देने वाले साधनों की तुलना में सोने को रखने की अवसर लागत (अपॉर्चुनिटी कॉस्ट) को बढ़ा देती हैं। इसी वजह से डॉलर की कमजोरी के बावजूद सोने में कोई बड़ी आक्रामक तेजी देखने को नहीं मिल रही है।
तकनीकी संकेतक और प्रमुख मूल्य स्तर
तकनीकी विश्लेषण के दृष्टिकोण से, सोने को 4,345 से 4,340 डॉलर के संगम क्षेत्र (कॉन्फ्लुएंस जोन) पर मजबूत खरीदारी का समर्थन मिला। यह स्तर 4 घंटे के चार्ट पर 200-अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) और जुलाई से अगस्त की तेजी के 50.0 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर के मेल से बना है। तकनीकी विश्लेषक इस स्तर को बाजार के मध्यकालिक रुझान को निर्धारित करने वाला महत्वपूर्ण धुरी बिंदु (पिवट पॉइंट) मानते हैं।
लाइव तकनीकी संकेतक न्यूट्रल से सतर्क रुख का संकेत दे रहे हैं। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 52 के आसपास बना हुआ है, जो पिछले 42 के न्यूट्रल स्तर से सुधरा है। वहीं मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) संकेतक 41.42 की मुख्य रेखा और 66.77 की सिग्नल रेखा के साथ नकारात्मक क्षेत्र में है, जिससे हिस्टोग्राम -25.34 पर बना हुआ है। अन्य लाइव संकेतकों में 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 4,423 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 4,355 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 4,371 डॉलर पर स्थित है। 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 4,253 डॉलर और 200-दिवसीय SMA 4,524 डॉलर पर है। बोलिंजर बैंड्स का ऊपरी स्तर 4,668 डॉलर और निचला समर्थन स्तर 4,274 डॉलर है, जबकि मध्य बैंड 4,471 डॉलर पर है। औसत ट्रु रेंज (ATR) द्वारा मापी गई दैनिक वोलेटिलिटी 76.96 है। तत्काल पिवट बिंदु 4,411 डॉलर, प्रतिरोध स्तर R1 4,438 डॉलर तथा R2 4,455 डॉलर, और समर्थन स्तर S1 4,394 डॉलर तथा S2 4,367 डॉलर हैं। इन तकनीकी संकेतकों से स्पष्ट होता है कि हालिया तेजी एक तकनीकी सुधार और स्थिरता है, न कि किसी बड़े तेजी वाले रुझान की शुरुआत।
केंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली और मौद्रिक साधन
सोने के व्यापक परिदृश्य को समझने के लिए फेडरल रिजर्व के नीतिगत ढांचे को समझना आवश्यक है। फेडरल रिजर्व दो मुख्य उद्देश्यों पर कार्य करता है: मूल्य स्थिरता बनाए रखना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केंद्रीय बैंक अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों को समायोजित करता है।
जब अर्थव्यवस्था में महंगाई दर 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर जाने लगती है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में वृद्धि करता है। ऊंची ब्याज दरें उधारी लागत को बढ़ाती हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती आती है और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2 प्रतिशत से नीचे गिरती है या बेरोजगारी बढ़ती है, तो दरें घटाई जाती हैं ताकि आर्थिक विकास को गति दी जा सके, जिससे डॉलर पर दबाव बनता है।
इन फैसलों का निर्धारण फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) द्वारा वर्ष में आयोजित होने वाली आठ बैठकों में किया जाता है। इस समिति में 12 सदस्य होते हैं, जिनमें फेडरल रिजर्व बोर्ड के 7 गवर्नर, न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक के अध्यक्ष और 4 अन्य क्षेत्रीय बैंकों के अध्यक्ष शामिल होते हैं। अत्यधिक संकट की स्थिति में केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) जैसे अपरंपरागत साधनों का उपयोग करता है, जिसमें बड़े पैमाने पर बॉन्ड खरीदकर वित्तीय प्रणाली में तरलता बढ़ाई जाती है, जिससे डॉलर कमजोर होता है। इसके विपरीत क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) में बॉन्ड खरीद रोकी जाती है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है।
करेंसी और एनर्जी मार्केट में व्यापक रुझान
वैश्विक वित्तीय बाजारों के अन्य वर्गों में भी महत्वपूर्ण हलचल देखी जा रही है। विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7200 के स्तर से ऊपर स्थिर बना हुआ है। चीन से आए उच्च उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) आंकड़ों के बावजूद रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला है। दूसरी ओर, जापानी येन में आई मजबूती से USD/JPY जोड़ी मंगलवार को बने अपने सात महीने के निचले स्तर के पास कारोबार कर रही है।
ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की स्थिर कीमतों के बावजूद रिफाइंड उत्पादों में भारी वोलेटिलिटी देखी गई। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड (WTI कच्चे तेल की तुलना में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल वायदा का प्रीमियम) इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया और 102.00 डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू गया। मुद्रा और ऊर्जा बाजारों में यह उथल-पुथल वैश्विक अर्थव्यवस्था की जटिल स्थिति को उजागर करती है जिसका सीधा प्रभाव सोने की चाल पर पड़ रहा है।



















