अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है, लेकिन इसके बावजूद बहुमूल्य धातुओं की चाल में स्थिरता बनी हुई है। यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल 1.5 फीसदी की बढ़त के साथ 94.4 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं ब्रेंट क्रूड में 2 फीसदी का उछाल आया है और यह 99.4 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहा है, जो कि 100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच चुका है। दूसरी ओर, नेचुरल गैस की कीमतों में लगभग 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि गैसोलीन के दाम 1 फीसदी चढ़े हैं।
भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिकी बलों द्वारा खर्ग द्वीप के पास पांच ईरानी क्रूड टैंकरों को नष्ट किए जाने के बाद तेल की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है। यह कार्रवाई एक अमेरिकी युद्धपोत पर हुए मिसाइल हमले के प्रयास के जवाब में की गई थी। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि युद्ध समाप्त होने के बाद तेल की कीमतें तेजी से नीचे आएंगी। उन्होंने कहा कि कीमतें तीन डॉलर प्रति गैलन और अंततः दो डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे आ जाएंगी। उधर, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी सऊदी अरब में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है, जिसमें 40,000 बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली जाजान रिफाइनरी भी शामिल है।
गोल्डमैन सैक्स के अनुमान और वैश्विक बाजार की स्थिति
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। हालांकि, फारस की खाड़ी में निर्यात सामान्य होने पर इसके 80 डॉलर प्रति बैरल तक गिरने की संभावना भी जताई गई है। गोल्डमैन ने दिसंबर 2026 के लिए ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई के अपने पूर्वानुमान को 5 डॉलर बढ़ाकर क्रमशः 85 डॉलर और 80 डॉलर कर दिया है। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स बुधवार को 98.8 के आसपास स्थिर रहा, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।
सोने और चांदी के मौजूदा भाव और बाजार का रुख
हाजिर सोना 4,350 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से मामूली रूप से चढ़कर 0.4 फीसदी की तेजी के साथ 4,373 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। इससे पहले लगातार दो सत्रों तक सोने पर दबाव बना हुआ था। वहीं हाजिर चांदी 0.5 फीसदी की बढ़त के साथ 66 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर टिकी हुई है। सौर ऊर्जा और विद्युतीकरण क्षेत्रों से मिल रही मजबूत औद्योगिक मांग के कारण चांदी को लगातार समर्थन मिल रहा है, हालांकि बढ़ती ब्याज दरों से गैर-उपज वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित हो सकती है।



















