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दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, हिमाचल मंत्रिमंडल में फेरबदल और क्षेत्रीय संतुलन साधने की तैयारी तेजहिमाचल प्रदेश
9 सित॰ 2026, 10:10 am (1 घंटे पहले)· 2

दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, हिमाचल मंत्रिमंडल में फेरबदल और क्षेत्रीय संतुलन साधने की तैयारी तेज

हिमाचल प्रदेश में कैबिनेट विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उप मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्रियों के दिल्ली पहुंचने के बाद नए चेहरों को शामिल करने और क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने पर मंथन जारी है।

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार इस समय दिल्ली में मौजूद हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से सोमवार को महत्वपूर्ण मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद से ही राज्य की राजनीति में बदलाव के कयास लगाए जा रहे हैं। आलाकमान के साथ जारी इस मंथन के बीच कैबिनेट मंत्री धनीराम शांडिल, चंद्र कुमार, हर्षवर्धन चौहान और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर भी दिल्ली पहुंच चुके हैं, जिससे नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा को बल मिला है।

बुजुर्ग मंत्रियों की कुर्सी पर संकट और शिमला का दबदबा

मंत्रिमंडल में बदलाव की आहट के साथ ही कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की छुट्टी होने की संभावना जताई जा रही है। वर्तमान कैबिनेट में शामिल चंद्र कुमार और धनीराम शांडिल की उम्र लगभग 84 वर्ष के आसपास है। ऐसे में माना जा रहा है कि बढ़ती उम्र के आधार पर इन वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। इसके अलावा शिमला संसदीय क्षेत्र के प्रतिनिधित्व पर भी कैंची चल सकती है। मौजूदा व्यवस्था में शिमला संसदीय सीट से सबसे अधिक पांच मंत्री शामिल हैं, जिसमें सोलन और सिरमौर जिले आते हैं। इस एकतरफा दबदबे को कम करने के लिए शिमला क्षेत्र से मंत्री पद की कटौती संभव मानी जा रही है।

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मंडी और कांगड़ा जिलों में क्षेत्रीय असंतुलन

राज्य के भौगोलिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बड़ा असंतुलन देखने को मिल रहा है। मंडी संसदीय क्षेत्र से मंत्रिमंडल में लगभग न के बराबर प्रतिनिधित्व है। हालांकि किन्नौर विधानसभा क्षेत्र से जगत सिंह नेगी कैबिनेट मंत्री हैं, लेकिन मंडी, कुल्लू, लाहौल स्पीति और चंबा जिलों से एक भी मंत्री नहीं बनाया गया है। दूसरी तरफ कांगड़ा जिले से लंबे समय से अनदेखी के आरोप लग रहे हैं, जहां से फिलहाल केवल दो ही मंत्री हैं। इस क्षेत्रीय खाई को पाटने के लिए हाईकमान और राज्य नेतृत्व के बीच लगातार विचार-विमर्श चल रहा है।

दावेदारों की रेस और लंबित पद पर फैसला

कैबिनेट में शामिल होने के लिए कई प्रमुख नेताओं के नाम रेस में चल रहे हैं। इनमें कुल्लू से विधायक सुंदर सिंह, आशीष बुटेल और संजय अवस्थी के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू स्वयं कुल्लू से विधायक सुंदर सिंह को कैबिनेट मंत्री बनाने की सार्वजनिक घोषणा कर चुके हैं। उन्होंने शिमला में दो बार और उससे पहले विधानसभा के भीतर भी कहा था कि मॉनसून सत्र के समाप्त होने के बाद नया मंत्री बनाया जाएगा। मॉनसून सत्र खत्म हुए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक आधिकारिक नाम का ऐलान नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश कैबिनेट में बीते पौने चार साल से एक मंत्री पद खाली पड़ा है, जिसे भरने के लिए अब अंतिम रणनीति बनाई जा रही है।

सवाल-जवाब

दिल्ली में किन-किन नेताओं की बैठकें चल रही हैं?
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के अलावा चार कैबिनेट मंत्री दिल्ली में मौजूद हैं।
मंत्रिमंडल से किन मंत्रियों की कुर्सी खतरे में मानी जा रही है?
लगभग 84 वर्ष की आयु वाले वरिष्ठ मंत्री चंद्र कुमार और धनीराम शांडिल को पद से हटाए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है।
कैबिनेट विस्तार की रेस में कौन-कौन से विधायक आगे हैं?
कुल्लू से विधायक सुंदर सिंह, आशीष बुटेल और संजय अवस्थी के नाम नए मंत्री पदों की रेस में प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं।
हिमाचल कैबिनेट में कितने समय से पद खाली पड़ा है?
हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल में पिछले पौने चार साल से एक मंत्री पद खाली पड़ा हुआ है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·40 मिनट पहले

हिमाचल प्रदेश में चल रहा यह उच्च स्तरीय मंथन केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि पहाड़ी राज्य में क्षेत्रीय असंतुलन पाटने और चुनावी समीकरण साधने की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है। दिल्ली में आलाकमान के साथ हो रही इन बैठकों से साफ है कि उम्रदराज मंत्रियों की विदाई और मंडी तथा कांगड़ा जैसे उपेक्षित क्षेत्रों को साधकर पार्टी आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की तैयारी में है। खाली पड़े पदों को भरने और शिमला के एकतरफा दबदबे को कम करने के इस निर्णय का असर राज्य की पूरी राजनीतिक दिशा पर पड़ेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·40 मिनट पहले

यह राजनीतिक फेरबदल प्रशासनिक नियंत्रण और आंतरिक असंतोष को नियंत्रित करने की दृष्टि से संवेदनशील है। जब आलाकमान क्षेत्रीय संतुलन साधने और उम्रदराज मंत्रियों को हटाने जैसे बड़े कदम उठाता है, तो पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और गुटबाजी बढ़ने का जोखिम पैदा हो जाता है। यदि वरिष्ठ नेताओं की विदाई के बाद असंतुष्ट धड़ों को समय रहते नहीं मनाया गया, तो यह आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के बजाय सरकार के लिए आंतरिक संकट का कारण बन सकता है।

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