कमोडिटी बाजारों में कारोबारी हफ्ते के समापन पर सफेद धातु की चमक फीकी पड़ गई। घरेलू बाजार में चांदी के भाव में 14 मार्च को प्रति किलोग्राम 5,000 रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर चांदी चार प्रतिशत से अधिक टूटकर 80 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर बनी हुई है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय बाजारों में पैदा हुई नई हलचलों ने निवेशकों के रुख को बदल दिया है, जिससे बहुमूल्य धातुओं के प्रति पारंपरिक आकर्षण कमजोर हुआ है।
घरेलू वायदा बाजार में सुस्ती और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज के आंकड़े
भारतीय वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर भी कमजोरी का रुख साफ नजर आया। शुक्रवार के सत्र में चांदी के वायदा भाव 0.62 प्रतिशत गिरकर 2,59,279 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुए। सप्ताह के अंतिम दिनों में दर्ज की गई इस नरमी ने घरेलू खरीदारों और सटोरियों को सतर्क कर दिया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव निकट भविष्य में भी बना रह सकता है।
निर्मल बंग सिक्योरिटीज ने अपनी तकनीकी समीक्षा में बताया कि चांदी के भाव में आगे भी करेक्शन आने की संभावना बनी हुई है। ब्रोकरेज हाउस ने रणनीति साझा करते हुए कहा कि ट्रेडर 2,77,000 रुपये के स्टॉप लॉस के साथ 2,71,000 रुपये के स्तर पर बिकवाली कर सकते हैं, जिसमें 2,63,000 रुपये से लेकर 2,55,000 रुपये का लक्ष्य रखा जा सकता है।
कच्चे तेल में तेजी और मुद्रास्फीति की चिंताएं
कमोडिटी कारोबार में बने इस दबाव का मुख्य कारण ऊर्जा की बढ़ती लागत और महंगाई के खतरे हैं। लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग ने कहा, "कमोडिटी बाजारों में अस्थिरता, विशेष रूप से ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और मुद्रास्फीति के जोखिमों के कारण, व्यापारियों को सतर्क बनाए हुए है।" पिछले कारोबारी सत्र में चांदी लगभग 1.31 प्रतिशत लुढ़ककर 82.34 डॉलर प्रति औंस पर आ गई थी, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 2,44,696 रुपये प्रति किलोग्राम बैठती है।
इसी दौरान कच्चे तेल के दामों में भी तेजी दर्ज की गई। ईरान संघर्ष से जुड़े बढ़ते तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल चढ़कर 96.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो भारतीय मुद्रा में करीब 8,930 रुपये होता है। ऊर्जा बाजार में आई इस उछाल ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति को लेकर दोबारा चिंताएं बढ़ा दी हैं।
मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों का समीकरण
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों के 80 डॉलर प्रति औंस की ओर 4 प्रतिशत से अधिक फिसलने के पीछे एक प्रमुख कारण अमेरिकी डॉलर में आई तेजी भी रही। अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें घटने के कारण डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ, जिससे कीमती धातुओं की मांग प्रभावित हुई। निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर का रुख किया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की लगातार नाकेबंदी के बाद अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी ठिकानों पर अब तक के सबसे बड़े हमलों की घोषणा की गई। इस सैन्य कार्रवाई के बाद निवेशकों ने जोखिम से बचते हुए डॉलर में शरण ली। डॉलर के मजबूत होने से विदेशी मुद्राओं में लेन-देन करने वाले खरीदारों के लिए चांदी अधिक महंगी हो गई, जिससे मांग में सुस्ती आई और कीमतों में यह गिरावट देखने को मिली।
















