अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके पैरा एथलीट नीरज यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में जहर खाने से मौत हो गई। उनकी देह दिल्ली के मौजपुर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर एक के समीप उनकी ही स्कॉर्पियो गाड़ी के पास सड़क पर पाई गई थी। इस दुखद घटना के सामने आने के बाद खेल जगत स्तब्ध है। पुलिस प्रशासन अब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटा हुआ है, जिसमें एक महिला मित्र के साथ उनके संबंधों में आई खटास और डोपिंग प्रतिबंध के चलते उपजे भारी मानसिक दबाव का पहलू प्रमुखता से सामने आ रहा है।
घटनाक्रम और पुलिस की शुरुआती छानबीन
जाफराबाद थाना पुलिस ने इस मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 194 के तहत अपनी जांच शुरू कर दी है। नीरज यादव के पार्थिव शरीर को पंचनामे और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए दिल्ली के जीटीबी अस्पताल भेजा गया, ताकि मौत की असली वजह और समय की आधिकारिक पुष्टि हो सके। मौके पर मौजूद परिस्थितियों और अस्पताल ले जाने वाली महिला के बयानों को रिकॉर्ड पर लिया गया है।
पुलिस पूछताछ के दौरान संबंधित महिला ने कई अहम जानकारियां साझा कीं। महिला के अनुसार, दिसंबर 2025 से नीरज यादव के साथ उसका परिचय और मेलजोल था। मंगलवार के दिन वह महिला उनसे मुलाकात करने के लिए हरियाणा के सोनीपत स्थित उनके ठिकाने पर पहुंची थी। वहां बातचीत के दौरान महिला ने नीरज से साफ कह दिया था कि वह अब उनके साथ इस रिश्ते या संपर्क को आगे जारी नहीं रख सकती है। इस बातचीत से माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था।
मौजपुर में कार के पास बेसुध मिले थे नीरज
रिश्ता खत्म करने की बात सामने आने के बाद नीरज यादव उस महिला को अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी में बैठाकर दिल्ली की तरफ रवाना हुए और उसे मौजपुर इलाके में छोड़ दिया। हालांकि, अलग होने के बाद रात करीब नौ बजे महिला को किसी अनहोनी की आशंका सताने लगी। जब वह मौजपुर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर एक के पास वापस पहुंची, तो उसने देखा कि नीरज अपनी स्कॉर्पियो कार के ठीक बगल में सड़क पर अचेत अवस्था में पड़े हुए थे। महिला आनन-फानन में उन्हें नजदीकी अस्पताल ले गई, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
निजी जिंदगी और खेल का सफर
नीरज यादव शादीशुदा थे और परिवार में उनकी पत्नी तथा तीन साल की एक मासूम बेटी हैं। हरियाणा के सोनीपत में वह अंशनीर स्पोर्ट्स अकादमी नाम से एक ऑनलाइन खेल अकादमी का संचालन कर रहे थे। उनका शुरुआती जीवन काफी संघर्षों से भरा रहा था। सात वर्ष की उम्र में पोलियो की चपेट में आने के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। शुरुआत में उन्होंने व्हीलचेयर टेनिस में अपनी प्रतिभा दिखाई और इसके बाद पैरा एथलेटिक्स का रुख किया, जहां उन्होंने भाला फेंक और चक्का फेंक स्पर्धाओं में अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी मजबूत पहचान बनाई।
42 वर्षीय यादव एफ55 वर्ग में भाग लेते थे। उनके नाम एशियाई पैरा खेलों में स्वर्णिम उपलब्धियां दर्ज रहीं। वर्ष 2018 में जकार्ता में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इसके बाद 2023 के हांगझोऊ एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए भाला फेंक और चक्का फेंक दोनों में सोने के तमगे हासिल किए थे।
डोपिंग प्रतिबंध और करियर पर लगा आघात
हांगझोऊ की बड़ी सफलता के बाद नीरज यादव के जीवन में विपरीत दौर शुरू हुआ। प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन का दोषी पाए जाने पर उन पर चार साल का कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया। इस डोपिंग कार्रवाई के परिणाम बेहद नुकसानदेह साबित हुए। वर्ष 2023 में जीते गए उनके दोनों स्वर्ण पदक वापस ले लिए गए। इसके साथ ही सरकार से मिलने वाली भारी पुरस्कार राशि और सुरक्षित सरकारी नौकरी का अवसर भी उनके हाथ से निकल गया।
भारतीय पैरा-एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच एस सत्यनारायण ने बताया कि 2023 हांगझोऊ खेलों के बाद जब डोपिंग का मामला उजागर हुआ था, तब से वह लगातार यादव के संपर्क में बने हुए थे। सत्यनारायण के मुताबिक, इस निलंबन ने नीरज के पूरे खेल जीवन को गहरा झटका दिया था, जिससे वह खेल से दूर हो गए और उनकी आर्थिक स्थिति भी काफी चरमरा गई थी। डोपिंग के कारण आईची-नागोया में हुए एशियाई पैरा खेलों में हिस्सा न ले पाने की लाचारी और हालिया दिनों में दोस्ती में आई दरार ने उनके भीतर भावनात्मक और मानसिक तनाव को बेहद बढ़ा दिया था।



















