डीसी कॉमिक्स के पन्नों से निकलकर बड़े पर्दे पर आई फिल्म क्लेफेस रिव्यू (2026) को केवल एक साधारण कॉमिक-बुक रूपांतरण मानना बड़ी भूल होगी। हालांकि कहानी की पृष्ठभूमि गोथम सिटी पर आधारित है और कहीं-कहीं जोकर जैसे विदूषक के संदर्भ भी सुनाई पड़ते हैं, फिर भी इस सिनेमाई अनुभव के लिए डीसी यूनिवर्स के पुराने इतिहास की जानकारी होना जरूरी नहीं है। दर्शकों को इस सफर में शामिल होने के लिए केवल एक मजबूत कलेजे और खौफनाक दृश्यों को झेलने की हिम्मत की दरकार है।
शोहरत की बुलंदी से अंधेरी खाई में गिरता नायक
फिल्म की कहानी मैट हेगन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार उभरते हुए अभिनेता टॉम रीस हैरिस ने निभाया है। कहानी में मैट खुद भी हॉलीवुड का एक तेजी से उभरता हुआ सितारा है, जिसके पास आकर्षण, खूबसूरती और हाल ही में मिला एक प्रतिष्ठित पुरस्कार नामांकन है। सब कुछ उसके पक्ष में चल रहा होता है, जब तक कि वह एक खतरनाक माफिया सरगना की प्रेमिका के साथ संबंध नहीं बना बैठता। इसके बाद उसे जो खौफनाक सजा मिलती है, वह उसकी पूरी जिंदगी तबाह कर देती है।
गैंगस्टर मार्कोस ज़ाबो, जिसे डेविड डेंसिक ने परदे पर बेहद बेरहमी से उतारा है, मैट को दबोचकर एक पेननाइफ से उसका खूबसूरत चेहरा काट डालता है। यह शुरुआती हमला बिना किसी लंबी भूमिका के अचानक होता है और दर्शकों को हिला कर रख देता है। हमले का ओवरहेड शॉट किसी भी दर्शक को सिहराने के लिए काफी है। इस घटना के बाद मैट की चमकती दुनिया बिखर जाती है। निर्माता उससे काम छीन लेते हैं, उसका एजेंट नाता तोड़ लेता है, और चेहरे को ठीक कराने के लिए कराई गई महंगी प्लास्टिक सर्जरी उसे और अधिक विकृत और डरावना बना देती है।
प्रायोगिक तकनीक और डरावने साइड इफेक्ट्स
अपनी खोई हुई पहचान, दौलत और शोहरत को वापस पाने के लिए बेताब मैट एक प्रयोगात्मक वैज्ञानिक केटलिन कोर की शरण में जाता है। वैज्ञानिक के इस किरदार को नाओमी अकी ने निभाया है। मैट उसकी विकसित की हुई नैनोसेल तकनीक का पहला मानव परीक्षण विषय बनने को तैयार हो जाता है, जिसका मकसद खराब हो चुके शारीरिक ऊतकों को फिर से जीवित करना है। यह मेडिकल प्रक्रिया काम तो करती है, लेकिन अपने साथ कई बेहद परेशान करने वाले और हिंसक साइड इफेक्ट्स लेकर आती है, जो मैट को मानसिक पागलपन की गहरी खाई में धकेल देते हैं।
जेम्स गन और पीटर सफ़रान के नेतृत्व वाले नए डीसी यूनिवर्स की यह तीसरी बड़ी पेशकश है। वर्ष 2025 में आई सुपरमैन और वर्ष 2026 की सुपरगर्ल के बाद रिलीज हुई यह फिल्म अपने पिछले दोनों प्रोजेक्ट्स से पूरी तरह अलग मिजाज पेश करती है। वे दोनों फिल्में पीजी-13 रेटिंग वाली सुपरहीरो रोमांचक कहानियां थीं, जबकि यह पूरी तरह से एक क्रूर, खून-खराबे से भरी और आर-रेटिंग वाली कैरेक्टर स्टडी है। इसका माहौल ए डिफरेंट मैन के मेटा-अभिनय और द सब्सटेंस के चरम बॉडी हॉरर का मिश्रण लगता है, जिसमें हैरी पॉटर की पॉलीजूस औषधि वाले दृश्यों जैसी विचित्र शारीरिक तब्दीलियां भी शामिल हैं।
विजुअल प्रभाव और रोंगटे खड़े करने वाली हिंसा
निर्देशक जेम्स वॉटकिन्स, जिन्होंने जेम्स मैकएवॉय अभिनीत थ्रिलर फिल्म स्पीक नो ईविल से गहरी छाप छोड़ी थी, यहां हिंसा और खौफ को दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। फिल्म में मांस और त्वचा से जुड़े कई सर्जरी वाले दृश्य हैं, जिनमें विमान के वॉशरूम में नाखून काटने वाली कैंची और आधी खुली आंखों के साथ फिल्माया गया दृश्य सीधे रोंगटे खड़े कर देता है। इसके अलावा एक अप्रत्याशित रीढ़ की हड्डी निकालने का वाकया और नाइटक्लब नरसंहार का दृश्य फिल्म के सबसे खौफनाक पलों में शुमार हैं।
चेहरे के पिघलने और नए रूप में ढलने के दृश्यों को जेम्स वॉटकिन्स ने बेहतरीन प्रोस्थेटिक्स और नए जमाने के कंप्यूटर जनरेटेड विजुअल इफेक्ट्स के तालमेल से पर्दे पर उतारा है। हर कट, त्वचा का छिलना और खूनी प्रहार दर्शकों को शारीरिक स्तर पर झकझोरता है। टॉम रीस हैरिस के चेहरे की बनावट, उनकी बड़ी आंखें और तीखा जबड़ा इस भूमिका के लिए एकदम मुफीद साबित होते हैं। वे टीवी शो के आकर्षक स्टार से लेकर कृत्रिम रूप से बदलती कोशिकाओं के शिकार एक सनकी विलेन तक के हर रूप में पूरी तरह स्वाभाविक लगते हैं। केटलिन के साथ उनका भावनात्मक रिश्ता भी फिल्म को मानवीय आधार देता है।
सतही पटकथा और सामाजिक संदेश की कमी
तकनीकी कुशलता और बेहतरीन बॉडी हॉरर के बावजूद, फिल्म की पटकथा वैचारिक स्तर पर बेहद उथली रह जाती है। जिन विषयों पर हालिया फिल्में जैसे द सब्सटेंस समाज में खूबसूरती के तय पैमानों पर चोट करती हैं, या ए डिफरेंट मैन आंतरिक और बाहरी आकर्षण पर सवाल उठाती है, यह फिल्म उस गहराई तक नहीं पहुंच पाती।
यह कहानी चेहरे की शारीरिक विकृति को भयभीत करने वाले पुराने ढर्रे पर ही आगे बढ़ाती है, जहां चेहरा बिगड़ जाने पर उसे छिपाने या ठीक करने की ही जद्दोजहद दिखाई जाती है। हालांकि बाद में मैट की यही शारीरिक विकृति उसकी सुपरपावर बन जाती है, लेकिन यह अंततः एक खलनायक की बदले की यात्रा ही बनी रहती है। फिल्म में आत्मसम्मान या सशक्तिकरण के बजाय केवल बदले की भूख नजर आती है। कुल मिलाकर, इसकी मांसल और खूनी बाहरी परत के नीचे कोई खास दार्शनिक वजन नहीं है, लेकिन बॉडी हॉरर के शौकीनों के लिए यह एक बेहद क्रूर और चौंकाने वाला तमाशा जरूर पेश करती है।
























