घरेलू कमोडिटी बाजार में बहुमूल्य धातुओं के दामों में तेज गिरावट का सिलसिला देखने को मिला है। सफेद धातु के रूप में पहचानी जाने वाली चांदी की कीमतों में भारतीय बाजारों में रातभर में 5,000 रुपये तक की कमजोरी दर्ज की गई है, जिससे यह अपने उच्चतम स्तर से 32 प्रतिशत तक फिसल चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकवाली के भारी दबाव और वैश्विक तनाव के बीच निवेशकों के रुख में आए बदलाव ने घरेलू स्तर पर भी धातुओं की कीमतों को गहराई से प्रभावित किया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकवाली का गहरा असर
भारत में चांदी की घरेलू कीमतों को तय करने में विदेशी बाजारों की हलचल सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। विदेशी बाजारों में हाजिर चांदी 84 डॉलर प्रति औंस के पार कारोबार कर रही थी, जबकि पिछले कारोबारी सत्र के दौरान इसमें 5 प्रतिशत से भी अधिक की जोरदार गिरावट दर्ज की गई थी। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आई इस कमजोरी का सीधा असर भारतीय बाजार की धारणा पर भी साफ देखा गया है।
एमसीएक्स पर वायदा कारोबार की चाल
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर चांदी के 5 मई एक्सपायरी वाले वायदा अनुबंधों में सुबह के सत्र से ही नरमी देखी गई। वायदा कारोबार में चांदी के दाम करीब 1.30 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,65,500 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बने हुए थे। बाजार के तकनीकी रुख को लेकर आईसीआईसीआई डायरेक्ट का आकलन है कि एमसीएक्स पर मई चांदी वायदा 2,57,000 रुपये से 2,72,000 रुपये के सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। उनके अनुसार यदि कीमतें 2,57,000 रुपये के स्तर से नीचे फिसलती हैं, तो यह गिरावट बढ़कर 2,54,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है।
डॉलर में मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव का दोहरा दबाव
कीमती धातुओं के मौजूदा रुख पर इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी आईबीजेए का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर सोना और चांदी दोनों ही दबाव में कारोबार कर रहे हैं। आईबीजेए के अनुसार घरेलू एक्सचेंजों पर भी कीमती धातुओं का कारोबार सीमित दायरे में या नरमी के साथ रहने की संभावना है। इस दबाव की प्रमुख वजह अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती और ब्याज दरों के ऊंचे स्तर पर बने रहने को लेकर गहराती चिंताएं हैं। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय समीकरणों को काफी संवेदनशील बना दिया है।
घरेलू सराफा कारोबार पर प्रभाव
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मुद्रास्फीति से जुड़ी आशंकाओं के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश और नकदी के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं। डॉलर सूचकांक के मजबूत होने से डॉलर में मूल्यवर्गित धातुएं अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए महंगी हो जाती हैं, जिसके चलते लिवाली सीमित हो जाती है। घरेलू स्तर पर औद्योगिक मांग और आभूषण निर्माताओं की गतिविधियां भी मौजूदा उतार-चढ़ाव को देखते हुए सतर्क नजर आ रही हैं, जिससे निकट अवधि में कीमती धातुओं की दिशा सीमित दायरे में बने रहने के संकेत मिल रहे हैं।
















