अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट में सोने की कीमतों का रुख काफी मजबूत दिखाई दे रहा है और XAU/USD जोड़ी $4,600 प्रति औंस के महत्वपूर्ण आंकड़े के ऊपर मजबूती से अपनी बढ़त बनाए हुए है। तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से अल्पकालिक और मध्यमकालिक दोनों समय-सीमाओं में तेजी का रुझान स्पष्ट रूप से कायम है, क्योंकि स्पॉट की कीमतें नौ-अवधि और पचास-अवधि के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) दोनों से ऊपर कारोबार कर रही हैं। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 67 के आसपास स्थित है। यह सूचकांक बुलिश क्षेत्र में मजबूती से स्थापित है, लेकिन अत्यधिक ओवरबॉट स्थिति से थोड़ा नीचे बना हुआ है। इसका सीधा अर्थ यह है कि बाजार में खरीदारों की गति और नियंत्रण पूरी तरह बरकरार है, भले ही कीमतें तकनीकी रूप से कुछ खिंचाव महसूस कर रही हों।
तकनीकी परिदृश्य और महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर
सोने की कीमतों की भावी दिशा को समझने के लिए $4,697.07 का स्तर अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है, जिसे सोने ने 25 अगस्त को अपने तीन महीने के उच्चतम स्तर के रूप में छुआ था। यदि आने वाले सत्रों में सोना इस प्रमुख प्रतिरोध स्तर को सफलतापूर्वक पार कर लेता है, तो XAU/USD जोड़ी के लिए तेजी का नया रास्ता खुल जाएगा। ऐसी स्थिति में कीमतें आरोही चैनल की ऊपरी सीमा यानी लगभग $4,850.00 के स्तर की ओर तेजी से कदम बढ़ा सकती हैं। चार्ट पर बने इस आरोही चैनल को बाजार विशेषज्ञ एक मजबूत सकारात्मक संरचना के रूप में देख रहे हैं, जो निकट भविष्य में सोने के लिए नए रिकॉर्ड स्तर तय करने का आधार बन सकता है।
गिरावट की स्थिति में सपोर्ट जोन का गणित
तकनीकी मोर्चे पर यदि बाजार में कोई विपरीत सुधार या बिकवाली देखने को मिलती है, तो सोने के लिए प्राथमिक सपोर्ट 9-दिवसीय EMA पर $4,557.72 के स्तर पर स्थित है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो अगला महत्वपूर्ण सहारा आरोही चैनल की निचली रेखा के पास लगभग $4,500.00 पर उपलब्ध होगा। $4,557.72 और $4,500.00 के इस संगम सपोर्ट क्षेत्र का टूटना ही सोने में हालिया तेजी के पूर्वाग्रह को कमजोर कर सकता है। अगर कीमतें इस संगम क्षेत्र से नीचे फिसलती हैं, तो सोने पर नीचे की तरफ दबाव बढ़ेगा और फिर बाजार 50-दिवसीय EMA के स्तर $4,336.84 का परीक्षण कर सकता है। इसके बाद गिरावट का अगला पड़ाव $4,311.04 का तीन सप्ताह का निचला स्तर हो सकता है, जो 14 अगस्त को दर्ज किया गया था।
सोने का ऐतिहासिक महत्व और सुरक्षित निवेश का जरिया
मानव सभ्यता के इतिहास में सोने की भूमिका हमेशा से खास रही है, जहाँ इसे मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया गया है। आधुनिक वित्तीय दुनिया में अपनी चमक और आभूषणों में उपयोग से इतर इस कीमती धातु को एक सर्वश्रेष्ठ सुरक्षित परिसंपत्ति (सेफ-हेवन एसेट) माना जाता है। अनिश्चित और उथल-पुथल भरे समय में वैश्विक निवेशक अपनी पूंजी की सुरक्षा के लिए सोने को प्राथमिक पसंद मानते हैं। इसके अलावा, चूंकि सोना किसी विशिष्ट सरकार या संस्थागत जारीकर्ता पर निर्भर नहीं करता, इसलिए इसे मुद्रास्फीति और गिरती राष्ट्रीय मुद्राओं के प्रभाव से बचाव (हेज) के सबसे मजबूत साधन के रूप में देखा जाता है।
केंद्रीय बैंकों की बढ़ती खरीदारी और विश्व स्वर्ण परिषद के आंकड़े
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं और वे अपने भंडार को मजबूत करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। आर्थिक अनिश्चितता के दौर में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को सहारा देने के इरादे से केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाते हैं और बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी करते हैं। इससे देश की अर्थव्यवस्था और उसकी मुद्रा की साख और मजबूती में जनता और बाजारों का विश्वास बढ़ता है। विश्व स्वर्ण परिषद के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडारों में कुल 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग $70 बिलियन थी। वार्षिक आधार पर दर्ज आंकड़ों की शुरुआत के बाद से केंद्रीय बैंकों द्वारा की गई यह अब तक की सबसे बड़ी ऐतिहासिक खरीदारी थी। वर्तमान में चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक तेजी से अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ाने में लगे हुए हैं।
अमेरिकी डॉलर, यील्ड और जोखिम वाली परिसंपत्तियों से संबंध
सोने का अमेरिकी डॉलर (USD) और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के साथ उलटा (इनवर्स) संबंध होता है, जो दोनों ही वैश्विक वित्त में प्रमुख आरक्षित और सेफ-हेवन एसेट माने जाते हैं। जब डॉलर की विनिमय दर में गिरावट आती है, तो सोने की कीमतों में उछाल देखने को मिलता है, जिससे निवेशकों और केंद्रीय बैंकों को कठिन वित्तीय माहौल में अपनी परिसंपत्तियों में विविधता लाने का अवसर मिलता है। इसके विपरीत, जोखिम वाली परिसंपत्तियों जैसे शेयर बाजार से भी सोने का उलटा संबंध होता है। शेयर बाजार में जब तेज रैली आती है, तब सोने के प्रति निवेशकों का आकर्षण कम होता है और कीमतें सुस्त पड़ जाती हैं। वहीं जब इक्विटी बाजारों में बिकवाली का दौर आता है, तब निवेशक सुरक्षा की तलाश में सोने की ओर रुख करते हैं।
ब्याज दरों और वृहद आर्थिक कारकों का प्रभाव
सोने के हाजिर भाव कई वैश्विक कारकों से संचालित होते हैं। भू-राजनीतिक अस्थिरता या भीषण मंदी की आशंकाएं सोने की सुरक्षित परिसंपत्ति की मांग को अचानक बढ़ा देती हैं। चूंकि सोना एक बिना ब्याज देने वाली परिसंपत्ति (यिल्ड-लेस एसेट) है, इसलिए जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरें घटाते हैं, तो सोने की अपील बढ़ जाती है। इसके विपरीत, जब पूंजी की लागत यानी ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तब सोने की कीमतों पर दबाव बना रहता है। फिर भी अधिकांश बाजार गतिविधियां इस बात पर निर्भर करती हैं कि अमेरिकी डॉलर का व्यवहार कैसा है, क्योंकि यह धातु डॉलर में उद्धृत (XAU/USD) होती है। मजबूत डॉलर सोने की बढ़त को सीमित करता है, जबकि कमजोर डॉलर कीमतों को ऊपर धकेलता है।
फॉरेक्स बाजार की हलचल: GBP/USD और EUR/USD का हाल
सोने के अलावा व्यापक मुद्रा बाजार में भी अहम तकनीकी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान GBP/USD जोड़ी दो दिनों की लगातार गिरावट से उबरकर 1.3600 के आसपास कारोबार कर रही है। हालाँकि, ब्रिटिश पाउंड को आगे चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि हाल ही में ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतों में आई गिरावट ने मुद्रास्फीति की तात्कालिक चिंताओं को कम कर दिया है। इस बदलाव के कारण मनी मार्केट के सहभागियों ने बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा अगली ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों को आगे खिसका दिया है, जो अब 2026 के उत्तरार्ध के बजाय 2027 की शुरुआत में संभावित मानी जा रही है। वहीं EUR/USD जोड़ी में पिछले दिन के मामूली लाभ के बाद सुधार हुआ है और एशियाई सत्र में यह 1.1650 के आसपास टिकी हुई है। यूरो को यूरोपियन सेंट्रल बैंक के सख्त (हॉकिश) मौद्रिक नीति दृष्टिकोण का समर्थन मिल रहा है।
जैक्सन होल संगोष्ठी और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
वित्तीय जगत की निगाहें फेडरल रिजर्व पर भी टिकी हुई हैं। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष के रूप में केविन वॉरश शुक्रवार को जैक्सन होल संगोष्ठी में अपना पहला संबोधन देने की तैयारी कर रहे हैं। 27 से 29 अगस्त तक आयोजित हो रहे इस जैक्सन होल सम्मेलन का आधिकारिक विषय 'वित्तीय नवाचार: भुगतान और नीति के निहितार्थ' (फाइनेंशियल इनोवेशन: इम्प्लिकेशंस फॉर पेमेंट्स एंड पॉलिसी) रखा गया है। बाजार की उम्मीदें सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं हैं कि सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाई जाएंगी या यथावत रखी जाएंगी, बल्कि निवेशक केविन वॉरश के इस वक्तव्य से भविष्य की दीर्घकालिक मौद्रिक नीति और मुद्रास्फीति नियंत्रण के रोडमैप का संकेत तलाश रहे हैं।



















