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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ रुपया, दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचाबाज़ार
1 सित॰ 2026, 11:41 am (52 मिनट पहले)· 2

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ रुपया, दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर दो महीने के उच्चतम स्तर 94.88 के करीब पहुंच गया है। बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक का लगातार हस्तक्षेप और देश के मजबूत आर्थिक आंकड़े इस तेजी की मुख्य वजह रहे हैं।

USD/INRSMA20 SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण1 सितंबर 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

USD/INR अभी 94.87 पर है, जबकि EMA20 95.36, EMA50 95.40 और EMA200 93.08 पर हैं।

आगे संभावित चाल

EMA50 (95.40) के ऊपर बंद होने पर तेजी, EMA200 (93.08) टूटने पर गिरावट खुलती है।

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

USD/INR का RSI 45 है।

आगे संभावित चाल

60 के ऊपर बढ़त या 40 के नीचे फिसलन पर नजर रखें।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मजबूत स्थिति में आ गया है, जिससे विनिमय दर फिसलकर 94.88 के करीब पहुंच गई है। यह स्तर पिछले दो महीनों में रुपये का सबसे मजबूत मुकाम माना जा रहा है। इस तेजी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक का लगातार हस्तक्षेप, देश के मजबूत तिमाही जीडीपी आंकड़े और राजकोषीय घाटे में आई कमी जैसे बड़े कारण शामिल हैं। बाजार के जानकारों और निवेशकों की नजरें अब अमेरिकी आंकड़ों पर टिकी हुई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई और जॉब ओपनिंग्स के आंकड़े शामिल हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप और फॉरवर्ड पोजीशन

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय मुद्रा को समर्थन देने के लिए केंद्रीय बैंक लगातार हाजिर और नॉन-डेलिवरेबल फॉरवर्ड बाजारों के माध्यम से दखल दे रहा है। हालांकि, बाजार में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि रुपये की यह मजबूती लंबी अवधि तक टिक पाएगी या नहीं। जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक द्वारा लगातार डॉलर बेचने से भविष्य के लिए उसकी गुंजाइश सीमित होती जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में कुल शुद्ध शॉर्ट फॉरवर्ड पोजीशन बढ़कर रिकॉर्ड 137 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है, जो जून में 104 अरब डॉलर थी। इस स्थिति का मतलब है कि केंद्रीय बैंक को भविष्य में बकाया पोजीशन को संतुलित करने के लिए डॉलर खरीदने ही होंगे, जिससे यह साफ होता है कि रुपये की यह तेजी फिलहाल अस्थायी हो सकती है।

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सकल घरेलू उत्पाद और प्रमुख आर्थिक क्षेत्र

समीक्षाधीन अवधि के आंकड़े बताते हैं कि देश की दूसरी तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत के पिछले आंकड़े के अनुरूप ही रही, जो कि अनुमानित 7.1 प्रतिशत से काफी बेहतर थी। एचडीएफसी बैंक के विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू खपत में तेजी, सरकारी खर्च से मिल रहे समर्थन, निवेश और निर्यात के बेहतर प्रदर्शन ने इस मजबूत विकास दर को गति दी है। पश्चिम एशिया के संघर्षों के कारण लागत बढ़ने का दबाव जरूर बना था, लेकिन विनिर्माण और बिजली तथा गैस जैसे क्षेत्रों में नौ प्रतिशत के करीब रही वॉल्यूम ग्रोथ ने इस दबाव को संतुलित कर दिया। सेवा क्षेत्र इस तिमाही का सबसे चमकदार हिस्सा रहा, जहां वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं में 12 प्रतिशत की बंपर वृद्धि दर्ज की गई।

राजकोषीय घाटा और कर संग्रह

दूसरी तिमाही के दौरान देश का राजकोषीय घाटा 4.55 ट्रिलियन रुपये यानी 47.81 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो वित्त वर्ष 2026-27 के कुल लक्ष्य का 26.8 प्रतिशत है। इस नियंत्रण के पीछे शुद्ध कर प्राप्तियों में आया बड़ा उछाल मुख्य वजह रहा है। सरकार का करों से प्राप्त होने वाला राजस्व बढ़कर 8.5 ट्रिलियन रुपये पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 6.6 ट्रिलियन रुपये था। मजबूत कर संग्रह के चलते सरकारी तिजोरी को बड़ी राहत मिली है और राजकोषीय मोर्चे पर आंकड़े उम्मीद के मुताबिक बेहतर बने हुए हैं।

वैश्विक बाजार और तकनीकी रुझान

दूसरी ओर, अमेरिकी बाजारों में निवेशक अगस्त के लिए आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई और जुलाई के जॉब ओपनिंग्स के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा, इस सप्ताह अमेरिकी डॉलर के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर शुक्रवार को आने वाले नॉनफार्म पेरोल के आंकड़े होंगे। दैनिक चार्ट पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.87 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, पिछले बंद भाव 95.38 के मुकाबले इसमें 0.53 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-अवधि का आरएसआई 45 के आसपास है, जबकि एमएसीडी -0.13 और सिग्नल लाइन -0.10 पर मंदी का संकेत दे रही है। बाजार में ईएमए20 95.36 और ईएमए50 95.40 पर बने हुए हैं, जबकि प्रमुख पिवट स्तर 94.94 पर है। ऊपर की तरफ प्रतिरोध स्तर 95.10 और 95.33 पर हैं, जबकि समर्थन स्तर 94.72 और 94.56 पर देखे जा रहे हैं।

मुद्रा की चाल को प्रभावित करने वाले कारक

भारतीय रुपया बाहरी कारकों के प्रति दुनिया की सबसे संवेदनशील मुद्राओं में से एक माना जाता है। देश आयातित कच्चे तेल पर बहुत अधिक निर्भर है, इसलिए तेल की कीमतें, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर का वर्चस्व और विदेशी निवेश का स्तर इसकी दिशा तय करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजारों में सीधे हस्तक्षेप करके विनिमय दर को स्थिर रखने का प्रयास करता है, साथ ही ब्याज दरों के जरिए चार प्रतिशत के महंगाई लक्ष्य को साधने की कोशिश करता है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर कैरी ट्रेड के जरिए रुपये को मजबूती देती हैं, क्योंकि निवेशक कम ब्याज दर वाले देशों से कर्ज लेकर ज्यादा रिटर्न वाले बाजारों में पैसा लगाते हैं। इसके अलावा मुद्रास्फीति, आर्थिक वृद्धि और विदेशी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष निवेश के प्रवाह भी मुद्रा की सेहत निर्धारित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

सवाल-जवाब

भारतीय रुपया किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.88 के आसपास के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
रुपये में आई इस तेजी के पीछे क्या मुख्य कारण हैं?
आरबीआई का हस्तक्षेप, मजबूत दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े और नियंत्रित राजकोषीय घाटा इस तेजी के मुख्य कारण हैं।
जुलाई में आरबीआई की शुद्ध शॉर्ट फॉरवर्ड पोजीशन कितनी थी?
जुलाई में आरबीआई की शुद्ध शॉर्ट फॉरवर्ड पोजीशन बढ़कर रिकॉर्ड 137 अरब डॉलर हो गई।
दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर कितनी रही?
दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई।
दूसरी तिमाही में राजकोषीय घाटा कितना दर्ज किया गया?
दूसरी तिमाही में राजकोषीय घाटा 4.55 ट्रिलियन रुपये यानी 47.81 अरब डॉलर रहा।
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