मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव अब एक बेहद खतरनाक चरण में पहुंच गया है क्योंकि अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर लगातार नौवीं रात अपने भीषण हवाई हमले जारी रखे हैं। वाशिंगटन के बयानों के अनुसार, रविवार को किए गए इस आक्रामक हवाई अभियान का सीधा मकसद तेहरान को कड़ी सजा देना था। यह सख्त अमेरिकी प्रतिक्रिया हाल ही में मारे गए अमेरिकी सैन्य कर्मियों की मौत के सीधे जवाब में आई है। दोनों प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच फिर से शुरू हुए इस सीधे टकराव के बाद से यह पहली बार है जब अमेरिका को युद्ध में इस तरह का नुकसान उठाना पड़ा है। गोलाबारी के इस लंबे दौर ने पहले से ही नाजुक क्षेत्र को अस्थिर करने का खतरा पैदा कर दिया है, जिससे कई पड़ोसी देश प्रभावित हो रहे हैं और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ रहा है।
बढ़ता सैन्य नुकसान और फैलते युद्ध के मोर्चे
इस बढ़ते संघर्ष में अमेरिकी सशस्त्र बलों को भारी मानवीय कीमत चुकानी पड़ रही है। रक्षा अधिकारियों ने हाल ही में मध्य पूर्व में तैनात एक और अमेरिकी सैनिक के मारे जाने की पुष्टि की है। यह दुखद घटना इराक के अशांत उत्तरी इलाके में घटी। सैन्य रिपोर्टों के अनुसार, यह सैनिक उस वक्त मारा गया जब विशेषज्ञ बम निरोधक दस्ता ईरान के एक गिरे हुए मानव रहित हवाई वाहन या ड्रोन को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की कोशिश कर रहा था। दुश्मन की तकनीक को सुरक्षित रखने और विस्फोटकों के तत्काल खतरे को खत्म करने के लिए पकड़े गए या दुर्घटनाग्रस्त ड्रोनों को नष्ट करना एक बेहद खतरनाक लेकिन जरूरी प्रक्रिया होती है।
इसी बीच एक अन्य गंभीर घटनाक्रम में, यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने खुलासा किया है कि उनके खोज दलों को जॉर्डन की सीमा के भीतर कुछ अज्ञात मानव अवशेष मिले हैं। इस खोज का सीधा संबंध एक अलग और बेहद विनाशकारी ईरानी ड्रोन हमले से है। उस विशिष्ट हमले के परिणामस्वरूप पहले ही दो अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी, जबकि एक तीसरे सैनिक को आधिकारिक तौर पर युद्ध में लापता घोषित किया गया था। इन अवशेषों का मिलना इस बात का सबूत है कि मौजूदा शत्रुता का दायरा पारंपरिक युद्ध क्षेत्रों से कहीं आगे तक फैल चुका है।
पूरे क्षेत्र में हवाई हमलों की लहर
इस संघर्ष के झटके पूरे फारस की खाड़ी और उसके पार भी महसूस किए जा रहे हैं। बहरीन जैसे देश में, जहां शांति के समय में शायद ही कभी हवाई हमले के सायरन बजते हों, वहां भी लगातार चेतावनी अलार्म गूंज रहे हैं। यह व्यापक अलर्ट तब जारी किया गया जब ईरानी सैन्य बलों ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और विस्फोटकों से लदे वन-वे अटैक ड्रोनों की एक नई और समन्वित लहर शुरू की। इस उन्नत बमबारी ने किसी एक दुश्मन को निशाना बनाने के बजाय बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और इराक में फैले कई रणनीतिक ठिकानों पर एक साथ हमला किया, जो कई सीमाओं के पार अपनी ताकत दिखाने की तेहरान की क्षमता को दर्शाता है।
निशाना बनाए गए अलग-अलग देशों में रक्षात्मक प्रतिक्रियाएं काफी अलग रहीं। जॉर्डन में, आने वाली ईरानी मिसाइलों ने अक़ाबा के महत्वपूर्ण दक्षिणी तटीय शहर के करीब आपातकालीन सायरन बजा दिए। जॉर्डन के सैन्य अधिकारियों ने तुरंत बताया कि उनके उन्नत वायु रक्षा बलों ने हवा में ही तीन मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक कर नष्ट कर दिया। उन्होंने पुष्टि की कि सौभाग्य से इन रक्षात्मक कार्रवाइयों के कारण उनके अधिकार क्षेत्र में कोई जमीनी हताहत या बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचा।
इसके विपरीत, पड़ोसी कुवैत में भारी तबाही की तस्वीर सामने आई। कुवैती सशस्त्र बलों ने ऐसे बयान जारी किए जिनमें पुष्टि की गई कि इन हमलों ने महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। विशेष रूप से, इस बमबारी में बिजली उत्पादन सुविधाओं और पानी को साफ करने वाले महत्वपूर्ण प्लांटों को निशाना बनाया गया। इन हमलों से भीषण आग लग गई और इन महत्वपूर्ण संस्थानों को भारी नुकसान पहुंचा, जिससे नागरिक आबादी के लिए खतरा पैदा हो गया है।
इजरायल का रुख और समुद्री व्यापार मार्ग
यह संघर्ष इजरायल की सीमाओं तक भी पहुंच गया है, जिसने इस संकट को और उलझा दिया है। रविवार को, इजरायली रक्षा तंत्र ने एक दुश्मन ईरानी ड्रोन को सफलतापूर्वक रोकने की सूचना दी जो सीरिया और इजरायल को बांटने वाली सीमा के करीब आ गया था। इस हवाई घटना के बाद, इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने तेहरान के नेतृत्व को एक कड़ी और स्पष्ट चेतावनी दी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर उनके क्षेत्र पर हमला किया गया, तो वे तुरंत सीधे सैन्य अभियानों में फिर से शामिल होंगे।
तत्काल सैन्य झड़पों के अलावा, इस भू-राजनीतिक घर्षण के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में भी भारी बाधाएं आ रही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो एक संकरा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग है, वहां सप्ताहांत में वाणिज्यिक पारगमन में भारी कमी देखी गई। शिपिंग डेटा प्रदाता LSEG द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से पता चला है कि रविवार को इस जलडमरूमध्य से केवल चार जहाजों ने ही यात्रा की। यह आंकड़ा पिछले दिन पार करने वाले आठ जहाजों की तुलना में भारी गिरावट को दर्शाता है।
आर्थिक संकेतक और बदलती नीतियां
मध्य पूर्व में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच वित्तीय बाजार जटिल आर्थिक संकेतों से जूझ रहे हैं। कमोडिटी सेक्टर में कच्चे तेल की कीमत में तेजी दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि के दौरान अमेरिकी मुद्रा के मूल्य में अप्रत्याशित नुकसान हुआ। आने वाले सप्ताह के एजेंडे पर संयुक्त राज्य अमेरिका में महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट आय रिपोर्ट, यूरोपीय सेंट्रल बैंक की नीतियों और यूनाइटेड किंगडम की खबरों का भारी दबदबा रहेगा। अमेरिकी इक्विटी बाजार एक महत्वपूर्ण परीक्षण का सामना कर रहे हैं क्योंकि निवेशकों का ध्यान प्रौद्योगिकी कंपनियों की आय पर केंद्रित है।
आर्थिक मोर्चे पर नवीनतम उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) डेटा ने चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। जून के लिए सीपीआई में महीने-दर-महीने के आधार पर 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो अप्रैल 2020 के बाद से सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। इस तेज गिरावट ने कुल वार्षिक दर को खींचकर 3.5 प्रतिशत पर ला दिया, जो मई में 4.2 प्रतिशत थी। इससे महंगाई बढ़ने के लगातार तीन महीने के सिलसिले पर भी रोक लग गई। अस्थिर वस्तुओं को छोड़कर, मूल कीमतें महीने के लिए स्थिर (शून्य प्रतिशत) रहीं और वार्षिक आधार पर 2.6 प्रतिशत तक गिर गईं, जो कि आम सहमति के अनुमानों से काफी नीचे है।
वित्तीय बाजार की भावना: रिस्क-ऑन बनाम रिस्क-ऑफ
अस्थिरता के समय में वैश्विक निवेश को समझने के लिए रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ की अवधारणाओं को जानना आवश्यक है। ये शब्द उस जोखिम के स्तर को दर्शाते हैं जिसे निवेशक किसी अवधि के दौरान उठाने को तैयार होते हैं। रिस्क-ऑफ बाजार में, अनिश्चितता निवेशकों को सुरक्षित खेल खेलने के लिए प्रेरित करती है। वे कम जोखिम वाली उन संपत्तियों में निवेश करते हैं जो भले ही मामूली रिटर्न दें, लेकिन पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। इस दौरान प्रमुख सरकारी बॉन्ड ऊपर जाते हैं और सोना विशेष रूप से चमकता है।
इस रक्षात्मक अवधि के दौरान सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राएं, जैसे जापानी येन, स्विस फ्रैंक और अमेरिकी डॉलर को काफी फायदा होता है। अमेरिकी डॉलर दुनिया की आरक्षित मुद्रा है, और संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी ऋण खरीदते हैं क्योंकि इसके डिफ़ॉल्ट होने की संभावना नहीं है। जापानी येन में मांग इसलिए बढ़ती है क्योंकि घरेलू निवेशक संकट में भी इसे बेचना पसंद नहीं करते हैं। वहीं, स्विस फ्रैंक के पीछे स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानून हैं जो निवेशकों को मजबूत सुरक्षा प्रदान करते हैं।
आशावादी बाजार का तंत्र
इसके विपरीत, रिस्क-ऑन माहौल तब बनता है जब निवेशक भविष्य को लेकर आशावादी होते हैं और जोखिम भरी संपत्तियां खरीदने को तैयार रहते हैं। ऐसे समय में आम तौर पर शेयर बाजारों में तेजी आती है, क्रिप्टोकरेंसी ऊपर की ओर जाती हैं और सोने को छोड़कर अधिकांश कमोडिटी के मूल्य में वृद्धि होती है क्योंकि विकास के सकारात्मक दृष्टिकोण से उन्हें लाभ होता है।
यह आशावाद भारी मात्रा में कमोडिटी निर्यात करने वाले देशों की मुद्राओं को सीधे तौर पर मजबूत करता है। बढ़ी हुई मांग के कारण ऑस्ट्रेलियन डॉलर (AUD), कैनेडियन डॉलर (CAD), और न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) जैसी मुद्राएं रिस्क-ऑन बाजारों में चढ़ जाती हैं। इसके अलावा, रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) जैसी छोटी विदेशी मुद्राएं (FX) भी वृद्धि दर्ज करती हैं। निवेशकों का मानना है कि भविष्य में मजबूत आर्थिक गतिविधियों के कारण कच्चे माल की अधिक मांग होगी, जिससे इन अर्थव्यवस्थाओं को फायदा पहुंचेगा।




















