ईरान और अमेरिका में तनातनी से कच्चे तेल में भारी उठापटक: क्या 150 डॉलर तक पहुंचेंगे दाम?बाज़ार
2 घंटे पहले· 4

ईरान और अमेरिका में तनातनी से कच्चे तेल में भारी उठापटक: क्या 150 डॉलर तक पहुंचेंगे दाम?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने वैश्विक तेल बाजारों में खलबली मचा दी है, जिससे कीमतों में भारी अनिश्चितता है।

अमेरिका और ईरान के बीच उपजे नए भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक कच्चे तेल बाजार को एक बार फिर गहरे संकट में डाल दिया है। अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के अचानक बंद होने की खबरों ने बाजार में भारी हलचल पैदा कर दी है। इन घटनाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में चार फीसदी तक का उछाल देखा गया है। कुछ समय पहले जो क्रूड ऑयल 71 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर पर था, वह अब बढ़कर 76 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड में 0.38 फीसदी की मामूली नरमी के बाद यह 76.010 डॉलर प्रति बैरल पर है, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल यानी WTI लगभग एक फीसदी की गिरावट के साथ 71.41 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

बाजार में अनिश्चितता का माहौल

हालांकि मौजूदा झड़प के बाद कीमतों में बहुत बड़ी और स्थायी उछाल नहीं आई है, फिर भी दुनिया भर के व्यापारी और नीति-निर्धारक बेहद चिंतित हैं। खाड़ी क्षेत्र से होने वाली तेल आपूर्ति में यदि कोई भी छोटी-सी बाधा भी आती है, तो उसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है। अतीत में भी ऐसा देखा गया है कि जब भी अमेरिका ने ईरान पर हमले किए, कच्चे तेल के भाव 71 डॉलर से सीधा 79 डॉलर तक पहुंच गए थे। तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह आपूर्ति श्रृंखला का सबसे संवेदनशील हिस्सा है, जिसे नजरअंदाज करना अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक हो सकता है।

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भविष्य में कीमतों का गणित

ऐतिहासिक रूप से, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के पहले दौर के दौरान ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर को छू चुका था। युद्ध विराम की घोषणा के बाद ही कीमतों में गिरावट देखने को मिली थी। जानकारों का स्पष्ट मानना है कि यदि यह जंग लंबी खिंची और दोनों देशों के बीच कोई शांति समझौता नहीं हो पाया, तो क्रूड की कीमतें आसमान छू सकती हैं। अप्रैल 2026 में हाईटॉन्ग फ्यूचर्स ने अपने विश्लेषण में चेतावनी दी थी कि संघर्ष के लंबे खिंचने पर ब्रेंट क्रूड 150 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर सकता है। वहीं, नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुमानों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर से 150 डॉलर के बीच पहुंच सकती है।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

मौजूदा समय में होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले और अमेरिका की जवाबी बमबारी से पश्चिम-एशिया एक बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा है। अगर तेल की आपूर्ति बहाल नहीं हुई और तनाव बढ़ता रहा, तो वैश्विक स्तर पर तेल के दाम फिर से उबाल मारेंगे। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें केवल आंकड़ों का खेल नहीं हैं, बल्कि इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों में पहले भी ऐसे वैश्विक तनावों के कारण पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में भारी वृद्धि देखी जा चुकी है। यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो ईंधन के दाम बढ़ने का खतरा एक बार फिर जनता की रसोई और परिवहन लागत को प्रभावित करना शुरू कर देगा।

सवाल-जवाब

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में वृद्धि हुई है।
ब्रेंट क्रूड के दाम कहां तक जा सकते हैं?
विशेषज्ञों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
क्या होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना गंभीर है?
हां, होर्मुज जलडमरूमध्य तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है और इसका बंद होना वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को 110 डॉलर से 150 डॉलर के बीच पहुंचा सकता है।
आम आदमी पर इसका क्या असर होगा?
ईंधन के दाम बढ़ने से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस महंगी हो सकती है, जिसका सीधा असर जनता के मासिक खर्चों पर पड़ेगा।

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