दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में शुक्रवार को एक बार फिर भारी उथल-पुथल मच गई। देश का प्रमुख सूचकांक KOSPI कारोबारी सत्र के दौरान 8.2% तक गिर गया, जिसके बाद कोरिया एक्सचेंज को नियमों के तहत करीब 20 मिनट के लिए पूरी ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। सबसे बड़ी मार पड़ी देश की दो अग्रणी चिप कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK हाइनिक्स पर, जिनके शेयर 9% से ज्यादा टूट गए। यह इस हफ्ते दूसरा मौका था जब बाजार में इतनी तीव्र अस्थिरता आई कि ट्रेडिंग रोकनी पड़ी।
गिरावट की वजह: AI और मेमोरी चिप्स पर उठते सवाल
इस बिकवाली की जड़ में तीन बड़ी चिंताएं हैं। पहली, AI सेक्टर की भविष्य की मांग को लेकर बढ़ती अनिश्चितता। दूसरी, मेमोरी चिप्स के कारोबार की आगे की दिशा पर उठते सवाल। और तीसरी, टेक कंपनियों के वैल्यूएशन का बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंच जाना। हाल के हफ्तों में AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी आई थी, लेकिन अब निवेशक उस बढ़त में मुनाफावसूली कर रहे हैं। इसके साथ ही मेमोरी चिप्स की आगे की मांग को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं, जिससे टेक शेयरों पर दबाव और बढ़ गया और पूरा बाजार नीचे खिंच आया।
इस हफ्ते की एक खास बात यह रही कि गिरावट से ठीक एक दिन पहले माइक्रोन टेक्नोलॉजी के मजबूत आउटलुक और SK हाइनिक्स की अमेरिका में संभावित लिस्टिंग की खबरों ने कोरियाई बाजार में अच्छी तेजी पैदा की थी। लेकिन अगले ही दिन निवेशकों का मूड पूरी तरह पलट गया और बिकवाली का सैलाब आ गया।
$1.7 बिलियन की विदेशी बिकवाली ने बाजार को डुबोया
शुक्रवार को सिर्फ सुबह के कारोबार में विदेशी निवेशकों ने करीब $1.7 बिलियन के शेयर बेच डाले। इतनी भारी बिकवाली ने पहले से दबे बाजार को और नीचे धकेल दिया। चूंकि सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK हाइनिक्स KOSPI इंडेक्स में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं, इसलिए इन दोनों में 9% से ज्यादा की तेज गिरावट का असर सीधे पूरे सूचकांक पर पड़ा और KOSPI 8.2% तक नीचे आ गया।
सर्किट ब्रेकर और साइडकार कैसे काम करते हैं?
शेयर बाजारों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को काबू में रखने के लिए दो अलग-अलग सुरक्षा तंत्र होते हैं। पहला है साइडकार, जो तब लागू होता है जब फ्यूचर्स मार्केट में असामान्य रूप से तेज हलचल होती है। साइडकार के तहत केवल एल्गोरिदम या प्रोग्राम आधारित ट्रेडिंग को कुछ समय के लिए रोका जाता है, ताकि घबराहट में होने वाली ऑटोमेटेड बिकवाली पर लगाम लगाई जा सके और बाजार में थोड़ी शांति आ सके।
दूसरा और ज्यादा सख्त उपाय है सर्किट ब्रेकर। इसके तहत पूरे शेयर बाजार की सभी प्रकार की ट्रेडिंग कुछ समय के लिए पूरी तरह बंद कर दी जाती है। शुक्रवार को KOSPI में 8% से अधिक की गिरावट के बाद पहले स्तर का सर्किट ब्रेकर लागू हुआ और लगभग 20 मिनट तक कारोबार ठप रहा। इसका उद्देश्य निवेशकों को स्थिति समझने का वक्त देना, घबराहट में की जाने वाली बिकवाली को थामना और बाजार में स्थिरता बनाए रखना होता है।
KOSPI की बड़ी कमजोरी: दो कंपनियों पर 60% निर्भरता
दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार एक गंभीर संरचनात्मक कमजोरी के साथ जूझ रहा है। KOSPI इंडेक्स का लगभग 60% हिस्सा केवल दो कंपनियों यानी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK हाइनिक्स पर टिका है। जब इन दोनों के शेयरों में बड़ा उतार-चढ़ाव होता है, तो पूरा बाजार उसी के साथ हिल जाता है। इसके ऊपर, इन शेयरों से जुड़े लीवरेज्ड ETF में रिटेल निवेशकों की भारी भागीदारी है और इन ETF की हर दिन होने वाली रीबैलेंसिंग से बाजार की अस्थिरता और ज्यादा बढ़ जाती है। यही वजह है कि इन दो कंपनियों से जुड़ी कोई भी नकारात्मक खबर कोरियाई बाजार में बड़ी हलचल पैदा कर देती है।
सैक्सो मार्केट्स की विशेषज्ञ की चेतावनी
सैक्सो मार्केट्स की चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट चारु चनाना का कहना है कि मेमोरी चिप्स की मांग अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन अब इस सेक्टर का फायदा सभी कंपनियों को एकसमान नहीं मिलेगा। केवल चुनिंदा कंपनियां ही इसका लाभ उठा पाएंगी। उनका यह भी मानना है कि अगर मेमोरी चिप्स का मौजूदा मजबूत दौर धीमा पड़ता है, तो इसका असर पूरे AI सेक्टर पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। इसी आशंका को देखते हुए निवेशक पहले से ही सतर्क हो गए हैं और बाजार इस जोखिम को अपनी कीमतों में पहले से ही शामिल करने लगा है।
भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?
कोरियाई बाजार में आई इस बड़ी गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार पर सोमवार को देखा जा सकता है। यह पैटर्न इसी हफ्ते पहले भी स्थापित हो चुका है। जब KOSPI में पहली बार बड़ी गिरावट आई थी, तब भारतीय बाजार के साथ-साथ अन्य एशियाई बाजारों पर भी उसका सीधा असर पड़ा था। अब दूसरी और बड़ी गिरावट के बाद सोमवार को बाजार खुलने पर भारतीय निवेशकों को सतर्कता बरतनी होगी और शुरुआती कारोबारी रुझान पर करीबी नजर रखनी होगी।













