सिंगापुर के केंद्रीय बैंक ने बाजार को चौंकाते हुए लगातार दूसरी बार अपनी मौद्रिक नीति को सख्त किया है, और इसके बाद सिंगापुर डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत बना रह सकता है। एमयूएफजी के लॉयड चैन के आकलन के मुताबिक, यह कदम भले ही आकार में छोटा हो, लेकिन इसका संदेश साफ है, नीति निर्माता महंगाई पर पैनी नजर रखे हुए हैं और मानते हैं कि अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है कि थोड़ा और दबाव झेल सकती है।
लगातार दूसरी बार सख्ती
मॉनिटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर (MAS) दुनिया के ज्यादातर केंद्रीय बैंकों से अलग तरीके से काम करती है। यह ब्याज दर तय करने के बजाय सिंगापुर डॉलर को अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले नियंत्रित करती है। इस व्यवस्था को सिंगापुर डॉलर का नॉमिनल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट यानी S$NEER कहा जाता है। जिस दायरे में मुद्रा को घटने बढ़ने की छूट होती है, उसकी ढलान (स्लोप), चौड़ाई और केंद्र को घटा बढ़ाकर MAS नीति को सख्त या ढीला करती है। इस बार उसने स्लोप को थोड़ा तीखा किया, यानी मुद्रा को थोड़ा तेजी से मजबूत होने की छूट दी, जबकि बैंड की चौड़ाई और केंद्र को जस का तस छोड़ दिया। चैन का अनुमान है कि स्लोप को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर सालाना 1.25% कर दिया गया है।
बाजार को सबसे ज्यादा हैरानी टाइमिंग को लेकर हुई। यह लगातार दूसरी बार की सख्ती थी, और MAS ने खासतौर पर यह बताया कि यह बदलाव अप्रैल में किए गए बदलाव से छोटा है। यह बात मायने रखती है, इससे निवेशकों को यह संकेत मिलता है कि सख्ती जरूरी तो थी, लेकिन बैंक फिलहाल आक्रामक नहीं, बल्कि नपा तुला कदम ही उठाना चाहता है।
छोटा कदम, बड़ा संकेत
चैन कहते हैं, "इस कदम का आकार भले मामूली रहा हो, लेकिन फैसला अपने आप में अहम है।" इसकी वजह यह है कि यह कदम MAS की सोच के बारे में क्या बताता है। पहले की एक सख्ती के तुरंत बाद उठाया गया यह कदम इस बात की पुष्टि करता है कि केंद्रीय बैंक इस बात को लेकर ज्यादा चिंतित है कि बाहर से आने वाली महंगाई का दबाव कितने लंबे समय तक बना रह सकता है। साथ ही यह भरोसा भी झलकता है कि सिंगापुर की अर्थव्यवस्था और सख्ती को झेलने लायक मजबूत बनी हुई है।
घरेलू महंगाई अब भी काबू में
कदम का आकार छोटा रखना कोई इत्तेफाक नहीं है। चैन बताते हैं कि घरेलू स्तर पर कीमतों का दबाव अब भी काबू में है। प्रति इकाई श्रम लागत की बढ़ोतरी लगातार धीमी पड़ रही है, उत्पादकता में बढ़त सेहतमंद बनी हुई है, और इस बात के बहुत कम संकेत हैं कि महंगाई का असर व्यापक स्तर पर दूसरे दौर तक पहुंचा हो, यानी वह स्थिति जब कीमतों में शुरुआती उछाल वेतन में बढ़ोतरी करा देता है और फिर वह दोबारा कीमतों को ऊपर धकेलता है। घरेलू दबाव काबू में होने की वजह से ही MAS अपनी प्रतिक्रिया को जानबूझकर छोटा और सिर्फ बाहरी महंगाई पर केंद्रित रख सका।
USD/SGD के लिए आगे की राह
कुल मिलाकर, यह सख्त लेकिन संतुलित रुख सिंगापुर डॉलर को अच्छा सहारा देता रहेगा, वह भी तब जब वैश्विक अनिश्चितता और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के पक्ष में जाती हैं। चैन को उम्मीद है कि मध्यम अवधि में USD/SGD नीचे की ओर जाएगा, यानी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सिंगापुर डॉलर मजबूत होगा। इस अनुमान के लिए सबसे बड़ा जोखिम सिंगापुर के बाहर है, बाहरी कारणों से अमेरिकी डॉलर का अपना उतार चढ़ाव ही वह बड़ा अनिश्चित पहलू है जो इस दिशा को बिगाड़ सकता है।
बाकी मुद्राओं की तस्वीर
सिंगापुर डॉलर की यह स्थिरता ऐसे समय आई है जब बाकी बड़ी मुद्रा जोड़ियां वैश्विक खबरों पर झूल रही हैं। ब्रिटिश पाउंड ने शुक्रवार की मामूली बढ़त गंवा दी और सोमवार को 1.3300 के स्तर से नीचे फिसलकर कई हफ्तों के नए निचले स्तर पर पहुंच गया। मध्य पूर्व संघर्ष में ठहराव के बाद कच्चे तेल की गिरती कीमतें और हाल में ब्रिटेन के महंगाई के नरम आंकड़े, दोनों मिलकर इस सप्ताह के आखिर में होने वाली बैंक ऑफ इंग्लैंड की बैठक से पहले किसी सख्ती की संभावना के खिलाफ काम कर रहे हैं।
वहीं यूरो 1.1400 के ऊपर शुरुआती तेजी के बाद ठंडा पड़ गया और सोमवार को 1.1370 के आसपास लौट आया। इसके बावजूद EUR/USD ने लगातार दो दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ा, जिसमें अमेरिकी डॉलर के अस्थिर रुख से मदद मिली, क्योंकि निवेशक मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। अब सबकी निगाहें कॉन्फ्रेंस बोर्ड की ओर से आने वाले अमेरिकी उपभोक्ता विश्वास (कंज्यूमर कॉन्फिडेंस) के आंकड़े पर हैं।


















