भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की तरफ से हो रही खरीदारी का सिलसिला अगस्त 2026 के पहले हफ्ते में भी मजबूती से जारी रहा। आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के पहले सात दिनों के दौरान विदेशी निवेशकों ने घरेलू इक्विटी बाजार में 12,921 करोड़ रुपये की नई पूंजी लगाई है। इससे पहले जुलाई 2026 के दौरान विदेशी निवेशकों ने 20,200 करोड़ रुपये का भारी निवेश किया था, जिसने लगातार चार महीनों से चले आ रहे बिकवाली के सिलसिले पर विराम लगाया था। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की मजबूत उम्मीदों, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, भारतीय रुपये की स्थिरता और देश की मजबूत वृहद आर्थिक स्थिति ने भारत को विदेशी पूंजी के लिए एक आकर्षक केंद्र बना दिया है।
भारतीय बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह क्यों बढ़ा?
विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख में आए इस बदलाव के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक काम कर रहे हैं। अमेरिका के केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती किए जाने की बढ़ती संभावनाओं से वैश्विक स्तर पर लिक्विडिटी में सुधार की उम्मीद जागी है। इसके साथ ही, कच्चे तेल के दामों में आई नरमी ने भारत के आयात बिल और महंगाई दर पर दबाव को कम किया है। घरेलू मोर्चे पर, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रस्तुत बेहतर आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति के संतुलित अनुमानों ने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया है। भारतीय रुपये में बनी स्थिरता ने भी विदेशी निवेशकों को मुद्रा के जोखिम से सुरक्षा प्रदान की है, जिससे वे भारतीय बाजार में खुलकर पैसा लगा रहे हैं।
साल 2026 में अब तक की बिकवाली और निवेश के आंकड़े
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का रुख काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। जुलाई में हुई वापसी से पहले विदेशी निवेशकों ने लगातार चार महीनों तक भारी बिकवाली की थी। मार्च 2026 में विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी। इसके बाद अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये और जून में 49,340 करोड़ रुपये शेयर बाजार से निकाले गए थे। हालांकि, साल की शुरुआत में फरवरी 2026 के दौरान विदेशी निवेशकों ने 22,615 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। जुलाई और अगस्त में हुई हालिया खरीदारी के बावजूद, साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में 2.41 लाख करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं। यह आंकड़ा पूरे वर्ष 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की कुल निकासी से काफी अधिक है।
सेकंडरी मार्केट और प्रमुख सेक्टर्स पर विदेशी निवेशकों का भरोसा
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी पूंजी का यह नया आगमन केवल सीमित अवसरों तक सिमटा हुआ नहीं है। निवेश प्लेटफॉर्म ट्रैक के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वेदांत गुप्ते ने बताया कि भारतीय शेयरों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी फिलहाल अपेक्षाकृत कम बनी हुई है, जिससे आगे और निवेश आने की भरपूर गुंजाइश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालिया खरीदारी का एक बड़ा हिस्सा सीधे सेकंडरी मार्केट के जरिए आया है, जो दर्शाता है कि विदेशी निवेशक सिर्फ आईपीओ में ही दिलचस्पी नहीं ले रहे, बल्कि पहले से लिस्टेड भारतीय कंपनियों के शेयरों में भी जमकर पैसा लगा रहे हैं। वहीं, जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार का कहना है कि विदेशी निवेशक ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर जैसे मजबूत मांग वाले क्षेत्रों में खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
भारतीय डेट और बॉन्ड मार्केट की स्थिति
इक्विटी मार्केट के साथ-साथ विदेशी निवेशकों की रुचि भारतीय डेट और बॉन्ड बाजार में भी लगातार बनी हुई है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सामान्य मार्ग के माध्यम से भारतीय बॉन्ड बाजार में 622 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया है। बॉन्ड बाजार में यह निरंतर निवेश भारत की राजकोषीय स्थिति और स्थिर प्रतिफल दरों पर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के टिकाऊ भरोसे को दर्शाता है।



















