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मध्य पूर्व में बातचीत की उम्मीदों से चांदी की कीमतों में गिरावट, फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी बाजार की निगाहेंबाज़ार
28 जुल॰ 2026, 3:38 pm (13 दिन पहले)· 0

मध्य पूर्व में बातचीत की उम्मीदों से चांदी की कीमतों में गिरावट, फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी बाजार की निगाहें

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के संकेतों से चांदी की कीमतें 1.45% गिरकर लगभग $57.55 पर आ गईं, क्योंकि सुरक्षित निवेश की मांग कम हुई है और निवेशक फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक का इंतजार कर रहे हैं।

मंगलवार को चांदी की कीमतों में 1.45 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग $57.55 प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रही थी। मध्य पूर्व में तनाव कम होने की संभावनाओं और कूटनीतिक बातचीत के संकेतों के बाद सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी की मांग में कमी आई है। इसके साथ ही, निवेशक इस हफ्ते के अंत में आने वाले अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के मौद्रिक नीति संबंधी फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं के भावी रुख का आकलन किया जा सके।

मध्य पूर्व में कूटनीतिक प्रयास और ऊर्जा बाजार पर असर

चांदी की कीमतों में आई हालिया गिरावट का मुख्य कारण मध्य पूर्व के राजनीतिक घटनाक्रम हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका क्षेत्रीय संघर्ष को सुलझाने के लिए ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत कर रहा है। दोनों देशों के बीच तनाव घटने की उम्मीदों ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है, जिससे वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति का दबाव कम होने की उम्मीद जगी है। महंगाई की आशंकाएं कम होने से केंद्रीय बैंकों द्वारा निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाएं भी घट गई हैं।

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हालांकि, कूटनीतिक वार्ताओं के बावजूद भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि बातचीत बेनतीजा रहती है, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। इसके अलावा, सऊदी अरब, जोर्डन और इराक में सामने आई हालिया सुरक्षा संबंधी घटनाओं से स्पष्ट है कि इलाके में स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के आवागमन में बाधाएं वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं, जिस वजह से निवेशक किसी भी नए बदलाव पर बारीक नजर बनाए हुए हैं।

फेडरल रिजर्व के फैसले और मौद्रिक नीतियां

भू-राजनीतिक परिस्थितियों के अलावा, कीमती धातुओं की दरें केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व से मिलने वाले मौद्रिक नीति के संकेतों से भी नियंत्रित होती हैं। चूंकि चांदी पर कोई ब्याज या लाभांश नहीं मिलता, इसलिए इसकी निवेश मांग मौजूदा ब्याज दरों से काफी हद तक तय होती है। कम ब्याज दरों या मौद्रिक नीति में ढील के दौर में चांदी और सोने जैसी धातुओं को अपने पास रखने की लागत कम हो जाती है, जिससे निवेशक इनकी ओर आकर्षित होते हैं। इसके विपरीत, जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखते हैं, तो बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले साधन अधिक आकर्षक बन जाते हैं और चांदी जैसी धातुओं की कीमतों पर दबाव देखने को मिलता है।

इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी चांदी की चाल निर्धारित करने वाला एक बड़ा कारक है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी का कारोबार अमेरिकी डॉलर (XAG/USD) में किया जाता है। डॉलर के मजबूत होने पर विदेशी मुद्रा का उपयोग करने वाले खरीदारों के लिए चांदी महंगी हो जाती है, जिससे इसकी मांग सीमित रहती है। वहीं, डॉलर कमजोर होने पर विदेशी खरीदारों के लिए चांदी खरीदना आसान हो जाता है, जिससे कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। वर्तमान में निवेशक फेडरल रिजर्व के रुख को समझने के बाद ही बाजार में नई दिशा तय करना चाहते हैं।

सुरक्षित निवेश का माध्यम और गोल्ड/सिल्वर रेशियो

ऐतिहासिक रूप से चांदी का इस्तेमाल धन के संचय और लेन-देन के माध्यम के रूप में किया जाता रहा है। संकट के समय सोने को पहला विकल्प माना जाता है, लेकिन निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने और महंगाई से बचाव के लिए चांदी को भी एक मजबूत विकल्प मानते हैं। बाजार में चांदी के भौतिक रूप जैसे सिक्के और छड़ें खरीदे जा सकते हैं। इसके अलावा, निवेशक एक्सचेंज ट्रेंडेड फंड्स (ETF) और अन्य वित्तीय साधनों के माध्यम से भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी कीमतों पर दांव लगाते हैं।

सुरक्षित संपत्ति होने के कारण चांदी अक्सर सोने की चाल का अनुसरण करती है। हालांकि, सोने की तुलना में चांदी का बाजार छोटा होने के कारण इसमें अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। विश्लेषक दोनों धातुओं के बीच मूल्य तुलना के लिए 'गोल्ड/सिल्वर रेशियो' का अध्ययन करते हैं, जो यह बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की जरूरत होगी। यदि यह अनुपात ऐतिहासिक रूप से बहुत ऊंचा होता है, तो माना जाता है कि चांदी का मूल्य कम आंका गया है या सोना जरूरत से ज्यादा महंगा है। इसके विपरीत, अनुपात कम होने का अर्थ है कि चांदी की तुलना में सोना सस्ता है।

औद्योगिक मांग और वैश्विक अर्थव्यवस्था का योगदान

सोने के विपरीत, चांदी का एक बड़ा हिस्सा औद्योगिक क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता है। चांदी में सभी धातुओं की तुलना में सबसे अधिक विद्युत और तापीय चालकता होती है, जो तांबे और सोने से भी ज्यादा है। इसी विशेषता के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार उपकरण और सोलर पैनल निर्माण उद्योग में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है।

इसी वजह से वैश्विक औद्योगिक गतिविधियों का चांदी की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। अमेरिका और चीन जैसे बड़े औद्योगिक देशों में विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार चांदी की खपत तय करती है। दूसरी तरफ, भारत में आभूषणों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के लिए चांदी की मजबूत उपभोक्ता मांग रहती है, जो त्योहारों और शादियों के सीजन में बाजार को प्रभावित करती है। इसके अलावा, तांबा और जस्ता खनन के दौरान सह-उत्पाद के रूप में मिलने वाली चांदी की आपूर्ति और रीसाइक्लिंग दरें भी लंबी अवधि में इसकी कीमतों का संतुलन बनाए रखती हैं।

सवाल-जवाब

मंगलवार को चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के संकेतों से मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी, जिससे निवेशकों ने चांदी जैसे सुरक्षित ठिकानों से अपना पैसा निकाला।
इस समय चांदी का भाव क्या चल रहा है?
मंगलवार को 1.45% की गिरावट के साथ चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग $57.55 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी।
फेडरल रिजर्व की बैठक का चांदी पर क्या असर पड़ता है?
फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती या वृद्धि के फैसले का चांदी पर सीधा असर होता है, क्योंकि ब्याज दरें घटने पर बिना ब्याज वाली चांदी की मांग बढ़ जाती है।
सोने की तुलना में चांदी का औद्योगिक इस्तेमाल कितना महत्वपूर्ण है?
चांदी की विद्युत चालकता सबसे अधिक होने के कारण इसका व्यापक उपयोग सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार उपकरणों में होता है, जो इसकी कुल मांग का बड़ा हिस्सा है।
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