भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जब देश का प्रमुख शेयर बाजार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज सार्वजनिक बोली के लिए खुला। कुल 22,569 करोड़ रुपये के निर्गम आकार के साथ यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ बन चुका है। प्राथमिक बाजार में निवेशकों की नजर इस विशाल निर्गम पर टिकी हुई है, जहां सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े वित्तीय संस्थान और बैंक अपनी हिस्सेदारी की बिक्री कर रहे हैं। इस निर्गम के जरिए बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के देश की शीर्ष 15 सबसे मूल्यवान कंपनियों के क्लब में शामिल होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
बोली की समयसीमा और मूल्य दायरा
इस सार्वजनिक निर्गम के लिए बोली की प्रक्रिया 17 सितंबर 2026 से प्रारंभ हुई है और यह 21 सितंबर 2026 तक चलेगी। कैलेंडर के अनुसार यह बोली खिड़की तीन कारोबारी दिनों के लिए सक्रिय रहेगी, क्योंकि 19 सितंबर और 20 सितंबर को सप्ताहांत अवकाश के कारण शेयर बाजार बंद रहेंगे। निर्गम के लिए प्रति शेयर मूल्य दायरा 1,700 रुपये से लेकर 1,785 रुपये निर्धारित किया गया है। संस्थान ने अपने पात्र कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रति शेयर 170 रुपये की विशेष छूट की पेशकश भी की है, जिससे आंतरिक कार्यबल को भी इस ऐतिहासिक यात्रा में भागीदारी का अवसर मिला है।
पूर्ण रूप से ऑफर फॉर सेल पर आधारित ढांचा
यह विशाल निर्गम पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि इसमें कोई नया शेयर जारी नहीं किया जा रहा और निर्गम से प्राप्त पूरी राशि शेयर बेच रहे मौजूदा शेयरधारकों के पास जाएगी। इस निर्गम के अंतर्गत कुल 12,64,36,650 इक्विटी शेयर बिक्री के लिए रखे गए हैं। हिस्सेदारी बेचने वाले प्रमुख शेयरधारकों में देश के दिग्गज सार्वजनिक उपक्रम और वित्तीय संस्थान शामिल हैं। इनमें भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, द न्यू इंडिया एश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस शामिल हैं, जो लंबे समय से संचित अपनी धारिता का एक बड़ा हिस्सा सार्वजनिक निवेशकों के लिए खोल रहे हैं।
देश के सबसे बड़े निर्गमों में दूसरा स्थान
निर्गम के 22,562 करोड़ से 22,569 करोड़ रुपये के पैमाने ने इसे घरेलू प्राथमिक बाजार में ऐतिहासिक पायदान पर पहुंचा दिया है। भारतीय बाजार में अब तक के सबसे बड़े निर्गम का रिकॉर्ड हुंडई के नाम दर्ज है, जिसका निर्गम आकार 27,870 करोड़ रुपये था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने इस पेशकश के साथ वर्ष 2021 में आए भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी के 21,008 करोड़ रुपये के निर्गम को पीछे छोड़ दिया है। इस सूची में चौथे स्थान पर वर्ष 2021 का पेटीएम निर्गम 18,300 करोड़ रुपये के साथ और पांचवें स्थान पर वर्ष 2010 में आया कोल इंडिया का 15,200 करोड़ रुपये का निर्गम मौजूद है। किसी भी वित्तीय एक्सचेंज के लिहाज से यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है।
एंकर बुक में 150 से अधिक संस्थागत खरीदारों का भरोसा
आम जनता और खुदरा निवेशकों के लिए निर्गम खुलने से ठीक पहले संस्थागत निवेशकों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखी गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने अपनी एंकर निवेशक आवंटन प्रक्रिया के तहत सफलतापूर्वक 6,471 करोड़ से 6,746 करोड़ रुपये जुटाए। इस एंकर बुक में 150 से अधिक बड़े संस्थागत निवेशकों ने हिस्सा लिया। घरेलू मोर्चे पर म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियों और पेंशन फंड्स ने आवंटन में अग्रणी भूमिका निभाई, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और वैश्विक सॉवरेन वेल्थ फंड्स ने भी भारी पूंजी का निवेश किया। संस्थागत समर्थन ने निर्गम की नींव को पहले दिन से ही बेहद मजबूत आधार प्रदान किया है।
ग्रे मार्केट प्रीमियम और अनुमानित लिस्टिंग
अनौपचारिक बाजार यानी ग्रे मार्केट में भी इस निर्गम को लेकर लगातार मूल्यांकन चल रहा है। 17 सितंबर 2026 को पूर्वाह्न 10:53:01 बजे दर्ज आंकड़ों के मुताबिक ग्रे मार्केट प्रीमियम 140 रुपये देखा गया। ऊपरी मूल्य दायरे 1,785 रुपये को आधार मानते हुए अनुमानित लिस्टिंग मूल्य 1,925 रुपये बैठता है, जो कैप प्राइस और तत्कालीन प्रीमियम का जोड़ है। इस स्तर पर प्रति शेयर संभावित प्रतिशत लाभ या घाटा 7.84 प्रतिशत आंका गया है। बाजार विश्लेषकों का आकलन है कि इस निर्गम आकार और मूल्यांकन के दम पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज सूचीबद्ध होने पर अपने घरेलू प्रतिद्वंद्वी बीएसई की तुलना में तीन गुना से भी अधिक बड़ा साबित हो सकता है।


















