भारतीय पूंजी बाजार के सबसे बहुप्रतीक्षित सार्वजनिक निर्गमों में शामिल नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का आईपीओ निवेशकों की बोलियों के लिए 17 सितंबर 2026 से खुल चुका है। यह इश्यू 21 सितंबर तक खुला रहेगा, जिसमें निवेशक तय दायरे में अपनी बोलियां जमा कर सकते हैं। यह शेयर बाजार इतिहास का सबसे बड़ा एक्सचेंज आईपीओ होने के साथ-साथ भारतीय बाजार का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ भी है। इसके लिए प्रति शेयर 1,700 रुपये से लेकर 1,785 रुपये का प्राइस बैंड तय किया गया है। लिस्टेड प्रतिद्वंद्वी बीएसई की तुलना में इसका वैल्यूएशन आकर्षक नजर आ रहा है, लेकिन पिछले एक हफ्ते के दौरान इसके ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी में लगभग 37 प्रतिशत की तेज गिरावट देखी गई है। मौजूदा अनौपचारिक बाजार के रुझान बीएसई पर करीब 7 प्रतिशत के प्रीमियम पर लिस्टिंग की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल है कि क्या इस पब्लिक इश्यू में पैसा लगाना फायदेमंद रहेगा।
इश्यू का ढांचा और प्रमुख तारीखें
इस पूरे पब्लिक इश्यू का कुल आकार 22,569 करोड़ रुपये रखा गया है, जो पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस पर आधारित है। इसका मतलब यह है कि इस निर्गम के जरिए कंपनी को कोई नई पूंजी नहीं मिलेगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। संस्थान के पात्र कर्मचारियों के लिए 170 रुपये प्रति शेयर की विशेष छूट भी निर्धारित की गई है। निवेशक इस इश्यू में न्यूनतम 8 शेयरों के एक लॉट और उसके बाद 8 के ही गुणकों में बोली लगा सकते हैं।
निर्गम की प्रक्रिया के तहत शेयरों का अलॉटमेंट 22 सितंबर 2026 को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद जिन निवेशकों को शेयर आवंटित नहीं होंगे, उनके पैसों की वापसी या रिफंड और सफल बोलीदाताओं के डीमैट खातों में शेयरों का क्रेडिट 23 सितंबर को पूरा किया जाएगा। इसके उपरांत 24 सितंबर को यह शेयर केवल बीएसई पर सूचीबद्ध होने की उम्मीद है।
प्रमोटरों और वित्तीय संस्थानों की हिस्सेदारी बिक्री
इस ऑफर फॉर सेल के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंकों और बीमा कंपनियों सहित कई बड़े शेयरधारक अपनी बड़ी हिस्सेदारी जनता के लिए पेश कर रहे हैं। इसमें भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, द न्यू इंडिया एश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस शामिल हैं। इन सभी वित्तीय संस्थानों की ओर से कुल मिलाकर 12,64,36,650 इक्विटी शेयर बिक्री के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।
इश्यू में शेयरों का कोटा अलग-अलग निवेशक वर्गों में विभाजित किया गया है। कुल ऑफर का 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी क्यूआईबी के लिए सुरक्षित रखा गया है। वहीं खुदरा व्यक्तिगत निवेशकों के लिए 35 प्रतिशत का आवंटन तय हुआ है, जबकि गैर-संस्थागत निवेशकों यानी एनआईआई के लिए 15 प्रतिशत का कोटा निर्धारित किया गया है।
ग्रे मार्केट प्रीमियम का हाल और लिस्टिंग अनुमान
ग्रे मार्केट के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 17 सितंबर 2026 को सुबह 11:55:01 बजे तक इसका जीएमपी 140 रुपये दर्ज किया गया। अपर प्राइस बैंड 1,785 रुपये को आधार माना जाए, तो आज के जीएमपी को जोड़कर अनुमानित लिस्टिंग मूल्य 1,925 रुपये बैठता है। इस हिसाब से प्रति शेयर अनुमानित लिस्टिंग लाभ या हानि 7.84 प्रतिशत आंकी जा रही है।
हालांकि, पिछले सात दिनों के भीतर ग्रे मार्केट प्रीमियम में 36 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट आई है। इससे पहले 5 सितंबर 2026 को इसका जीएमपी 310 रुपये के उच्चतम स्तर पर देखा गया था, जिसके बाद से इसमें लगातार फिसलन जारी रही। तारीखवार रुझान देखें तो 11 सितंबर को यह 218 रुपये पर था, जो 12 सितंबर को घटकर 208 रुपये रह गया। इसके बाद 13 सितंबर को यह 210 रुपये, 14 सितंबर को फिर 208 रुपये, 15 सितंबर को 160 रुपये और 16 सितंबर को और गिरकर 145 रुपये पर आ गया था।
वैल्यूएशन और सूचीबद्ध प्रतिद्वंद्वी से तुलना
अपर प्राइस बैंड 1,785 रुपये के स्तर पर पोस्ट-इश्यू पी/ई अनुपात 35.4 गुना बैठता है। यदि इसकी तुलना इसके मुख्य लिस्टेड प्रतिद्वंद्वी बीएसई से की जाए, जिसका पी/ई अनुपात 54.2 गुना पर कारोबार कर रहा है, तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का वैल्यूएशन तुलनात्मक रूप से काफी आकर्षक दिखाई देता है।
वित्तीय वर्ष 2026 के दौरान इसके वित्तीय प्रदर्शन पर नियामक बदलावों और ट्रेडिंग गतिविधियों में आई नरमी का असर देखा गया है। दूसरी तरफ, बढ़ते निवेशक आधार, पूंजी जुटाने की गति और मजबूत बाजार उपस्थिति के कारण एक्सचेंज के परिचालन आंकड़े मजबूत बने रहे हैं। विश्लेषकों के आकलन के अनुसार, 42.9 गुने के पी/ई पर यह वैल्यूएशन कंपनी की स्थापित बाजार स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है, लेकिन यह आय में किसी भी प्रकार की निराशा के लिए बहुत कम गुंजाइश छोड़ता है। सेबी द्वारा ऑप्शंस ट्रेडिंग को लेकर उठाए गए कदम सीधे तौर पर ट्रेडिंग वॉल्यूम और लेनदेन आधारित कमाई को प्रभावित कर रहे हैं।
जोखिम और भविष्य की चुनौतियां
दीर्घकालिक नजरिए से भारतीय पूंजी बाजार में विस्तार के मजबूत अवसर मौजूद हैं, लेकिन कमाई की निरंतरता मुख्य रूप से ट्रेडिंग वॉल्यूम, नियामक स्थिरता और बाजार भागीदारी पर निर्भर करेगी। ढांचागत विकास के अवसरों, अनिश्चित नियमों और मूल्यांकन के संतुलन को देखते हुए न्यूट्रल रेटिंग का रुख देखने को मिल रहा है।
एक्सचेंज के सामने सबसे बड़ा जोखिम लेनदेन के मूल्य और मात्रा में संभावित गिरावट से जुड़ा है, जिससे ट्रांजैक्शन आधारित आय कम हो सकती है और वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से डेरिवेटिव्स और ऑप्शंस कारोबार से मिलने वाले शुल्कों पर अत्यधिक निर्भरता इसे ट्रेडिंग गतिविधियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है। इसके अलावा, तकनीकी बुनियादी ढांचा एक्सचेंज के लिए बेहद अहम है, जिससे सिस्टम फेलियर, साइबर सुरक्षा की समस्याएं या नई तकनीक अपनाने में देरी जैसी चुनौतियां परिचालन को नुकसान पहुंचा सकती हैं। तीसरे पक्षों और मध्यस्थों पर निर्भरता से धोखाधड़ी और ऑपरेशनल जोखिम भी जुड़े हैं, जबकि ट्रेडिंग उत्पादों और बाजार ढांचे से जुड़े विनियामक बदलाव कुल राजस्व और भावी संभावनाओं पर असर डाल सकते हैं।



















