अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में स्विस फ्रैंक ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले फिर से बढ़त हासिल की है। शुक्रवार को 0.8100 के स्तर को पार करने में विफल रहने के बाद USD/CHF विनिमय दर 0.8080 के क्षेत्र से नीचे आ गई है। कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर की आक्रामक तेजी में थोड़ी नरमी देखने को मिली है, क्योंकि निवेशक और वित्तीय विश्लेषक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉरश के बयानों का गहन विश्लेषण कर रहे हैं।
बाजार का ध्यान अब स्विट्जरलैंड से जारी होने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर केंद्रित है, जो स्विस फ्रैंक की भावी दिशा तय करेंगे। आने वाले दिनों में देश के रिटेल बिक्री आंकड़े, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़े जारी किए जाने हैं।
फेड चेयरमैन के बयानों का विदेशी मुद्रा बाजार पर असर
शुक्रवार को फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉरश के वक्तव्य ने वैश्विक बाजारों में हलचल पैदा कर दी थी। अपने संबोधन में उन्होंने काफी सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक को इस समय मूल्य स्थिरता और महंगाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति को बैंक के 2 प्रतिशत के वार्षिक लक्ष्य तक वापस लाने के लिए नीति निर्माताओं को अभी काफी काम करना बाकी है।
केविन वॉरश के इस सख्त भाषण के तुरंत बाद अमेरिकी डॉलर में चौतरफा मजबूती दर्ज की गई थी। हालांकि, नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में निवेशकों द्वारा इन टिप्पणियों का पुनर्मूल्यांकन किए जाने के कारण डॉलर अपनी शुरुआती बढ़त को गंवाता हुआ दिख रहा है।
विश्लेषकों का नजरिया और अनिश्चितता का माहौल
कॉमर्ज़बैंक की विश्लेषक थू लान गुयेन के अनुसार, जैक्सन होल कार्यक्रम में केविन वॉरश की टिप्पणियों ने बाजार की धारणा को बदला है। अब अगले महीने फेड द्वारा ब्याज दरों में बदलाव किए जाने की संभावना को पहले से कहीं अधिक माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि यह कोई तय सौदा नहीं है और कारोबारियों को डॉलर की इस तेजी में जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए।
थू लान गुयेन का मानना है कि केंद्रीय बैंक की पिछली बैठक के बाद से व्यापक आर्थिक पृष्ठभूमि में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आया है। आने वाले समय में जारी होने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और ईरान के साथ पैदा हुए भू-राजनीतिक हालात इस स्थिति को बदल सकते हैं। इन वैश्विक जोखिमों को देखते हुए निकट भविष्य में अमेरिकी डॉलर की मजबूती को लेकर सतर्क रुख अपनाना ही समझदारी होगी।
स्विट्जरलैंड की अर्थव्यवस्था और स्विस फ्रैंक की ताकत
यूरोपीय महाद्वीप में नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के मामले में स्विट्जरलैंड नौवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। प्रति व्यक्ति GDP के पैमाने पर, जो औसत जीवन स्तर को मापने का एक व्यापक तरीका है, स्विट्जरलैंड दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है। जीवन स्तर, मानव विकास सूचकांक, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और नवाचार के वैश्विक मापदंडों में यह देश लगातार शीर्ष पायदानों पर बना रहता है।
स्विट्जरलैंड एक खुली और मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था है, जो मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र पर आधारित है। देश का निर्यात क्षेत्र बेहद मजबूत है, और पड़ोसी यूरोपीय संघ (EU) इसका सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। घड़ियों के निर्माण और निर्यात में स्विट्जरलैंड दुनिया भर में अग्रणी है। इसके अलावा, खाद्य उत्पाद, रसायन और फार्मास्युटिकल उद्योगों की कई प्रमुख वैश्विक कंपनियां यहां स्थित हैं। अपने यूरोपीय पड़ोसियों की तुलना में काफी कम कॉर्पोरेट और आय कर दरों के कारण इसे एक अंतरराष्ट्रीय टैक्स हेवन भी माना जाता है।
विदेशी निवेश और मुद्रा का प्रदर्शन
एक उच्च आय वाला देश होने के कारण, हाल के दशकों में स्विट्जरलैंड की जीडीपी वृद्धि दर स्वाभाविक रूप से थोड़ी धीमी रही है। इसके बावजूद, देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता, उच्च शिक्षा स्तर, विभिन्न उद्योगों में अग्रणी कंपनियां और अनुकूल कर संरचना इसे विदेशी निवेशकों का पसंदीदा स्थान बनाती हैं।
इन्हीं कारणों से स्विस फ्रैंक (CHF) को ऐतिहासिक रूप से अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मजबूती मिली है। आमतौर पर, उच्च विकास दर, कम बेरोजगारी और स्थिर कीमतों पर आधारित स्विस अर्थव्यवस्था का बेहतर प्रदर्शन स्विस फ्रैंक को मजबूत करता है। इसके विपरीत, यदि आर्थिक आंकड़े सुस्ती के संकेत देते हैं, तो स्विस फ्रैंक के मूल्य में गिरावट देखने को मिलती है।
कमोडिटी बाजार, सोना और कच्चे तेल से संबंध
स्विट्जरलैंड कोई कमोडिटी निर्यातक देश नहीं है, इसलिए कच्चे तेल या धातुओं की कीमतें स्विस फ्रैंक की विनिमय दर को सीधे तौर पर प्रभावित नहीं करती हैं। हालांकि, सोने और तेल की कीमतों के साथ इसका एक खास संबंध देखा गया है।
सुरक्षित निवेश विकल्प (सेफ-हेवन) के रूप में स्विस फ्रैंक और सोने का आचरण काफी हद तक एक जैसा रहता है। ऐतिहासिक रूप से स्विस फ्रैंक को सोने का समर्थन प्राप्त रहा है, इसलिए दोनों संपत्तियों की कीमतें अक्सर एक ही दिशा में आगे बढ़ती हैं। दूसरी तरफ, स्विस नेशनल बैंक (SNB) के एक अध्ययन से पता चलता है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का स्विस फ्रैंक के मूल्यांकन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, क्योंकि स्विट्जरलैंड ईंधन का शुद्ध आयातकर्ता देश है।
वैश्विक मुद्रा बाजार और अन्य परिसंपत्तियों की स्थिति
स्विस फ्रैंक के अलावा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों में भी हलचल देखी जा रही है
- GBP/USD: नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत में ब्रिटिश पाउंड डॉलर के मुकाबले संभलकर 1.3550 के स्तर का परीक्षण कर रहा है। शुक्रवार को आई बड़ी गिरावट के बाद पाउंड को डॉलर की कमजोरी से सहारा मिला है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण तेजी सीमित है।
- EUR/USD: यूरोपीय कारोबारी सत्र में यूरो मजबूत होकर 1.1600 के करीब पहुंच गया है। फेड चेयरमैन के बयान के बावजूद डॉलर की सुस्ती से यूरो को बल मिला है। बाजार अब जर्मनी से आने वाले शुरुआती उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहा है।
- गोल्ड (सोना): अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,400 डॉलर के निचले स्तर से उबरकर 4,450 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। डॉलर में नरमी से सोने को समर्थन मिला है, लेकिन अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना के कारण इसमें सीमित बढ़ोतरी की ही गुंजाइश दिख रही है।
- डॉगकॉइन (DOGE): क्रिप्टो बाजार में डॉगकॉइन पिछले हफ्ते 12 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के बाद 0.081 डॉलर के प्रमुख सपोर्ट स्तर के पास बना हुआ है। ऑन-चेन डेटा से बड़े निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली के संकेत मिल रहे हैं, जिससे इसके अल्पकालिक दृष्टिकोण में अनिश्चितता बनी हुई है।
- डीजल क्रैक स्प्रेड: ऊर्जा बाजार में अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड (WTI कच्चे तेल के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल वायदा का प्रीमियम) इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है, जिसने 102.00 डॉलर से अधिक का रिकॉर्ड स्तर छुआ है।



















