अंबाला में इन दिनों डेंगू का प्रकोप बढ़ने के साथ ही लोगों की चिंताएं भी काफी बढ़ गई हैं। डेंगू का नाम जेहन में आते ही सबसे पहले प्लेटलेट्स गिरने का डर सताने लगता है। जैसे ही किसी व्यक्ति को तेज बुखार के साथ प्लेटलेट्स में कमी महसूस होती है, मरीज और उसके परिजन घबराहट में कई तरह के घरेलू उपाय और महंगे फल तलाशने लगते हैं। इस दौड़भाग में कीवी को सबसे बड़ा जादुई इलाज मान लिया जाता है। हालांकि, आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए केवल कीवी पर निर्भर रहना पूरी तरह सही नहीं है।
आयुर्वेदिक ओपीडी में पहुंच रहे हैं मरीज
अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल की आयुर्वेदिक ओपीडी में इन दिनों बुखार और प्लेटलेट्स से जुड़ी शिकायतें लेकर काफी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा के अनुसार, डेंगू के संक्रमण के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी और वायरल संक्रमण दोनों ही बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेंगू के संक्रमण से प्लेटलेट्स में गिरावट आना आम बात है, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर बार प्लेटलेट्स घटने के पीछे केवल डेंगू ही वजह हो। शरीर में पनपने वाले अन्य प्रकार के संक्रमण भी प्लेटलेट्स को प्रभावित कर सकते हैं।
इम्युनिटी और आराम पर देना होगा जोर
डॉ. जितेंद्र वर्मा का कहना है कि बीमारी की चपेट में आने पर मरीज को अपना पूरा ध्यान सिर्फ प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने पर ही केंद्रित नहीं रखना चाहिए। इसके साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाना भी उतना ही आवश्यक होता है। इसके लिए मरीज को पर्याप्त आराम करना चाहिए, साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए और खान-पान पूरी तरह संतुलित होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि बुखार या डेंगू के कोई भी लक्षण दिखने पर कभी भी अपनी मर्जी से अंग्रेजी या आयुर्वेदिक दवाइयां नहीं खानी चाहिए। हमेशा किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख में ही उपचार कराना चाहिए। आयुर्वेद में त्रिभुवन कीर्ति रस जैसी असरदार औषधियों का जिक्र मिलता है, जिनका उपयोग बुखार की स्थिति में डॉक्टर की सलाह से किया जाता है, लेकिन इनका सेवन कभी भी स्व-चिकित्सा के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए।
हल्का और पौष्टिक आहार है जरूरी
पारंपरिक रूप से स्वास्थ्य के लिए तुलसी के पत्ते और काली मिर्च के इस्तेमाल को काफी गुणकारी माना गया है। डॉ. वर्मा ने सलाह दी है कि बीमारी के दौरान मरीज को हमेशा हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन ही परोसा जाना चाहिए। इसके अलावा शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन बेहद जरूरी है। फलों के मामले में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई जरूरतमंद व्यक्ति महंगे फल खरीदने में असमर्थ है, तो वह अन्य सस्ते और पौष्टिक विकल्पों के जरिए भी अपने शरीर को आवश्यक पोषण दे सकता है।
सस्ते और पौष्टिक विकल्पों का इस्तेमाल
महंगे फलों की बजाय आसानी से मिलने वाले पौष्टिक आहार भी बीमारी से उबरने में उतनी ही मदद करते हैं। डॉ. वर्मा ने बताया कि काले चने का सूप, हरी सब्जियों का सूप और अन्य प्रकार के पौष्टिक तरल आहार को मरीज की दैनिक डाइट का अहम हिस्सा बनाया जा सकता है। अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल की आयुर्वेदिक ओपीडी में इन दिनों प्लेटलेट्स और बुखार की समस्या से जूझते हुए रोजाना करीब 4 से 5 मरीज आ रहे हैं। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के कारण डेंगू का खतरा काफी बढ़ गया है, जिसे देखते हुए डॉक्टरों ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
मच्छरों की रोकथाम और साफ-सफाई
डॉ. जितेंद्र वर्मा ने जोर देकर कहा कि डेंगू से सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी और महत्वपूर्ण उपाय मच्छरों की रोकथाम और साफ-सफाई है। लोगों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके घर या आसपास किसी भी जगह पर पानी जमा न होने पाए। घर के आसपास रखे पुराने टायर, गमले, कूलर और ऐसी तमाम जगहों की नियमित रूप से सफाई करनी चाहिए जहां बारिश या इस्तेमाल का पानी इकट्ठा हो सकता है। यदि आसपास पानी जमा नहीं होगा तो मच्छरों का पनपना रुकेगा और डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकेगा।



















