अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान संबंधी बयानों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा हुई, जिसका सीधा नकारात्मक असर घरेलू निवेशकों के भरोसे पर पड़ा। बुधवार का पूरा सत्र बिकवाली के दबाव में रहा और बाजार के सभी प्रमुख सेक्टर भारी गिरावट के साथ बंद हुए।
बाजार का हाल और सूचकांकों में गिरावट
बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,677.12 अंक यानी 2.15 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 76,503.60 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह, एनएसई का निफ्टी 50 भी 516.65 अंक यानी 2.12 फीसदी लुढ़ककर 23,882.05 पर समाप्त हुआ। यह गिरावट हालिया समय की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावटों में से एक मानी जा रही है। बाजार की इस दयनीय स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सेंसेक्स में शामिल सभी 30 की 30 कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए।
निवेशकों की संपत्ति में भारी सेंध
बाजार में आई इस सुनामी ने निवेशकों की कुल संपत्ति को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया। बीएसई पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन मात्र एक कारोबारी दिन में 8.96 लाख करोड़ रुपये घटकर 4,71,23,612 करोड़ रुपये पर आ गया। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि चंद घंटों की बिकवाली में निवेशकों की मेहनत की कितनी बड़ी रकम बाजार से लुप्त हो गई।
ब्रेंट क्रूड में उछाल की बड़ी भूमिका
बाजार की इस मंदी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आया उछाल रहा। ब्रेंट क्रूड 6.18 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 78.74 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के कारण निवेशकों को चिंता है कि इससे कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है। चूंकि भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के आयात बिल और महंगाई पर पड़ता है। इस डर ने निवेशकों को जोखिम भरे निवेश से बचने के लिए मजबूर कर दिया।
सेक्टोरल इंडेक्स पर व्यापक मार
गिरावट केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बाजार के हर कोने में बिकवाली हावी रही। सर्विसेज इंडेक्स में सबसे अधिक 3.21 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा पीएसयू बैंक 2.76 फीसदी, एफएमसीजी 2.54 फीसदी, फाइनेंशियल सर्विसेज 2.49 फीसदी और बैंकेक्स 2.46 फीसदी टूटकर बंद हुए। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी इस बिकवाली से नहीं बच सके, जिनमें क्रमशः 2.14 फीसदी और 1.61 फीसदी की कमी देखी गई।
दिग्गज शेयरों का बुरा हाल
सेंसेक्स की बड़ी कंपनियों में सबसे ज्यादा दबाव इंटरग्लोब एविएशन, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में दिखा। बीएसई पर कुल 3,211 शेयरों में गिरावट रही, जबकि महज 1,070 शेयरों में ही बढ़त देखने को मिली। वहीं, 173 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। बाजार विशेषज्ञों का संकेत है कि आने वाले समय में बाजार की चाल पूरी तरह से मध्य पूर्व के घटनाक्रम और वैश्विक निवेशकों के रुख पर टिकी रहेगी। यदि तनाव का माहौल और गहराता है, तो शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर और लंबा खिंच सकता है।











