बड़े स्तर पर टिका बाजार
बीते हफ्ते भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को राहत देने वाला प्रदर्शन किया. निफ्टी ने 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुए 24,013.10 पर बंद होकर बाजार में भरोसे का संकेत दिया. सेंसेक्स ने भी 1,274.95 अंकों की जोरदार छलांग लगाई और 76,802.90 के स्तर पर सत्र समाप्त किया.
मिडकैप और स्मॉलकैप ने भी नहीं छोड़ा कदम
15 से 19 जून के कारोबारी सप्ताह में सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, मझोले और छोटे शेयरों ने भी पूरे दम के साथ तेजी दर्ज की. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,749.20 अंक यानी 2.88 प्रतिशत की बढ़त लेकर 62,517.30 पर पहुंचा. निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने 587 अंक यानी 3.23 प्रतिशत की तेजी दिखाई और 18,784.45 पर बंद हुआ.
सेक्टोरल तस्वीर: डिफेंस शीर्ष पर, IT अकेला पिछड़ा
सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी इंडिया डिफेंस ने 6.58 प्रतिशत की तेजी के साथ बाजी मारी. निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 6.44 प्रतिशत चढ़ा, निफ्टी रियल्टी ने 5.50 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की, निफ्टी कंजप्शन 3.50 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 3.32 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 2.98 प्रतिशत और निफ्टी PSE 2.84 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुए. इस पूरे सप्ताह में अकेला निफ्टी IT ही लाल निशान पर रहा.
अगले हफ्ते किन तीन बातों पर टिकी हैं नजरें?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार आने वाले हफ्ते में तीन बड़े फैक्टर बाजार की चाल तय करेंगे. पहला है कच्चे तेल की कीमतों का रुख, दूसरा अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की स्थिति, और तीसरा घरेलू आर्थिक आंकड़ों की कड़ी. इनमें से किसी भी एक फैक्टर से बड़ी खबर निकली तो बाजार की दिशा पलट सकती है.
कच्चा तेल और हॉर्मुज स्ट्रेट का बढ़ता तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच MOU साइन होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें नरम पड़ी हैं और यह 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं. लेकिन तस्वीर अभी भी धुंधली है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल के लेबनान पर हमले जारी रहने की वजह से ईरान ने एक बार फिर हॉर्मुज स्ट्रेट बंद करने का ऐलान किया है. इससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर नई अनिश्चितता पैदा हो गई है. विश्लेषकों का कहना है कि शांति वार्ता सफल होने पर बाजार में खरीदारी का एक और दौर आ सकता है, लेकिन अगर इसमें पेंच फंसा तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है.
22, 23 और 26 जून को आएंगे अहम घरेलू आंकड़े
घरेलू मोर्चे पर भी अगले हफ्ते निवेशकों के लिए जरूरी डेटा की कतार लगी है. वाणिज्य मंत्रालय 22 जून को इन्फ्रास्ट्रक्चर आउटपुट डेटा जारी करेगा. 23 जून को PMI के आंकड़े आएंगे, जो देश के उत्पादन और सेवा क्षेत्र की सेहत बताएंगे. इसके बाद 26 जून को विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े सामने आएंगे. ये तीनों डेटा पॉइंट्स बाजार की कारोबारी धारणा पर सीधा असर डाल सकते हैं.













