चांदी के बाजार में दो दिनों की लगातार तेजी के बाद सुधार देखने को मिल रहा है, जिसके बल पर XAG/USD ने 59.00 डॉलर के स्तर को फिर से हासिल कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह सफेद धातु फिलहाल 59.17 डॉलर के आसपास कारोबार कर रही है, जो अपने पिछले बंद भाव 57.86 डॉलर के मुकाबले 2.27 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है। आठ दिनों के लंबे कंसोलिडेशन फेज के बाद चांदी में यह हलचल देखने को मिली है। हालांकि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस हालिया तेजी के बावजूद चांदी अभी भी व्यापक डाउनट्रेंड मार्केट स्ट्रक्चर के दायरे में बनी हुई है, जिससे आगामी रेजिस्टेंस लेवल बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं।
तकनीकी संकेतक और प्रमुख रेजिस्टेंस व सपोर्ट स्तर
तकनीकी संकेतकों के आधार पर चांदी में स्थिरता के शुरुआती संकेत मिल रहे हैं। डेली टाइमफ्रेम पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 47 के स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें पिछले चार कारोबारी सत्रों से लगातार सुधार देखा जा रहा है। हालांकि 50 से नीचे RSI का होना सामान्यतः बियरिश माना जाता है, लेकिन इसका ऊपर की ओर बढ़ना बिकवाली का दबाव कम होने और खरीदारों की वापसी का संकेत देता है। इसके साथ ही मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) में बुलिश क्रॉसओवर दिखाई दे रहा है, जहां MACD लाइन -1.66 पर पहुंचकर अपने -2.21 के सिग्नल लाइन से ऊपर निकल गई है और हिस्टोग्राम 0.55 का सकारात्मक मान दिखा रहा है। वहीं एवरेज ट्रू रेंज (ATR) दैनिक उतार-चढ़ाव 1.75 डॉलर बता रहा है, जो स्टॉप-लॉस प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
तेजी को बरकरार रखने के लिए चांदी को 60.00 डॉलर के मनोवैज्ञानिक रेजिस्टेंस स्तर को पार करना होगा। यदि यह 60.00 डॉलर के ऊपर टिकने में कामयाब रहती है, तो 60.12 डॉलर का R1 रेजिस्टेंस और उसके बाद 22 जुलाई का 60.94 डॉलर का उच्चतम स्तर खुल जाएगा। इसके बाद 61.00 डॉलर के स्तर के साथ-साथ R2 रेजिस्टेंस 61.07 डॉलर और 20 दिनों का अपर बॉलिंजर बैंड 61.81 डॉलर चुनौती के रूप में सामने आएगा। दूसरी तरफ, यदि बिकवाली का दबाव दोबारा बनता है, तो 28 जुलाई के निचले स्तर 56.64 डॉलर और S1 सपोर्ट स्तर 57.67 डॉलर के नीचे जाने पर चांदी में गिरावट आ सकती है, जिससे यह S2 सपोर्ट 56.17 डॉलर, 20-दिनों के सपोर्ट 55.01 डॉलर और सालाना निचले स्तर 54.77 डॉलर तक फिसल सकती है।
लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो 52 हफ्तों के दौरान चांदी का दायरा 36.35 डॉलर से 121.30 डॉलर के बीच रहा है। वर्तमान में चांदी 50 दिनों के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA50) 63.68 डॉलर और 200 दिनों के EMA200 63.87 डॉलर के नीचे बनी हुई है। इसके साथ ही 50 दिनों का सिंपल मूविंग एवरेज (SMA50) 64.63 डॉलर और 200 दिनों का SMA200 69.86 डॉलर भी ऊपर स्थित है, जो डेथ क्रॉस की स्थिति और दीर्घकालिक दबाव को दर्शाता है। हालांकि 20 दिनों के औसत के मुकाबले 16.52 गुना अधिक ट्रेडिंग वॉल्यूम इस बात का प्रमाण है कि 58.62 डॉलर के पिवट स्तर के पास संस्थागत निवेशकों की रुचि काफी बढ़ गई है।
मैक्रोइकोनॉमिक कारण और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी
चांदी में आई इस तेजी का मुख्य कारण वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर (USD) की व्यापक कमजोरी है। कमजोर डॉलर अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए डॉलर में आंकी जाने वाली कमोडिटीज को सस्ता बनाता है, जिससे मांग को समर्थन मिलता है।
अमेरिका से जारी मैक्रोइकोनॉमिक आंकड़ों के अनुसार, दूसरी तिमाही की प्रारंभिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 1.5 प्रतिशत दर्ज की गई, जो बाजार के 2.1 प्रतिशत के अनुमान से कम रही। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व (फेड) की बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने का विभाजित फैसला सामने आने के बाद सितंबर में ब्याज दरों में कटौती को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
इस मैक्रोइकोनॉमिक घटनाक्रम का असर विभिन्न करेंसी पेयर्स और कीमती धातुओं पर स्पष्ट रूप से देखा गया
- सोना (XAU/USD): अमेरिकी डॉलर में बिकवाली और कमजोर अमेरिकी GDP आंकड़ों के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से सोना 4,100 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया।
- EUR/USD: यूरोपीय मुद्रा अमेरिकी सत्र के दौरान 1.1530 के पास छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इसे जापानी येन (JPY) में बैंक ऑफ जापान के हस्तक्षेप की आशंका और कमजोर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से सहारा मिला।
- GBP/USD: ब्रिटिश पाउंड 1.3450 के पार निकलकर कई हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंच गया। बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने 6-3 के बहुमत से ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत पर बरकरार रखा, जबकि 3 सदस्यों ने दरें बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया था।
निवेश और औद्योगिक संपत्ति के रूप में चांदी की भूमिका
वित्तीय बाजारों में चांदी की दोहरी भूमिका है। यह न केवल मूल्य के संचय (स्टोर ऑफ वैल्यू) का जरिया है, बल्कि एक महत्वपूर्ण औद्योगिक धातु भी है। ऐतिहासिक रूप से मुद्रा और विनिमय के माध्यम के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली चांदी का उपयोग निवेशक पोर्टफोलियो में विविधता लाने और उच्च मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) से बचाव के लिए करते हैं।
निवेशक चांदी में भौतिक रूप से सिक्कों और छड़ों (बार्स) के जरिए या फिर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) जैसे वित्तीय साधनों के माध्यम से निवेश करते हैं। बिना ब्याज या यील्ड वाली संपत्ति होने के कारण, कम ब्याज दरों के माहौल में चांदी की आकर्षण क्षमता बढ़ जाती है। इसके अलावा, खनन आपूर्ति और रीसाइक्लिंग दरें भी इसकी उपलब्धता को प्रभावित करती हैं।
औद्योगिक दृष्टि से देखें तो चांदी सभी धातुओं में सबसे अधिक विद्युत चालकता (इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी) रखती है, जो तांबे और सोने से भी अधिक है। यही कारण है कि सोलर एनर्जी (सौर ऊर्जा पैनल) और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च विकास वाले क्षेत्रों में इसकी भारी मांग रहती है। अमेरिका और चीन के औद्योगिक क्षेत्र चांदी की वैश्विक खपत को संचालित करते हैं, जबकि भारत में आभूषणों की उपभोक्ता मांग भौतिक बाजार के मूल्य निर्धारण में बड़ी भूमिका निभाती है।
गोल्ड टू सिल्वर रेशियो और सापेक्ष मूल्यांकन
कमोडिटी ट्रेडिंग में चांदी की कीमतें अक्सर सोने के रुख का अनुसरण करती हैं। जब सोने की कीमतों में तेजी आती है, तो चांदी भी उसी दिशा में आगे बढ़ती है। कीमती धातुओं के सापेक्ष मूल्यांकन को समझने के लिए व्यापारी 'गोल्ड टू सिल्वर रेशियो' (Gold/Silver Ratio) का उपयोग करते हैं। यह रेशियो दर्शाता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी।
जब यह अनुपात उच्च स्तर पर होता है, तो माना जाता है कि सोने की तुलना में चांदी का मूल्यांकन कम (अंडरवैल्यूड) है या चांदी की तुलना में सोना महंगा है। ऐसे में वैल्यू निवेशक चांदी में खरीदारी का अवसर देखते हैं। इसके विपरीत, कम अनुपात यह संकेत देता है कि सोने का मूल्य चांदी के मुकाबले आकर्षक हो सकता है।



















