पश्चिम बंगाल की सत्ता में बदलाव आने के बाद से राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और माहौल में तेजी से सुधार देखा जा रहा है। स्थानीय नागरिक लंबे समय से अवैध वसूली और सिंडिकेट संस्कृति के साये में जीने को मजबूर थे। हालांकि अतीत में भी इस तरह की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन पिछली सरकारों का रुख इन मामलों में काफी नरम और ढीला रहा था। अब मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस जबरन वसूली के नेटवर्क को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने का ठोस फैसला लिया है।
सिंडिकेट राज पर लगाम कसने की तैयारी
दशकों से पनपे इस सिंडिकेट और टोलाबाजी के तंत्र ने आम लोगों और कारोबारियों का जीना मुहाल कर रखा था। विकास कार्यों से लेकर रोजमर्रा के व्यवसायों तक में इन वसूलीबाजों का दखल आम बात हो चुकी थी। अब राज्य सरकार इस समस्या से स्थायी रूप से निजात दिलाने के लिए एक विशेष कानूनी फ्रेमवर्क तैयार कर रही है। इसके तहत गैरकानूनी तरीके से पैसे वसूलने वालों के खिलाफ सीधा और कड़ा एक्शन लिया जाएगा, जिससे किसी भी तरह की ढिलाई की गुंजाइश न बचे।
बदलती प्रशासनिक व्यवस्था और नीतियां
राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही कई बड़े प्रशासनिक और नीतिगत बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। पश्चिम बंगाल में पुरानी पेंशन योजना को समाप्त कर एनपीएस लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके अलावा महिलाओं के सशक्तिकरण और सुविधा के लिए मुफ्त सरकारी बस सेवा जैसी जनहित योजनाएं भी शुरू की जा चुकी हैं। राज्य में विकास और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए डीआरडीओ का नया मिसाइल टेस्टिंग सेंटर बनाए जाने की योजना पर भी काम चल रहा है, जिससे चांदीपुर केंद्र का दबाव कम होगा।
वैचारिक और सांस्कृतिक बदलाव की ओर कदम
प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ राज्य में वैचारिक प्रतीकों को बदलने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर वैचारिक पहचान से जुड़ी सड़कों के नाम बदलने की तैयारी चल रही है। सरकार का यह पूरा एजेंडा राज्य में सुशासन स्थापित करने और जनता को भयमुक्त माहौल देने पर केंद्रित है। नया कानून आने के बाद वसूली करने वाले आपराधिक तत्वों पर पुलिस और प्रशासन सीधे तौर पर शिकंजा कस सकेगा।



















