देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है क्योंकि मानसून अब अपने आखिरी दौर में प्रवेश कर चुका है। सितंबर के शुरुआती दिनों में बारिश का औसत कम रहने के कारण कुल वर्षा के आंकड़ों में थोड़ी कमी दर्ज की गई है। इस पूरे सीजन के दौरान देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में सामान्य से कम पानी बरसा है, जबकि उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में स्थिति काफी हद तक बेहतर रही है और ठीक-ठाक बारिश देखने को मिली है।
सक्रिय मौसम प्रणालियों का असर
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एक साथ दो स्थानीय मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा मंडरा रहा है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के तमाम राज्यों में झमाझम बारिश होने के पूरे आसार जताए गए हैं। इस दौरान हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे आंधी-तूफान जैसी स्थिति बन सकती है।
तूफान और बारिश के मुख्य कारण
मौसम विभाग के मुताबिक, इस अचानक बदलाव के पीछे बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र और हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय हुआ पश्चिमी विक्षोभ मुख्य वजह है। इन दोनों प्रणालियों के मेल से उत्तर भारत से लेकर पूर्व भारत तक बारिश का दायरा फैल गया है। इसके अलावा, अरब सागर में भी एक नया सिस्टम आकार ले रहा है, जिसके प्रभाव से गुजरात से लेकर महाराष्ट्र और गोवा के तटीय इलाकों में भारी बारिश का दौर लगातार जारी है।
मानसून की वापसी की घोषणा
इन तमाम मौसमी हलचलों के बीच मौसम विभाग ने मानसून की देश से विदाई या वापसी की संभावित तारीख की भी आधिकारिक घोषणा कर दी है। हालांकि बारिश और आंधी का यह नया दौर लोगों को गर्मी और उमस से कुछ राहत जरूर दिलाएगा, लेकिन साथ ही कई जगहों पर एहतियात बरतने की सलाह भी दी गई है क्योंकि तेज रफ्तार हवाएं जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं।
















