वैश्विक वित्तीय बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, क्योंकि लंबे समय से चल रही करेंसी डिवैल्यूएशन (मुद्रा के अवमूल्यन) की धारणा को करारा झटका लगा है। सोसिएट जेनेराल के विश्लेषकों ने कीमती धातुओं के बाजार में आए इस बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हुए घोषणा की है कि सोने में गिरावट के साथ ही 'डिबेसमेंट ट्रेड' (मुद्रा के कमजोर होने से होने वाला मुनाफा) अब पूरी तरह से समाप्त हो गया है। यह निष्कर्ष सोने की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद सामने आया है, जहां इस साल की शुरुआत से अब तक पीली धातु में 20% की बड़ी गिरावट आ चुकी है। केवल चालू महीने के दौरान ही सोने की कीमतों में 11% से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस तेज गिरावट ने उस पुरानी धारणा को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है, जिसके तहत सोने को लगातार कमजोर होती कागजी मुद्रा के खिलाफ एक अचूक सुरक्षा कवच माना जाता था।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कमोडिटी बाजार में हाहाकार
जून महीने के दौरान वैश्विक बाजारों का मिजाज मजबूत अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड कर्व में गिरावट और कच्चे तेल तथा सोने की कीमतों में एक साथ आई भारी गिरावट से तय हुआ है। हाल ही में समाप्त हुई फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के बाद सोने के बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। हालांकि, बाद में अमेरिकी रियल यील्ड में आई गिरावट से बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली और सोने की कीमतें कुछ हद तक संभलने में कामयाब रहीं, लेकिन बाजार में अभी भी अमेरिकी डॉलर का दबदबा कायम है। डॉलर की इस मजबूती के कारण सोने और ब्रेंट क्रूड ऑयल दोनों की कीमतें घटकर युद्ध-पूर्व के स्तर पर आ गई हैं। इस दौरान सोने की कीमतें $4,000 प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से भी नीचे चली गई हैं।
भू-राजनीतिक तनाव के बीच करेंसी मार्केट का हाल
विदेशी मुद्रा बाजार यानी फॉरेक्स मार्केट में भी काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान GBP/USD जोड़ी 1.3200 के स्तर के आसपास स्थिर बनी रही, जबकि गुरुवार को यह सकारात्मक बढ़त के साथ बंद हुई थी। इस स्थिरता के बावजूद, निवेशकों के बीच अभी भी सावधानी का माहौल है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तकनीकी शेयरों में जारी भारी उतार-चढ़ाव के कारण ब्रिटिश पाउंड को कोई मजबूत बढ़त नहीं मिल पा रही है और निवेशक लगातार इन घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं।
दूसरी ओर, यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान EUR/USD जोड़ी में कुछ तेजी देखी गई और यह 1.1400 के स्तर के आसपास पहुंच गई। अमेरिकी डॉलर (USD) को मिल रही कमजोर मांग के कारण यूरो को मामूली बढ़त हासिल करने में मदद मिली है। हालांकि, मध्य पूर्व से आ रही खबरों और वैश्विक टेक शेयरों की हलचल को देखते हुए निवेशक बेहद सतर्क हैं, जिससे इसकी बढ़त सीमित बनी हुई है।
फेड की नीतियों को लेकर बढ़ी चिंता
सोने की कीमतें फिलहाल $4,000 के ठीक ऊपर एक बेहद सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं। हालांकि गुरुवार को पीली धातु में मामूली बढ़त देखी गई थी, लेकिन फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत रुख की आशंकाओं के कारण इसमें कोई बड़ी तेजी देखने को नहीं मिल रही है। केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाए जाने की चिंता से निवेशक गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे कि सोने से दूरी बना रहे हैं, जिससे इस पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
क्रिप्टो बाजार में भारी लिक्विडेशन का दौर
बाजार की इस मंदी का असर क्रिप्टो बाजार पर भी साफ तौर पर देखा जा रहा है, जहां रिपल (XRP) पर भारी बिकवाली का दबाव बना हुआ है। इस हफ्ते करीब 8% से ज्यादा की गिरावट दर्ज करने के बाद यह डिजिटल एसेट $1 के मनोवैज्ञानिक सपोर्ट लेवल के बेहद करीब कारोबार कर रहा है। डेटा एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म कॉइनग्लास के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में डेरिवेटिव्स बाजार में भारी उथल-पुथल मची है, जिसके चलते XRP के 97% से अधिक लॉन्ग पोजीशन्स का लिक्विडेशन (समापन) हो गया है। डेरिवेटिव्स बाजार के ये आंकड़े साफ इशारा करते हैं कि फिलहाल इस क्रिप्टोकरेंसी पर मंदी के बादल पूरी तरह छाए हुए हैं।
फेडरल रिजर्व में नए युग की शुरुआत
वित्तीय बाजारों में मची इस हलचल के पीछे फेडरल रिजर्व में हुआ एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव भी है। फेड ने लगातार चौथी बैठक में अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50% से 3.75% की सीमा पर बरकरार रखा है, जिसकी बाजार को पहले से ही उम्मीद थी। लेकिन इस बैठक का असली आकर्षण इसके बाद आयोजित हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस थी। यह बैठक नए फेड चेयर के रूप में केविन वॉर्श की पहली आधिकारिक बैठक थी।
अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में नए फेड चेयर ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने उन नीतिगत दिशानिर्देशों और बाजार की उम्मीदों को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिनके सहारे निवेशक पिछले एक दशक से बाजार की चाल का अनुमान लगा रहे थे। केविन वॉर्श ने फेड की संचार शैली और नीतिगत ढांचे में बड़े बदलावों का संकेत देकर यह साफ कर दिया है कि अब केंद्रीय बैंक के पुराने ढर्रे पर चलने के दिन बीत चुके हैं। उनके इस कड़े रुख ने वैश्विक इक्विटी, बॉन्ड और कमोडिटी बाजारों में अनिश्चितता का एक नया दौर शुरू कर दिया है।













