दिल्ली के साउथ कैंपस इलाके में स्थित सत्य निकेतन इमारत दुर्घटना मामले में कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने बुधवार सुबह कार्रवाई करते हुए पीजी का संचालन करने वाले सुधांशु को गिरफ्तार कर लिया। इस दुखद हादसे के बाद पुलिस की यह चौथी आधिकारिक गिरफ्तारी है। पुलिस की टीम अब घटना से जुड़े अन्य पहलुओं और फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।
लीज समझौता और किराए का खुलासा
पुलिस रिमांड के दौरान इमारत मालिक के बेटे महेश ने पूछताछ में कई अहम जानकारियां दीं। महेश ने बताया कि उसने अगस्त 2025 में इस इमारत को सुधांशु और उसके बिजनेस पार्टनर शुभम त्यागी को लीज पर सौंपा था। दोनों साझेदार मिलकर यहां 'होस्टल डेज़' नाम से पीजी हॉस्टल चला रहे थे। इस परिसर के बदले वे हर महीने महेश को 1,05,000 रुपये का किराया चुकाते थे। फिलहाल सुधांशु पुलिस की गिरफ्त में है, जबकि उसका साथी शुभम त्यागी घटना के बाद से लगातार फरार चल रहा है।
बेसमेंट का काम और पूर्व गिरफ्तारियां
जांच अधिकारियों के अनुसार, हादसे से पहले इमारत के बेसमेंट में 10 दिनों से निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान ढांचा ढह गया। इस मामले में पुलिस ने कासगंज से लेबर ठेकेदार को पकड़ा था। इसके अलावा इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता और उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि उनके बेटे महेश को 2 दिन की पुलिस कस्टडी में सौंपा गया है।
जर्जर इमारतों पर एमसीडी की कार्रवाई और नए नियम
हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) भी कड़े एक्शन मोड में आ गया है। प्रशासन ने सत्य निकेतन क्षेत्र में चिन्हित की गई 51 जर्जर इमारतों में से 27 को ढहाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही दिल्ली सरकार पीजी हॉस्टलों को नियमबद्ध करने के लिए गौबा समिति की रिपोर्ट को जल्द लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत राजधानी में चलने वाले हर पीजी का पूरा विवरण एक आधिकारिक पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।



















