अमेरिकी मुद्रा में कमजोरी और फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों को रोकने के संकेतों के बीच मुद्रा बाजार में गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालिया बयानों के बाद बाजार का रुख बदला है और निवेशकों की निगाहें अब श्रम बाजार के नए आंकड़ों पर टिक गई हैं। इन तमाम अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों के बीच विभिन्न करेंसी जोड़ियों और परिसंपत्तियों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व का बदला रुख
फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर की तरफ से नीतिगत दरों में ठहराव की संभावना जताए जाने के बाद वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ गई है। उनके इस नरम रुख के ठीक विपरीत, कुछ समय पहले चेयरमैन केविन वार्श ने अधिक आक्रामक रुख अपनाया था। इन बयानों के बाद सीएमई फेडवाच टूल के आंकड़ों के अनुसार सितंबर महीने में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना घटकर 50.2 प्रतिशत पर आ गई है, जो पिछले दिन 63.2 प्रतिशत के स्तर पर थी। इस बदलाव से डॉलर सूचकांक पर सीधा दबाव पड़ा है।
स्विट्जरलैंड में महंगाई के आंकड़ों में उछाल
ब्रोकर्स ब्रदर ब्रदर्स हैरीमैन की रिपोर्ट के मुताबिक स्विट्जरलैंड में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई सालाना आधार पर बढ़कर 0.8 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा स्विस नेशनल बैंक के 0.6 प्रतिशत के अनुमान से काफी ऊपर है और सितंबर 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। इसके साथ ही मूल मुद्रास्फीति में भी तेजी दर्ज की गई है, जो इस बात का संकेत है कि देश में कीमतों का दबाव लगातार मजबूत हो रहा है।
स्विस फ़्रैंक और यूरोपीय अर्थव्यवस्था की स्थिति
स्विस फ़्रैंक स्विट्जरलैंड की आधिकारिक मुद्रा है और दुनिया की सबसे ज्यादा कारोबार वाली मुद्राओं में शामिल है। हालांकि ऐतिहासिक रूप से इसे यूरो से जोड़ा गया था और बाद में उस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया था, लेकिन स्विस अर्थव्यवस्था की यूरोज़ोन पर भारी निर्भरता के कारण इसकी चाल अक्सर यूरो के साथ जुड़ी रहती है। इसके अलावा अपनी राजनीतिक तटस्थता और स्थिर अर्थव्यवस्था के चलते स्विस फ़्रैंक को एक सुरक्षित निवेश परिसंपत्ति माना जाता है, जिसे बाजार में जोखिम बढ़ने पर निवेशक खरीदना पसंद करते हैं।
केंद्रीय बैंक की नीतियां और व्यापक आर्थिक कारक
स्विस नेशनल बैंक साल में चार बार यानी हर तिमाही में अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है ताकि महंगाई को दो प्रतिशत से नीचे रखा जा सके। जब भी महंगाई दर तय सीमा से ऊपर जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी का विकल्प चुनता है, जिससे आमतौर पर स्विस फ़्रैंक को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, नरम नीतियों या कम ब्याज दरों से मुद्रा कमजोर हो सकती है। इसके साथ ही देश के रोजगार के आंकड़े, आर्थिक विकास और केंद्रीय बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार भी इसके मूल्यांकन में अहम भूमिका निभाते हैं।
अन्य प्रमुख मुद्राओं और बाजारों का हाल
विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य जोड़ियों की बात करें तो एशियाई सत्र के दौरान जापानी येन में मजबूती बनी हुई है, जिससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसके स्तर प्रभावित हो रहे हैं। इसी तरह ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी अपने हालिया ऊंचे स्तरों के आसपास स्थिर कारोबार कर रहा है। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन अस्सी हजार डॉलर के दायरे में अपनी स्थिति बनाए हुए है, जिससे बाजार का जोखिम उठाने का रुझान प्रदर्शित होता है। ऊर्जा बाजार में भी डीजल के मोर्चे पर कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई की तरफ बढ़ रही हैं, जो वैश्विक आपूर्ति और मांग के समीकरणों को दर्शाती हैं।


















