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पशुओं में ब्रूसेलोसिस संक्रमण बढ़ा रहा है खतरा, गर्भपात और बांझपन के साथ इंसानों तक पहुंच सकती है यह बीमारीराजस्थान
4 सित॰ 2026, 10:36 am (17 मिनट पहले)· 2

पशुओं में ब्रूसेलोसिस संक्रमण बढ़ा रहा है खतरा, गर्भपात और बांझपन के साथ इंसानों तक पहुंच सकती है यह बीमारी

पशुओं में फैलने वाली ब्रूसेलोसिस बीमारी उनकी प्रजनन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करती है और यह इंसानों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती है। नए पशु को झुंड में शामिल करने से पहले उसकी जांच कराना और उचित सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है।

पशुपालन और डेयरी व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए गाय, भैंस, भेड़ और बकरी जैसे मवेशियों को खरीदना तथा एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आम बात है। मगर इस प्रक्रिया में बरती गई जरा सी भी लापरवाही एक गंभीर बीमारी को न्योता दे सकती है। ब्रूसेलोसिस नामक यह संक्रमण मवेशियों के लिए तो घातक है ही, साथ ही यह जानवरों से इंसानों तक भी पहुंच सकता है। कई बार संक्रमित मवेशियों में बीमारी के लक्षण साफ तौर पर दिखाई नहीं देते, जिससे किसान अनजाने में उन्हें अपने स्वस्थ पशुओं के बीच ले आते हैं। यही कारण है कि किसी भी नए मवेशी को पुराने झुंड में मिलाने से पहले उसका स्वास्थ्य परीक्षण करवाना बेहद आवश्यक हो जाता है।

मवेशियों में ब्रूसेलोसिस के लक्षण और पहचान

पशु चिकित्सक विनोद चौधरी के अनुसार, इस बीमारी का सबसे बुरा असर पशुओं की प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। संक्रमण फैलने पर मवेशियों में कई तरह की परेशानियां सामने आने लगती हैं। गर्भावस्था के आखिरी महीनों में गर्भपात होना इस समस्या का सबसे मुख्य संकेत माना जाता है। इसके अलावा बांझपन, जेर का समय पर बाहर न आना, और मृत या कमजोर बच्चों का जन्म होना भी इसके लक्षण हैं। संक्रमित मवेशी के दूध के उत्पादन में भी अचानक भारी गिरावट दर्ज की जाती है। नर पशुओं के मामले में उनके अंडकोष में सूजन आने और बांझपन की शिकायत पैदा होने का खतरा रहता है। यदि किसी मवेशी में ऐसे संकेत लगातार नजर आएं, तो खुद उपचार करने के बजाय तुरंत किसी नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क साधना चाहिए।

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इंसानों में कैसे फैलता है ब्रूसेलोसिस संक्रमण?

यह एक ज़ूनोटिक बीमारी है, जिसका अर्थ है कि यह मवेशियों से इंसानों में आसानी से फैल सकती है। इंसानों में इसके संक्रमण के मुख्य कारणों में दूषित डेयरी उत्पादों का सेवन शामिल है, जिसमें संक्रमित पशु का कच्चा या बिना उबला दूध, कच्चा पनीर और अन्य दूषित उत्पाद आते हैं। इसके अलावा, संक्रमित पशु का अधपका मांस खाने से भी यह खतरा बढ़ जाता है। मवेशी के गर्भपात के अवशेष, प्लेसेंटा, खून या अन्य शारीरिक द्रव्यों के सीधे संपर्क में आने से भी यह बीमारी इंसानों को अपनी चपेट में ले सकती है, हालांकि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में इसका फैलना बहुत दुर्लभ है। डेयरी फार्म चलाने वाले लोगों, पशुपालकों, कसाइयों और प्रयोगशालाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को इस संक्रमण का सबसे अधिक जोखिम झेलना पड़ता है।

इंसानों में ब्रूसेलोसिस के लक्षण

इंसानों के शरीर में इस संक्रमण के असर कई हफ्तों या महीनों के बाद दिखाई दे सकते हैं। शुरुआती दौर में यह सामान्य थकान या बुखार जैसा महसूस होता है। बार-बार बुखार आना, खासकर शाम के वक्त शरीर का तापमान बढ़ जाना इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल है। इसके साथ ही अत्यधिक पसीना निकलना, भूख कम लगना, लगातार कमजोरी बने रहना और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। मांसपेशियों, जोड़ों और पीठ में लगातार दर्द रहना भी इस बीमारी का एक बड़ा संकेत है। यदि शुरुआती अवस्था में इसकी अनदेखी की जाए, तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।

लंबे समय तक अनदेखी पड़ सकती है भारी

समय पर सही इलाज न मिलने की स्थिति में यह संक्रमण क्रोनिक रूप धारण कर सकता है। इसकी वजह से मरीज को लंबे समय तक शरीर में तेज दर्द, जोड़ों की सूजन और हमेशा के लिए कमजोरी जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।

बचाव और सावधानियां

पशु चिकित्सक विनोद चौधरी ने इस खतरनाक संक्रमण से निपटने के लिए कुछ जरूरी उपाय सुझाए हैं। नए मवेशी को खरीदते समय उसके स्वास्थ्य और प्रजनन के इतिहास की पूरी जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए। नए पशु को सीधे अपने पुराने झुंड में शामिल करने के बजाय पहले उसकी जांच करवानी चाहिए। मवेशियों का नियत समय-सारणी के अनुसार टीकाकरण अवश्य करवाना चाहिए। संक्रमित या मृत पशु, प्लेसेंटा और अन्य शारीरिक द्रव्यों को संभालते समय हमेशा हाथों में दस्ताने पहनने चाहिए और शरीर के खुले घावों को अच्छी तरह ढककर रखना चाहिए। प्रयोगशाला और डेयरी कर्मियों को जांच के दौरान मास्क, एप्रन और दस्तानों का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा, यदि मवेशियों के बीच रहने वाले किसी व्यक्ति को लगातार बुखार या बदन दर्द की शिकायत रहे, तो डॉक्टर को अपने पशुपालन के पेशे की जानकारी जरूर देनी चाहिए ताकि सही समय पर सटीक जांच हो सके।

सवाल-जवाब

ब्रूसेलोसिस बीमारी किन पशुओं को प्रभावित करती है?
यह संक्रमण मुख्य रूप से गाय, भैंस, भेड़ और बकरी जैसे दुधारू पशुओं में फैलता है।
पशुओं में ब्रूसेलोसिस का सबसे मुख्य लक्षण क्या है?
गर्भावस्था की अंतिम तिमाही में गर्भपात होना इस खतरनाक बीमारी का सबसे प्रमुख लक्षण है।
यह बीमारी इंसानों में कैसे पहुंचती है?
संक्रमित पशु के कच्चे दूध, बिना पाश्चरीकृत डेयरी उत्पादों, अधपके मांस या संक्रमित शारीरिक द्रव्यों के सीधे संपर्क में आने से यह इंसानों में फैलती है।
इंसानों में ब्रूसेलोसिस के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
शुरुआत में बार-बार बुखार आना, अत्यधिक पसीना निकलना, कमजोरी, सिरदर्द और जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द महसूस होता है।
पशुपालकों को नया पशु खरीदने पर क्या सावधानी रखनी चाहिए?
नया पशु खरीदने से पहले उसके स्वास्थ्य और प्रजनन इतिहास की जांच कराएं और उसे सीधे पुराने झुंड में मिलाने के बजाय क्वारंटाइन करें।
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