अगस्त के आखिरी हफ्तों के दौरान, तुर्की के केंद्रीय बैंक ने वित्तीय बाजारों में लिक्विडिटी को सामान्य स्तर पर लाने की प्रक्रिया शुरू की और साप्ताहिक रेपो नीलामियों की शुरुआत की। इस कदम का सीधा असर यह हुआ कि फंडिंग की प्रभावी लागत और टीएलआरईएफ सीधे तौर पर 40 प्रतिशत से गिरकर 37 प्रतिशत की नीतिगत दर के स्तर पर आ गए।
ब्याज दरों को लेकर आगामी बैठक में क्या रहेगा रुख
तरलता से जुड़े इन बदलावों के बाद, विश्लेषकों का अनुमान है कि तुर्की का केंद्रीय बैंक इस गुरुवार को होने वाली अपनी बैठक में नीतिगत दरों को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखेगा। केंद्रीय बैंक के इस रुख से साफ है कि वह अर्थव्यवस्था की मौजूदा चाल का आकलन करने के बाद ही कोई अगला बड़ा कदम उठाएगा।
साल के अंत तक दरों को लेकर क्या हैं अनुमान
बाजार के जानकारों का यह भी मानना है कि केंद्रीय बैंक इस साल के अंत तक नीतिगत दरों में कुछ और ढील दे सकता है। अनुमानों के मुताबिक, साल के अंत तक यह दरें घटकर 35 प्रतिशत के स्तर तक आ सकती हैं, जिससे बाजार में उधार की स्थिति और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है।
वैश्विक बाजारों में अन्य मुद्राओं और जिंसों का हाल
एशियाई सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में मजबूती देखने को मिली है, जबकि अमेरिकी बांड यील्ड में नरमी के चलते डॉलर पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, सोने की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव का दौर जारी है क्योंकि मजबूत आंकड़ों के बाद निवेशकों की नजरें अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई हैं।


















