अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबाव को लेकर नया आकलन सामने आया है, जिसके मुताबिक सितंबर के महीने में कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी कोर सीपीआई की रफ्तार धीमी पड़ने के आसार हैं। टीडी सिक्योरिटीज की अमेरिकी आर्थिक शोध टीम ने अनुमान लगाया है कि सितंबर में कोर सीपीआई मासिक आधार पर घटकर 0.20 प्रतिशत पर आ सकती है। इस अध्ययन दल में ऑस्कर मुनोज़, एली नीर, गेनाडी गोल्डबर्ग और मौली ब्रूक्स शामिल हैं। उनके विश्लेषण के अनुसार कोर सर्विसेज और सुपरकोर श्रेणियों में नरमी आने से मूल्य वृद्धि की समग्र गति पर ब्रेक लगा है, हालांकि कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में सुधार के संकेत भी मिल रहे हैं।
सुपरकोर और मुख्य सेवाओं में नरमी से मिला सहारा
अर्थशास्त्रियों के अनुमान के अनुसार कोर सीपीआई में इस मासिक गिरावट की मुख्य वजह सुपरकोर सेगमेंट का कमजोर पड़ना है। अगस्त के महीने में सुपरकोर मुद्रास्फीति ने कुल आंकड़ों को ऊपर धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई थी, लेकिन सितंबर में इसके 0.24 प्रतिशत पर आ जाने का अनुमान लगाया गया है। इसके साथ ही पूरी कोर सर्विसेज श्रेणी की मासिक मुद्रास्फीति घटकर 0.22 प्रतिशत पर सिमटने की उम्मीद है। सेवाओं के इस व्यापक दायरे में राहत दिखने के बावजूद कुछ खास उप-वर्गों में कीमतों का दबाव बना हुआ है।
डिस्क्रीशनरी सेवाओं के तहत आने वाले हवाई किराए और ठहरने के खर्च में तेजी दर्ज की गई है। आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि लॉजिंग में 1.4 प्रतिशत और हवाई किराए में 2.1 प्रतिशत की मासिक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके बावजूद सुपरकोर में आई नरमी समग्र सर्विस बास्केट को नियंत्रित रखने में सहायक साबित हो रही है।
वस्तुओं और शेल्टर सेगमेंट में हल्का उछाल
सेवाओं के विपरीत कोर गुड्स और शेल्टर यानी आवास श्रेणी में विपरीत रुझान देखने को मिल रहा है। अगस्त में नरमी दिखाने के बाद सितंबर में शेल्टर मुद्रास्फीति में हल्का उछाल आने की संभावना है। इसी तरह कोर गुड्स के आंकड़े में भी वाहनों की कीमतों में आए बदलावों की वजह से मामूली बढ़ोतरी हो सकती है। इन दोनों घटकों में दर्ज की गई बढ़त ने सर्विस सेक्टर की नरमी के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित कर दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि इन मिले-जुले कारकों के चलते वार्षिक आधार पर कोर सीपीआई 2.4 प्रतिशत के स्तर पर लगभग सपाट बनी रहेगी। हालांकि अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि इस अनुमान में ऊपरी जोखिम बने हुए हैं, खासकर अगर डिस्क्रीशनरी सर्विसेज और एआई से जुड़े सामानों की मांग में उम्मीद से ज्यादा तेजी आती है।
दीर्घकालिक मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक असर
लंबी अवधि के परिदृश्य पर नजर डालें तो अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि कोर मुद्रास्फीति 2.4 प्रतिशत का निचला स्तर छूने के बाद साल 2026 के अंत तक 2.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वहीं हेडलाइन मुद्रास्फीति, जो मई में 4.2 प्रतिशत के शिखर पर पहुंची थी, 2026 के अंत तक धीरे-धीरे बढ़कर 3.9 प्रतिशत पर बंद होने का अनुमान है।
हेडलाइन मुद्रास्फीति का यह पूरा रुख काफी हद तक पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के समाधान पर निर्भर करेगा। ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण कीमतों का मार्ग प्रभावित हो सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रास्फीति को नीचे लाने की वास्तविक प्रक्रिया साल 2027 के मध्य तक ही दोबारा पटरी पर लौट सकेगी।
ग्लोबल करेंसी और कमोडिटी बाजार का हाल
मुद्रास्फीति और नीतिगत अपेक्षाओं के बीच वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी हलचल देखी जा रही है। शुक्रवार को एशियाई कारोबार के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) जोड़ी ने मजबूती दिखाई और यह 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रात भर आई गिरावट ने अमेरिकी डॉलर को उसके 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे रखा है, जिससे इस जोड़ी को सहारा मिला है। साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी आक्रामक नीतिगत उम्मीदें भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन दे रही हैं।
दूसरी ओर, डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 158.00 के आसपास अपनी बढ़त बनाए हुए है। जापान में जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट आई है, जिसने जापानी येन पर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के साथ-साथ भू-राजनीतिक चिंताओं ने डॉलर की चाल को सीमित दायरे में बांध रखा है।
सोने के बाजार में शुरुआती तेजी के बाद मुनाफावसूली देखी गई है। पीली धातु अपने साप्ताहिक उच्च स्तर से फिसलकर 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे आ गई है। अमेरिकी डॉलर में दोबारा लौटती मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के कारण सोने की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। इसके अलावा अक्टूबर में मिशिगन कंज्यूमर सेंटिमेंट इंडेक्स के लगातार तीसरे महीने गिरने का अनुमान है, जबकि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अपने 2026 के शिखर 102.50 के आसपास मजबूती बनाए हुए है।


















