भारत में खुदरा महंगाई के एक बार फिर तेज गति पकड़ने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति पर सीधा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में चौतरफा तेजी और गैर-खाद्य ईंधन की बढ़ती लागत के चलते सितंबर महीने में मुद्रास्फीति की वार्षिक दर 4.8 फीसदी से उछलकर 5.7 फीसदी पर पहुंच सकती है। इस तेजी के पीछे पिछले साल के तुलनात्मक आधार प्रभाव का भी योगदान है। इसके साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में असमान मानसून और सूखे जैसे हालात के कारण खाद्य आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे भारतीय रिज़र्व बैंक के लिए आने वाले समय में नीतिगत दरों में कटौती की गुंजाइश सीमित हो रही है। यदि मुद्रास्फीति में यह उछाल जारी रहता है, तो केंद्रीय बैंक दिसंबर 2026 में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का विकल्प खुला रख सकता है।
खाद्य पदार्थों और मुख्य महंगाई में लगातार तेजी का रुख
उच्च-आवृत्ति आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि खाने-पीने की जरूरी चीजों की कीमतों में दबाव केवल कुछ मदों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह व्यापक रूप ले चुका है। जल्द खराब होने वाले फल-सब्जियों के अलावा खाद्य तेल, चावल, दालें और चीनी जैसी बुनियादी वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़त देखी जा रही है। खाद्य टोकरी के इस तरह लगातार महंगे होने से उपभोक्ताओं के बजट पर सीधा असर पड़ रहा है। दूसरी ओर, मुख्य महंगाई में भी धीरे-धीरे तेजी आने के आसार हैं, जो केंद्रीय बैंक के इस आकलन की पुष्टि करता है कि कीमतों से जुड़े जोखिम अब सामान्य स्तर पर नहीं रहे हैं। अनियमित बारिश और महंगे कच्चे तेल की दोहरी मार से उत्पादन और ढुलाई दोनों की लागत बढ़ी है, जिससे खुदरा बाजार में वस्तुओं के दाम ऊंचे बने हुए हैं।
वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर और प्रमुख मुद्राओं की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में विभिन्न मुद्राओं के बीच मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले साप्ताहिक निचले स्तर से उबरने के बाद शुक्रवार को एशियाई कारोबार के दौरान 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ता नजर आया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रातोंरात आई गिरावट के कारण अमेरिकी डॉलर 18 महीने के उच्चतम स्तर से कुछ नीचे आया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला। इसके अतिरिक्त, रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से नीतिगत रुख कड़ा बने रहने की उम्मीदों ने भी इस जोड़ी को सहारा दिया है।
दूसरी ओर, डॉलर और जापानी येन की जोड़ी 158.00 के करीब अपनी बढ़त बनाए रखने में कामयाब रही। शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जापान में घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिससे येन पर दबाव बना रहा। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने फेडरल रिज़र्व के सख्त रुख और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच डॉलर की मजबूती को कुछ हद तक सीमित किया, जिससे इस मुद्रा जोड़ी की गिरावट थमी रही।
सोने के भाव और अमेरिकी उपभोक्ता धारणा पर नजर
कीमती धातुओं के बाजार में सोने की शुरुआती तेजी पर रोक लगती दिख रही है। शुक्रवार को पीली धातु अपने साप्ताहिक उच्च स्तर के करीब से फिसलकर 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे आ गई। अमेरिकी डॉलर में दोबारा लौटती मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में समग्र बढ़ोतरी के चलते सोने में आगे की बढ़त सीमित होती दिख रही है। निवेशक बॉन्ड यील्ड और डॉलर के उतार-चढ़ाव पर बारीक नजर बनाए हुए हैं, जिससे सर्राफा बाजार में सतर्कता का माहौल है।
इसके अलावा, व्यापक आर्थिक परिदृश्य में अक्टूबर महीने के दौरान मिशिगन उपभोक्ता भावना सूचकांक के शुरुआती आंकड़ों में लगातार तीसरे महीने गिरावट का अनुमान लगाया गया है। इस महत्वपूर्ण आंकड़े के जारी होने से पहले ही अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अपने 2026 के शिखर के पास 102.50 के दायरे में मजबूती बनाए रखने का प्रयास कर रहा है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता का रुख बना हुआ है।


















