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नारायणगढ़ की गौशाला में लंपी वायरस के मामले मिलने से हड़कंप, पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारीहरियाणा
26 अग॰ 2026, 3:58 pm (1 घंटे पहले)· 3

नारायणगढ़ की गौशाला में लंपी वायरस के मामले मिलने से हड़कंप, पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी

अंबाला के नारायणगढ़ क्षेत्र की एक गौशाला में गोवंश में लंपी स्किन डिजीज की पुष्टि के बाद पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। विभाग ने पशुपालकों को संक्रमित पशुओं को तुरंत अलग करने और बचाव के उपाय अपनाने के निर्देश दिए हैं।

हरियाणा के अंबाला जिले में मानसून की बारिश समाप्त होने के बाद गोवंश में संक्रामक बीमारी का खतरा गहराने लगा है। हाल ही में नारायणगढ़ क्षेत्र में स्थित एक गौशाला में कई पशुओं के लंपी स्किन डिजीज से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। इस घटना के सामने आते ही स्थानीय पशुपालकों में डर का माहौल है, क्योंकि यह बीमारी दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर सीधा असर डालती है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग ने गौशाला और आसपास के इलाकों में प्रभावित पशुओं की रिकवरी के लिए विशेष निगरानी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने सभी डेयरी चालकों और पशुपालकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और बीमारी के लक्षण दिखते ही संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से तुरंत अलग कर दें।

नारायणगढ़ की गौशाला में लंपी वायरस का प्रकोप और पशुपालकों की चिंता

अंबाला के नारायणगढ़ इलाके की गौशाला में गोवंश में लंपी स्किन डिजीज के लक्षण पाए जाने के बाद विभाग की टीम एक्टिव मोड में आ गई है। बरसात के बाद का मौसम विषाणु जनित संक्रामक रोगों के प्रसार के लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसे में लंपी वायरस तेजी से एक पशु से दूसरे पशु में फैल सकता है। इस बीमारी से पीड़ित पशुओं के शरीर पर गोल सर्कल और त्वचा पर गांठें बनने लगती हैं। इसके अलावा पशुओं की भूख कम हो जाती है और दुधारू गायों में दूध देने की क्षमता घटने लगती है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

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60 हजार पशुओं के टीकाकरण के बावजूद संक्रमण का खतरा क्यों?

अंबाला पशुपालन विभाग के एसडीओ डॉ. सुदेश कुमार ने बताया कि विभाग ने लंपी वायरस के खतरे को देखते हुए पूर्व में ही व्यापक तैयारी की थी। जुलाई महीने की शुरुआत में जिले भर में एक बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया गया था, जिसके तहत करीब 60 हजार गोवंश को लंपी रोधी वैक्सीन लगाई गई थी। नियम के अनुसार चार महीने से अधिक उम्र के पशुओं का ही टीकाकरण किया जाता है, जबकि उससे छोटे बछड़ों को वैक्सीन नहीं दी जाती। हालांकि डॉ. सुदेश कुमार ने स्पष्ट किया कि टीकाकरण के बाद भी पशुपालकों को ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए। यदि टीका लगा हुआ पशु भी किसी अत्यधिक संक्रमित पशु के संपर्क में आता है, तो उसमें बीमारी के लक्षण उभरने का जोखिम बना रहता है।

लंपी बीमारी के लक्षण और पशु स्वास्थ्य पर गंभीर असर

डॉ. सुदेश कुमार के अनुसार लंपी स्किन डिजीज के शुरुआती चरण में पशु को तेज बुखार आता है, जो लगातार चार से पांच दिनों तक बना रह सकता है। बुखार के बाद पशु की पूरी त्वचा पर गोल छल्ले, चकत्ते और गांठें दिखाई देने लगती हैं। यदि समय पर देखभाल न की जाए, तो गंभीर मामलों में यह गांठें फूटकर खुले घाव में तब्दील हो जाती हैं। जिन पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी कमजोर होती है, उनमें यह बीमारी अत्यधिक विकराल रूप ले लेती है और कई बार पशु की जान भी चली जाती है।

इलाज का अभाव और बचाव के सख्त नियम

लंपी एक संक्रामक वायरल बीमारी है, इसलिए इसे सीधे तौर पर खत्म करने की कोई विशिष्ट दवा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में केवल समय पर पहचान और बचाव ही पशुओं की जान बचा सकता है। डॉ. सुदेश कुमार ने सलाह दी है कि लक्षण दिखते ही बीमार पशु को तुरंत अलग बाड़े में रखें। उसके खाने और पीने का बर्तन अलग होना चाहिए। संक्रमित पशु का बचा हुआ चारा किसी भी स्थिति में स्वस्थ पशुओं को न खिलाएं, क्योंकि इससे वायरस आसानी से फैल जाता है। इसके अलावा संक्रमित पशु या प्रभावित क्षेत्र में जाने वाले व्यक्ति को घर लौटने के बाद हाथ और पैर साबुन से अच्छी तरह धोने के बाद ही स्वस्थ गोवंश के पास जाना चाहिए।

सवाल-जवाब

लंपी स्किन डिजीज के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
संक्रमित पशु को चार से पांच दिन तक तेज बुखार रहता है और उसकी त्वचा पर गोल छल्ले या गांठें उभरने लगती हैं।
क्या टीकाकरण के बाद भी पशु लंपी रोग से संक्रमित हो सकते हैं?
हां, टीकाकरण के बावजूद यदि स्वस्थ पशु किसी संक्रमित गोवंश के सीधे संपर्क में आता है, तो बीमारी फैल सकती है।
अंबाला में कितने गोवंश का लंपी रोधी टीकाकरण किया गया था?
जुलाई की शुरुआत में अंबाला जिले के करीब 60 हजार गोवंश को लंपी वायरस से बचाव का टीका लगाया गया था।
किस उम्र से छोटे बछड़ों या गोवंश को लंपी की वैक्सीन नहीं दी जाती?
चार महीने से कम उम्र के छोटे गोवंश को यह वैक्सीन नहीं लगाई जाती है।
लंपी वायरस से प्रभावित पशु का बचाव कैसे करें?
प्रभावित पशु को तुरंत अलग करें, उसके चारे-पानी का बर्तन अलग रखें और उसकी देखभाल के बाद हाथ-पैर धोकर ही दूसरे पशुओं के पास जाएं।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 मिनट पहले

नारायणगढ़ की गौशाला में लंपी वायरस के मामले सामने आना और साठ हजार टीकाकरण के बावजूद संक्रमण फैलना सार्वजनिक सुरक्षा व पशुधन प्रबंधन पर एक बड़ा सवाल है। मानसून के बाद वायरल रोगों के प्रसार की यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि केवल टीकाकरण अभियान पर्याप्त नहीं है, बल्कि चार महीने से कम उम्र के बछड़ों और संक्रमित पशुओं के आवागमन पर सख्त निगरानी और कानूनी पाबंदियों की तत्काल आवश्यकता है ताकि यह प्रकोप महामारी का रूप न ले सके।

Rohan Verma@rohan-verma·36 मिनट पहले

यह घटना दिखाती है कि प्रशासनिक दावे और ज़मीनी हक़ीक़त में अभी भी बड़ा अंतर है। टीकाकरण के बाद भी संक्रमण फैलने का मतलब है कि गौशालाओं में स्वच्छता और आइसोलेशन प्रोटोकॉल का पालन कमज़ोर है। यदि समय रहते छोटे बछड़ों और अतिसंवेदनशील पशुओं के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवच और ब्लॉक स्तर पर निगरानी समितियां नहीं बनाई गईं, तो यह स्थानीय प्रकोप ग्रामीण अर्थव्यवस्था और दुग्ध उत्पादन को गहरी चोट पहुँचा सकता है।

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