वैश्विक वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स पर भारी दबाव देखा जा रहा है, जिसकी मुख्य वजह जापानी येन में आई तेज तेजी है। इस मुद्रा में मजबूती ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों के प्रभाव को भी पीछे छोड़ दिया है। निवेशकों की निगाहें अब आने वाले समय में होने वाली नीतिगत बैठकों और महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई हैं।
येन की चाल और बाजार का रुख
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में पिछले कुछ सत्रों से लगातार तेजी बनी हुई है, जिससे डॉलर पर चौतरफा दबाव है। विश्लेषकों का मानना है कि बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख, पूंजी की स्वदेश वापसी और येन आधारित कैरी ट्रेड के समाप्त होने से जापानी मुद्रा को भारी समर्थन मिल रहा है। इस कारण मुद्रा जोड़ी USD/JPY गिरकर छह-साढ़े-छह महीने के निचले स्तर करीब 154.40 पर आ गई है। इसके अलावा, सोमवार को भी इस मुद्रा जोड़ी में कमजोरी का रुख जारी रहा और यह सात महीने के निचले स्तर 154.00 के आसपास कारोबार करती नजर आई।
महंगाई और फेडरल रिजर्व की नीतियां
डॉलर के मोर्चे पर महंगाई को लेकर चिंताएं, नीतिगत विश्वसनीयता को लेकर उठते सवाल और राजनीतिक जोखिम भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। एचएसबीसी के विश्लेषकों का कहना है कि फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष की जैक्सन होल बैठक में दी गई टिप्पणियों ने महंगाई से निपटने की प्रतिबद्धता को लेकर कुछ हद तक भरोसा बहाल किया है। इससे फिलहाल डॉलर की साख को लेकर चल रही नकारात्मक चर्चाओं पर थोड़ा विराम लगा है। हालांकि, मजबूत रोजगार आंकड़ों के सामने आने के बाद व्यापारियों ने 15-16 सितंबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को बढ़ा दिया है।
कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव का असर
मध्य पूर्व में आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के जोखिम को और हवा दे रही हैं। अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी कच्चे तेल के तीन टैंकरों को निशाना बनाए जाने और सऊदी अरामको की जाजान रिफाइनरी पर हमले की खबरों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। सीएमई फेडवॉक टूल के अनुसार, व्यापारियों का अनुमान है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक अगले सप्ताह ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इस फैसले से ठीक पहले आने वाले दिनों में उत्पादक मूल्य सूचकांक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े आने वाले हैं, जो नीतिगत दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
मौद्रिक नीति और केंद्रीय बैंक के आंकड़े
संयुक्त राज्य अमेरिका में मौद्रिक नीति फेडरल रिजर्व द्वारा संचालित होती है, जिसके मुख्य उद्देश्यों में मूल्य स्थिरता और पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना शामिल है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में समायोजन करता है। जब महंगाई केंद्रीय बैंक के दो प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो दरों में वृद्धि की जाती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अमेरिका में निवेश करना अधिक आकर्षक हो जाता है और डॉलर मजबूत होता है। इसके विपरीत, महंगाई कम होने या बेरोजगारी बढ़ने पर दरों में कटौती की जाती है। फेडरल रिजर्व साल में आठ बार नीतिगत बैठकें आयोजित करता है, जिसमें संघीय खुले बाजार समिति आर्थिक स्थितियों की समीक्षा करती है।
मात्रात्मक सहजता और कड़ाई की स्थिति
चरम स्थितियों में फेडरल रिजर्व मात्रात्मक सहजता का सहारा ले सकता है, जिसके तहत वित्तीय प्रणाली में ऋण के प्रवाह को बढ़ाया जाता है। यह संकट के समय उपयोग किया जाने वाला एक गैर-मानक उपाय है, जिसका उपयोग 2008 के वित्तीय संकट के दौरान किया गया था। इसके विपरीत, मात्रात्मक कड़ाई वह प्रक्रिया है जिसमें केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थाओं से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड के मूलधन का पुनर्निवेश नहीं करता है, जो आमतौर पर डॉलर के लिए सकारात्मक माना जाता है.
अन्य बाजारों और परिसंपत्तियों की स्थिति
फॉरेक्स बाजार में अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों और परिसंपत्तियों में भी हलचल देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मई के मध्य के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब समेकित हो रहा है और सप्ताह की शुरुआत में 0.7200 के आसपास मंडरा रहा है। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में पिछले सत्र की गिरावट के बाद कुछ सुधार हुआ है और यह प्रति ट्रॉय औंस 4,400 डॉलर के स्तर को पुनः प्राप्त करने में सफल रहा है। इसके साथ ही, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में Bittensor में पिछले पांच दिनों से लगातार बढ़त देखी जा रही है और इसमें 25 प्रतिशत का लाभ दर्ज किया गया है। इसके अलावा, ऊर्जा बाजार में अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड में भारी उछाल आया है और यह पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलकर 102.00 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।



















