अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन बढ़त बनाने की जद्दोजहद में जुटा हुआ है। शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यह मुद्रा जोड़ी 0.7100 के स्तर से ऊपर अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रही। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी ने अमेरिकी डॉलर की तेजी को थामने का काम किया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को तात्कालिक सहारा मिला। इसके साथ ही रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर बुलक द्वारा दिए गए सख्त बयानों ने भी ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीदों को हवा दी है। इन तमाम सकारात्मक कारकों के बावजूद, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख और वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त एक सीमित दायरे में कैद नजर आ रही है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए तकनीकी दायरा और उतार-चढ़ाव
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में हाल के कारोबारी सत्रों के दौरान तेज उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। दो दिन पहले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तेजी से फिसलकर 0.7075 के निचले स्तर तक चला गया था। इसके बाद बीते कल एशियाई कारोबारी सत्र की शुरुआत में जब यह 0.7090 के आसपास था, तब अत्यधिक गिरावट के बाद भी किसी ठोस स्थिरता के संकेत नहीं दिख रहे थे और नीचे की ओर जाने का जोखिम बना हुआ था। उस समय इसके 0.7070 से 0.7115 के सीमित दायरे में रहने की संभावना जताई गई थी। हालांकि बाजार ने अनुमानों से उलट रुख दिखाया और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने जोरदार वापसी करते हुए 0.7128 का स्तर छू लिया।
दिन के अंत में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.35 प्रतिशत की तेजी दर्ज करते हुए 0.7112 पर बंद हुआ। इस मजबूत वापसी से तात्कालिक दबाव काफी हद तक कम हो गया है। मौजूदा कारोबारी सत्र में इसके 0.7095 से 0.7130 के बीच एक सीमित दायरे में कारोबार करने के आसार हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भले ही अल्पावधि में तेज गिरावट का दबाव थमा हो, लेकिन समग्र संरचना अब भी सतर्क रहने का संकेत दे रही है।
बैंक ऑफ़ जापान की सख्ती के बावजूद दबाव में जापानी येन
दूसरी ओर जापानी मुद्रा के मोर्चे पर स्थिति बिल्कुल अलग रुख पेश कर रही है। शुक्रवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र में डॉलर के मुकाबले जापानी येन फिर से कमजोरी की गिरफ्त में आ गया। इस दौरान यह मुद्रा जोड़ी अपने दो हफ्ते के उच्चतम स्तर को छूते हुए 158.00 के करीब जा पहुंची। यह स्थिति तब देखने को मिली जब बैंक ऑफ़ जापान द्वारा नीतिगत दर को बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत किए जाने का अनुमान था और बैंक के गवर्नर उएदा ने भी आगे सख्त रुख बनाए रखने के संकेत दिए थे।
जापानी येन की इस ताजा कमजोरी के पीछे दर वृद्धि के प्रस्ताव के खिलाफ दो आश्चर्यजनक असहमति भरे वोटों को मुख्य वजह माना जा रहा है। इन असहमति वाले मतों ने बाजार में यह संदेश दिया कि बैंक ऑफ़ जापान की नीति निर्धारण समिति के भीतर भविष्य में दर वृद्धि की रफ्तार को लेकर एकराय नहीं है। ऐतिहासिक रूप से जापान की बेहद कम ब्याज दरों ने एक दशक से भी अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश के वित्तपोषण में अहम भूमिका निभाई थी। इससे येन वैश्विक स्तर पर फंडिंग के सबसे सस्ते स्रोतों में से एक बन गया था। अब जब बैंक ऑफ़ जापान नीति को कड़ा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब यह पुराना ढांचा एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जबकि बाकी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं पहले ही ब्याज दरें बढ़ा चुकी हैं।
सोने में तेजी और अमेरिकी आंकड़ों की प्रतीक्षा
कीमती धातुओं के बाजार में सोने की चमक लगातार दूसरे दिन बढ़ती हुई दिखाई दी। शुक्रवार को यूरोपीय सत्र के पहले पहर के दौरान सोने ने लगातार नए साप्ताहिक उच्चतम स्तरों को छुआ। बाजार में तेजी का रुख रखने वाले व्यापारी अब किसी भी नई आक्रामक स्थिति को लेने से पहले 4,400 डॉलर प्रति औंस के पार एक टिकाऊ ब्रेकआउट का इंतजार कर रहे हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की घटती यील्ड ने डॉलर की बढ़त पर लगाम लगाई है, जिससे सोने को ऊपरी स्तरों पर टिके रहने में मदद मिल रही है। हालांकि व्यापारी अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के आने वाले बयानों और मध्यम स्तर के अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से पहले पूरी तरह आक्रामक होने से बच रहे हैं। जब तक 4,400 डॉलर का स्तर निर्णायक रूप से पार नहीं होता, तब तक निवेशक अतिरिक्त संकेतकों की प्रतीक्षा कर सकते हैं।
बिटकॉइन की रिकवरी और निवेशकों का असमंजस
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन ने जुलाई के दौरान दर्ज किए गए 57,800 डॉलर के वार्षिक निचले स्तर से एक प्रभावशाली सुधार दिखाया है। उस निचले स्तर से अब तक बिटकॉइन में लगभग 33 प्रतिशत की रिकवरी देखी जा चुकी है। इसी सिलसिले में जुलाई और अगस्त दोनों महीनों में लगातार बढ़त दर्ज की गई है।
इस उल्लेखनीय उछाल के बाद भी बिटकॉइन अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर से लगभग 40 प्रतिशत नीचे बना हुआ है। इस स्थिति ने तकनीकी और संस्थागत कारोबारियों के सामने एक बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह सुधार किसी नए तेजी के दौर की औपचारिक शुरुआत है, या फिर यह व्यापक मंदी के चक्र के भीतर केवल एक अस्थायी राहत भरी रिकवरी बनकर रह जाएगा। आने वाले समय में वैश्विक ब्याज दरों और नकदी प्रवाह की स्थिति ही इस डिजिटल संपत्ति की अगली बड़ी दिशा तय करेगी।
















