अंतरराष्ट्रीय सराफा बाजार में सोने की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज की गई है, जिससे यह कीमती धातु पूरे सप्ताह के लिहाज से सकारात्मक दायरे में आ गई है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई मध्यम स्तर की गिरावट ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और ब्याज दरों में बढ़ोतरी से पड़ने वाले नकारात्मक असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया है। तकनीकी चार्ट पर पीली धातु 4,400 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक आंकड़े के आसपास संघर्ष कर रही है, जहां खरीदार आगे की रणनीति तय करने से पहले इस स्तर से ऊपर टिकाऊ मजबूती का इंतजार कर रहे हैं। यदि तेजी का यह सिलसिला बरकरार रहता है, तो XAU/USD को 4,500 डॉलर के स्तर से ऊपर कड़े रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है। वहीं गिरावट की स्थिति में 4,335 डॉलर का सत्र निचला स्तर तात्कालिक सपोर्ट मुहैया कराएगा, जिसके बाद 6 अगस्त के 4,223 डॉलर और 16 सितंबर के 4,235 डॉलर के निचले स्तरों के बीच एक अहम सपोर्ट दायरा मौजूद है।
सुरक्षित निवेश और मुद्रा विविधीकरण का ऐतिहासिक आधार
मानव इतिहास में सोने ने मूल्य संग्रह और विनिमय के प्रमुख माध्यम के रूप में हमेशा से एक अनिवार्य भूमिका निभाई है। आभूषणों में इसकी चमक और उपयोग के अलावा, आधुनिक वित्तीय व्यवस्था में इस धातु को एक प्रमुख सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) परिसंपत्ति माना जाता है। वैश्विक उथल-पुथल, मंदी के खतरे या युद्ध जैसी परिस्थितियों में निवेशक पूंजी की सुरक्षा के लिए पारंपरिक रूप से सोने का रुख करते हैं। इसके अलावा, सोना किसी भी सरकार या विशिष्ट वित्तीय संस्था की देनदारी से मुक्त होता है, जिससे यह मुद्रा अवमूल्यन और बढ़ती महंगाई के खिलाफ एक बेहद कारगर सुरक्षा कवच (हेज) के रूप में कार्य करता है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारकों में शामिल हैं। मुश्किल वक्त में अपनी घरेलू मुद्राओं को स्थिरता प्रदान करने और अपनी वित्तीय साख को मजबूत करने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का विविधीकरण करते हुए बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी करते हैं। किसी भी देश के पास मौजूद विशाल स्वर्ण भंडार उसकी वित्तीय शोधन क्षमता और आर्थिक विश्वसनीयता का बड़ा स्रोत माना जाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 के दौरान वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडारों में कुल 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह आंकड़ा रिकॉर्ड दर्ज किए जाने की शुरुआत के बाद से किसी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी केंद्रीय बैंक खरीदारी के रूप में दर्ज हुआ। विशेष रूप से चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में तेजी से विस्तार कर रहे हैं।
अमेरिकी डॉलर और वित्तीय परिसंपत्तियों के साथ विपरीत संबंध
सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ ऐतिहासिक रूप से विपरीत संबंध देखा जाता है। चूंकि सोना और डॉलर दोनों ही प्रमुख वैश्विक आरक्षित परिसंपत्तियां हैं, इसलिए जब डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर आधारित सोने की खरीदारी अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सस्ती हो जाती है। यह प्रक्रिया सोने की मांग और कीमतों में इजाफा करती है। इसी तरह, सोने का वित्तीय बाजारों में जोखिम वाली संपत्तियों (जैसे इक्विटी बाजार) के साथ भी उलटा रिश्ता होता है। जब शेयर बाजारों में जोरदार तेजी आती है, तो निवेशक सुरक्षित संपत्तियों से पूंजी निकालकर शेयरों में लगाते हैं, जिससे सोने की कीमतें सुस्त पड़ती हैं। इसके विपरीत, जोखिम भरे बाजारों में बिकवाली के दौर में सोने को सबसे अधिक तरजीह मिलती है।
सोने पर कोई नियमित ब्याज या यील्ड नहीं मिलता है। इस वजह से जब वैश्विक ब्याज दरें नीचे आती हैं, तो सोने को रखने की अवसर लागत (ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट) कम हो जाती है और इसकी मांग बढ़ जाती है। इसके उलट, महंगे कर्ज और ऊंची ब्याज दरों का दौर आमतौर पर सोने की कीमतों पर दबाव डालता है। चूंकि वैश्विक स्तर पर सोना मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर (XAU/USD) में आंका जाता है, इसलिए डॉलर सूचकांक की हर छोटी-बड़ी हलचल सोने के मूल्य निर्धारण को सीधे प्रभावित करती है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई हालिया नरमी ने डॉलर की बढ़त को सीमित रखा है, जिसका सीधा फायदा सोने को यूरोपीय सत्र के दौरान मिला है।
वैश्विक फॉरेक्स और क्रिप्टो बाजारों का व्यापक परिदृश्य
सोने के अलावा वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी कई महत्वपूर्ण गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। AUD/USD शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान लगातार दूसरे दिन बढ़त बनाए रखते हुए 0.7100 के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी के कारण अमेरिकी डॉलर के खरीदार दबाव में रहे। इसके साथ ही, आरबीए गवर्नर बुलक की ब्याज दरों में बढ़ोतरी से जुड़ी आक्रामक टिप्पणियों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को अतिरिक्त सहारा दिया। हालांकि, फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने अमेरिकी डॉलर की गिरावट को सीमित करते हुए इस मुद्रा जोड़ी की तेजी पर एक हद तक लगाम लगाए रखी।
यूरोपीय सत्र में USD/JPY ने अपनी बढ़त को फिर से तेज किया और 158.00 के करीब पहुंचकर दो सप्ताह के उच्चतम स्तर को छुआ। जापानी येन में यह कमजोरी बैंक ऑफ जापान (बीओजे) द्वारा नीतिगत ब्याज दरों को 1.25% तक बढ़ाने के अपेक्षित कदम और गवर्नर उएडा की आक्रामक टिप्पणियों के बावजूद जारी रही। बाजार में बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि के खिलाफ आए दो अप्रत्याशित असहमति वाले मतों ने येन पर नकारात्मक दबाव बना दिया। दशकों तक जापान की अल्ट्रा-लो ब्याज दरों ने दुनिया भर में खरबों डॉलर के वैश्विक निवेशों को फंड करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में बदल गया था। अब जब बैंक ऑफ जापान नीतिगत सख्ती के नए दौर में प्रवेश कर रहा है, तो लंबे समय से जारी यह वित्तीय समीकरण नए चरण में पहुंच रहा है।
दूसरी ओर, डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बिटकॉइन (BTC) ने जुलाई में 57,800 डॉलर के वार्षिक निचले स्तर को छूने के बाद जोरदार वापसी दर्ज की है। जुलाई और अगस्त में लगातार दो महीने की बढ़त के साथ बिटकॉइन लगभग 33% चढ़ चुका है। इस उल्लेखनीय सुधार के बावजूद बिटकॉइन अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर से लगभग 40% नीचे बना हुआ है। इसने बाजार के विश्लेषकों और ट्रेडर्स के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह तेजी एक नए बुल मार्केट चक्र का आगाज है, या फिर यह व्यापक बेयर मार्केट चक्र के भीतर केवल एक तकनीकी रिकवरी है।
















