वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की व्यापक कमजोरी के कारण यूरो में जोरदार उछाल देखा गया है। यूरो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.1600 के महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर को तोड़ते हुए 12 दिन के उच्च स्तर 1.1640 के पार पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में जोखिम से बचने के बने माहौल और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद यूरो में यह बढ़त दर्ज की गई है। मुद्रा विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि यूरो को डॉलर की कमजोरी का लाभ मिल रहा है, लेकिन यूरो की यह तेजी सीमित रह सकती है। इसका मुख्य कारण ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और फारस की खाड़ी में गहराता भू-राजनीतिक तनाव है, जिससे वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर खतरा मंडरा रहा है।
डॉलर के अवमूल्यन की चर्चा से ग्रीनबैक पर दबाव
राबोबैंक के वित्तीय बाजार विश्लेषकों के अनुसार, हाल के कारोबारी सत्रों में अमेरिकी डॉलर का रुख अनिर्णायक और सुस्त रहा है, जो विदेशी मुद्रा बाजार में निवेशकों की धारणा में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है। इस बदलाव का मुख्य कारण 19 अगस्त को अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेन्ट द्वारा बांड बाजार में हस्तक्षेप की घोषणा है। उस घोषणा के बाद से ही अमेरिकी डॉलर के अवमूल्यन (डिबेसमेंट) पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई, जिससे अमेरिकी ग्रीनबैक में संस्थागत निवेशकों का विश्वास कमजोर हुआ है।
अवमूल्यन से जुड़ी इन चिंताओं के कारण अमेरिकी डॉलर उन आर्थिक आंकड़ों और मौद्रिक नीति उम्मीदों का लाभ उठाने में पूरी तरह विफल रहा है जो सामान्य परिस्थितियों में अमेरिकी मुद्रा को मजबूती प्रदान करते हैं। निवेशक डॉलर में नई खरीदारी करने से बच रहे हैं, जिससे यूरो, जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं को बढ़त हासिल करने का मौका मिला है।
ईसीबी का ब्याज दर निर्णय और मौद्रिक नीति ढांचा
विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो के मजबूत होने के साथ ही निवेशकों की नजरें जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर पर टिकी हैं, जहां यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) स्थित है। ईसीबी यूरो क्षेत्र के देशों के लिए केंद्रीय रिजर्व बैंक के रूप में कार्य करता है। वित्तीय बाजार गुरुवार को होने वाली ईसीबी की मौद्रिक नीति बैठक में 0.25 प्रतिशत (25 बेसिस पॉइंट्स) की ब्याज दर वृद्धि की पूरी तैयारी कर रहे हैं।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक का मुख्य कार्य पूरे यूरो क्षेत्र में कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है, जिसका अर्थ वार्षिक मुद्रास्फीति दर को 2 प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास रखना है। मूल्य स्थिरता के इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक साधन मुख्य ब्याज दरों में वृद्धि या कटौती करना है। अपेक्षाकृत उच्च ब्याज दरें आमतौर पर विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करती हैं और यूरो विनिमय दर को मजबूत करती हैं, जबकि कम ब्याज दरें मुद्रा को कमजोर करती हैं।
यूरो क्षेत्र में मौद्रिक नीति के फैसले ईसीबी की शासी परिषद (गवर्निंग काउंसिल) द्वारा लिए जाते हैं, जिसकी बैठक साल में 8 बार होती है। इस शासी परिषद में सभी यूरो क्षेत्र सदस्य देशों के राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों के साथ-साथ 6 स्थायी कार्यकारी बोर्ड सदस्य शामिल होते हैं, जिनकी अध्यक्षता ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लागार्ड करती हैं।
क्वांटिटेटिव ईज़िंग (क्यूई) की कार्यप्रणाली
असाधारण आर्थिक परिस्थितियों में, जब मूल्य स्थिरता बनाए रखने या अवस्फीति के जोखिमों से निपटने के लिए मानक ब्याज दर कटौतियां अपर्याप्त साबित होती हैं, तब यूरोपीय सेंट्रल बैंक क्वांटिटेटिव ईज़िंग (क्यूई) नामक एक गैर-पारंपरिक नीतिगत उपकरण लागू कर सकता है। क्वांटिटेटिव ईज़िंग एक आक्रामक मौद्रिक विस्तार प्रक्रिया है जिसके तहत ईसीबी नई यूरो मुद्रा जारी करता है और वाणिज्यिक बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों से सीधे वित्तीय संपत्तियां खरीदता है। इन संपत्तियों में मुख्य रूप से सरकारी बांड और कॉर्पोरेट बांड शामिल होते हैं।
इन बांडों की खरीदारी के माध्यम से केंद्रीय बैंक बैंकिंग प्रणाली में बड़ी मात्रा में तरलता का प्रवाह करता है, जिससे ऋण देने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। हालांकि, यूरो की आपूर्ति में इस वृद्धि के कारण आमतौर पर यूरो की विनिमय दर कमजोर हो जाती है। ऐतिहासिक रूप से, ईसीबी ने 2009 से 2011 के महान वित्तीय संकट के दौरान, 2015 में मुद्रास्फीति के लगातार निचले स्तर पर रहने के दौरान और कोविड महामारी के कारण उत्पन्न आर्थिक उथल-पुथल के समय अंतिम उपाय के रूप में क्वांटिटेटिव ईज़िंग को लागू किया था।
क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (क्यूटी) और मुद्रा का मूल्यांकन
इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (क्यूटी) की प्रक्रिया क्वांटिटेटिव ईज़िंग के ठीक उलट होती है। क्वांटिटेटिव टाइटनिंग तब शुरू की जाती है जब आर्थिक सुधार मजबूत होता है और क्षेत्र में मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ने लगता है। जहां क्वांटिटेटिव ईज़िंग में बैंकिंग क्षेत्र में तरलता बढ़ाने के लिए बांड खरीदे जाते हैं, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग वह चरण है जहां ईसीबी नए बांड की शुद्ध खरीदारी पूरी तरह रोक देता है।
इसके अलावा, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के तहत ईसीबी अपनी बैलेंस शीट पर मौजूद परिपक्व होने वाले सरकारी और कॉर्पोरेट बांडों के मूलधन का पुनर्निवेश बंद कर देता है। जैसे-जैसे बांड बिना किसी पुनर्निवेश के परिपक्व होते हैं, केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट छोटी होती जाती है और वित्तीय प्रणाली से अतिरिक्त तरलता धीरे-धीरे वापस ले ली जाती है। इस मौद्रिक सख्ती को आमतौर पर यूरो मुद्रा के लिए सकारात्मक और बुलिश माना जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में इसके मूल्यांकन को मजबूती मिलती है।
मध्य पूर्व में सैन्य संघर्ष और ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल
यूरो में आई तेजी के बावजूद विदेशी मुद्रा रणनीतिकारों का कहना है कि ऊर्जा बाजार में बने भारी जोखिमों के कारण यूरो की बढ़त सीमित रह सकती है। फारस की खाड़ी में सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ने से कच्चे तेल की कीमतें 3 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। मंगलवार को तेहरान द्वारा जॉर्डन स्थित अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत और एक हवाई अड्डे को निशाना बनाकर सैन्य हमले किए जाने के बाद स्थिति काफी गंभीर हो गई है।
अमेरिकी सेना ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई ईरानी तेल टैंकरों पर जवाबी हमले किए। इस बीच, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के भीतर स्थित प्रमुख तेल संयंत्रों पर हमले किए। इन बहुपक्षीय सैन्य झड़पों के कारण एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदलने का जोखिम पैदा हो गया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊर्जा दरें ऊंची रहने की आशंका है।
डीजल क्रैक स्प्रेड का रिकॉर्ड उच्च स्तर
यद्यपि कच्चे तेल के मुख्य बाजार में ऐतिहासिक उछाल की तुलना में कुछ स्थिरता दिख रही है, लेकिन ईंधन आपूर्ति को लेकर डीजल बाजार से बेहद चिंताजनक संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका में डीजल क्रैक स्प्रेड, जो वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चे तेल की तुलना में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स के प्रीमियम को मापता है, इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। इसने कारोबार के दौरान 102.00 डॉलर प्रति बैरल से अधिक का सर्वकालिक उच्च स्तर छुआ।
डीजल क्रैक स्प्रेड में यह अभूतपूर्व वृद्धि रिफाइंड ईंधन की भारी वैश्विक कमी को दर्शाती है। डीजल की बढ़ती कीमतों से दुनिया भर में वाणिज्यिक परिवहन और माल ढुलाई का खर्च सीधे बढ़ जाता है, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के लिए नीतियां बनाना जटिल हो जाता है।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य रुझान
यूरो और अमेरिकी डॉलर के इस उतार-चढ़ाव के साथ ही वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में कई अन्य महत्वपूर्ण बदलाव देखे जा रहे हैं
- ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD): बुधवार को एशियाई कारोबार के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7200 के स्तर से ऊपर स्थिर रहा। चीन में जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) के ऊंचे आंकड़ों का इस पर कोई खास असर नहीं पड़ा। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की बढ़ती संभावनाओं और जापानी येन में तेजी के कारण डॉलर की कमजोरी से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को समर्थन मिला। बाजार अब नए रुझानों के लिए इस सप्ताह के अंत में जारी होने वाले अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों का इंतजार कर रहा है।
- जापानी येन (USD/JPY): बुधवार के एशियाई सत्र में USD/JPY जोड़ी पर बिकवाली का नया दबाव देखा गया। रॉयटर्स तानकन के मजबूत व्यापारिक सर्वेक्षण ने बैंक ऑफ जापान (बीओजे) द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की उम्मीदों को मजबूत किया, जिससे जापानी येन की मांग बढ़ी। येन की मजबूती और डॉलर की नरमी के कारण यह जोड़ी मंगलवार को दर्ज किए गए लगभग 7 महीने के निचले स्तर के करीब बनी हुई है।
- स्पॉट गोल्ड (4,400 डॉलर का स्तर): अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपने एक हफ्ते के निचले स्तर से उबरते हुए बुधवार के यूरोपीय सत्र में 4,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया। जापानी येन की रैली के कारण अमेरिकी डॉलर सूचकांक दो हफ्ते से अधिक के निचले स्तर के करीब बना हुआ है, जिसके चलते सोने की तीन दिनों की गिरावट थम गई।



















